17 अगस्त 2026
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लखनऊ: शिक्षकों की कमी व खराब भोजन से नाराज छात्राओं ने बाईपास जाम किया, डीएम को तलब करने की मांग

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लखनऊ: शिक्षकों की कमी व खराब भोजन से नाराज छात्राओं ने बाईपास जाम किया, डीएम को तलब करने की मांग

सारांश

तेज बारिश में ढाई किलोमीटर पैदल चलकर बाईपास पर बैठ गईं लखनऊ के सरकारी स्कूल की छात्राएं — शिक्षकों की कमी, खराब खाना और अभद्र व्यवहार से तंग आकर। बार-बार शिकायत के बावजूद कोई सुनवाई नहीं, अब सीधे जिलाधिकारी से जवाब माँग रही हैं।

मुख्य बातें

लखनऊ के जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय की छात्राओं ने 17 अगस्त को दुबग्गा-कानपुर बाईपास चौराहे पर सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन किया।
छात्राओं ने शिक्षकों की कमी , खराब मध्याह्न भोजन , अभद्र भाषा के प्रयोग और अपर्याप्त चिकित्सा सुविधा का आरोप लगाया।
विद्यालय से ढाई किलोमीटर पैदल चलकर छात्राएं बाईपास पहुँचीं, जिससे यातायात बाधित हुआ।
छात्राओं की माँग है कि जिलाधिकारी स्वयं मौके पर आकर समस्याओं का तत्काल समाधान सुनिश्चित करें।
पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुँचे, लेकिन छात्राएं डीएम की उपस्थिति की माँग पर अड़ी रहीं ।

लखनऊ के पारा क्षेत्र स्थित जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय की छात्राओं ने 17 अगस्त 2026 को स्कूल प्रशासन की कथित लापरवाही के खिलाफ सड़क पर उतरकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। तेज बारिश की परवाह किए बिना छात्राएं विद्यालय से निकलकर करीब ढाई किलोमीटर पैदल चलकर दुबग्गा-कानपुर बाईपास चौराहे पर पहुँचीं और सड़क पर बैठ गईं, जिससे यातायात बाधित हो गया और मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

मुख्य शिकायतें

छात्राओं ने कई गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि विद्यालय में पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं, जिससे उनकी पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। इसके अलावा मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता अत्यंत खराब बताई जा रही है। एक छात्रा ने आरोप लगाया कि कुछ शिक्षक उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं और उनकी कोई सुनवाई नहीं होती।

छात्राओं का यह भी कहना है कि विद्यालय में किसी के बीमार पड़ने पर समय पर चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जाती। उनके अनुसार ये समस्याएं नई नहीं हैं — कई बार संबंधित अधिकारियों को शिकायतें दी गई हैं, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

प्रदर्शन की सूचना मिलते ही पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुँचे। अधिकारियों ने छात्राओं से बातचीत कर उन्हें शांत कराने और स्थिति सामान्य करने का प्रयास किया। हालाँकि, छात्राएं अपनी माँग पर अड़ी रहीं — वे चाहती थीं कि जिलाधिकारी स्वयं मौके पर आएं और उनकी समस्याओं का तत्काल समाधान सुनिश्चित करें।

आम जनता और यातायात पर असर

दुबग्गा-कानपुर बाईपास जैसे व्यस्त मार्ग पर छात्राओं के बैठने से वाहनों की लंबी कतार लग गई। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में सरकारी विद्यालयों की व्यवस्था पर पहले से सवाल उठते रहे हैं। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने हाल के वर्षों में सरकारी स्कूलों के उन्नयन का दावा किया है, लेकिन ज़मीनी हकीकत अक्सर अलग तस्वीर पेश करती है।

क्या होगा आगे

अधिकारियों की ओर से छात्राओं की शिकायतें सुनने और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने की खबर है। यह देखना होगा कि प्रशासन शिक्षकों की नियुक्ति, भोजन गुणवत्ता सुधार और चिकित्सा सुविधाओं के मामले में कितनी जल्दी ठोस कदम उठाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि लंबे समय से अनसुनी पड़ी शिकायतों का विस्फोट है। उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी स्कूलों के 'ऑपरेशन कायाकल्प' का ढोल पीटा है, लेकिन लखनऊ जैसे राजधानी शहर के स्कूल में शिक्षकों की कमी और खराब भोजन यह सवाल खड़ा करते हैं कि योजनाएं कागज़ से ज़मीन तक कब पहुँचेंगी। अभद्र भाषा के आरोप और भी गंभीर हैं — यदि सत्यापित हों तो यह सिर्फ प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि बच्चियों की गरिमा का सवाल है।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लखनऊ की छात्राओं ने विरोध प्रदर्शन क्यों किया?
जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय की छात्राओं ने शिक्षकों की कमी, खराब मध्याह्न भोजन, अभद्र भाषा के प्रयोग और बीमार पड़ने पर समय पर चिकित्सा न मिलने के खिलाफ विरोध किया। छात्राओं का कहना है कि बार-बार शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
प्रदर्शन कहाँ और कब हुआ?
यह प्रदर्शन 17 अगस्त 2026 को लखनऊ के दुबग्गा-कानपुर बाईपास चौराहे पर हुआ। छात्राएं विद्यालय से करीब ढाई किलोमीटर पैदल चलकर वहाँ पहुँचीं और सड़क पर बैठ गईं।
छात्राओं की मुख्य माँग क्या थी?
छात्राओं ने माँग की कि जिलाधिकारी स्वयं मौके पर आएं और उनकी समस्याओं — शिक्षकों की नियुक्ति, भोजन गुणवत्ता सुधार और चिकित्सा सुविधा — का तत्काल समाधान सुनिश्चित करें।
प्रशासन ने इस पर क्या कदम उठाए?
प्रदर्शन की सूचना मिलते ही पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुँचे और छात्राओं से बातचीत कर स्थिति सामान्य करने का प्रयास किया। हालाँकि, छात्राएं जिलाधिकारी की उपस्थिति की माँग पर अड़ी रहीं।
क्या यूपी के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी एक बड़ी समस्या है?
उत्तर प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की कमी एक पुरानी समस्या रही है। राज्य सरकार ने समय-समय पर भर्ती अभियान चलाए हैं, लेकिन ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के कई स्कूलों में अभी भी पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं।
राष्ट्र प्रेस
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