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यूपीआई एमडीआर पर BJP सांसद प्रवीण खंडेलवाल बोले — 0.40% शुल्क बहुत कम, पैसा सरकार के पास नहीं जाता

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यूपीआई एमडीआर पर BJP सांसद प्रवीण खंडेलवाल बोले — 0.40% शुल्क बहुत कम, पैसा सरकार के पास नहीं जाता

सारांश

यूपीआई पर एमडीआर को लेकर बहस तेज है — और अब BJP सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने खुलकर कहा कि 0.40% शुल्क न्यायसंगत है। उनका तर्क है कि यह पैसा सरकार का नहीं, डिजिटल बुनियादी ढाँचे का खर्च है। यह बयान संकेत देता है कि सत्तारूढ़ दल यूपीआई शुल्क की दिशा में जनमत तैयार कर रहा है।

मुख्य बातें

BJP सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने 26 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में यूपीआई MDR 0.40% को उचित और कम बताया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि एमडीआर की राशि सरकार के पास नहीं , बल्कि टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर्स और बैंकों को जाती है।
₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर रुपे डेबिट कार्ड पर कोई शुल्क नहीं लगता।
पिछले 10 वर्षों से यूपीआई पर एमडीआर नहीं लगाया गया है — खंडेलवाल का दावा।
उन्होंने विकसित भारत 2047 में व्यापारी वर्ग की भूमिका और कौशल विकास पर भी जोर दिया।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने 26 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान यूपीआई मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) पर चल रही बहस में स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि 0.40 प्रतिशत का प्रस्तावित एमडीआर शुल्क बेहद मामूली है और यह राशि सरकारी खजाने में नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी प्रदाताओं और बैंकों को जाती है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब यूपीआई पर शुल्क लगाने की संभावना को लेकर उपभोक्ताओं और व्यापारियों के बीच व्यापक चर्चा जारी है।

खंडेलवाल का मुख्य तर्क

प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि किसी भी सेवा के उपयोग के एवज में शुल्क चुकाना एक सामान्य और स्वाभाविक प्रक्रिया है। उन्होंने कहा, 'जब भी हम कोई सेवा लेते हैं तो हमें उस सेवा के लिए भुगतान करना चाहिए। 0.40 प्रतिशत का एमडीआर बहुत कम है।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह शुल्क तकनीकी अवसंरचना बनाए रखने वाले टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर्स और बैंकों को प्राप्त होता है, न कि सरकार को।

रुपे कार्ड और एमडीआर की पृष्ठभूमि

खंडेलवाल ने बताया कि ₹2,000 से अधिक के लेनदेन के लिए रुपे डेबिट कार्ड का उपयोग किया जा सकता है, जिस पर कोई शुल्क नहीं लगता। उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले 10 वर्षों से यूपीआई पर एमडीआर नहीं लगाया गया है। उनके अनुसार कुछ राजनीतिक दल इस मुद्दे को अनावश्यक विवाद में बदल रहे हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि डिजिटल भुगतान की तकनीकी लागत का वहन किसी न किसी स्तर पर आवश्यक है।

तकनीक और व्यापार पर व्यापक दृष्टिकोण

एक ज्वेलरी प्रदर्शनी में दिए गए अपने संबोधन का हवाला देते हुए BJP सांसद ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में तकनीक उन्नयन, आधुनिकीकरण और डिजिटलीकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय बदलाव आए हैं। उन्होंने जोर दिया कि देश के व्यापारियों और कारोबारियों तक तकनीक के नवीनतम अपडेट पहुँचाने के लिए निरंतर शोध ज़रूरी है। उन्होंने ट्रेड एसोसिएशनों से कौशल विकास को प्राथमिकता देने और विकसित भारत 2047 के संकल्प में व्यापारी वर्ग की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

चुनाव आयोग पर विपक्षी विरोध को लेकर प्रतिक्रिया

विपक्ष द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन पर खंडेलवाल ने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है जो नियमों, कानूनों और कायदों के अनुसार कार्य करती है। उन्होंने कहा कि मतभेद की स्थिति में उसे सुलझाने के वैधानिक तरीके उपलब्ध हैं और चुनाव आयोग इस मामले पर उचित संज्ञान लेगा।

आगे की स्थिति

यूपीआई एमडीआर का मसला अभी नीतिगत चर्चा के स्तर पर है और सरकार की ओर से कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है। हालाँकि, खंडेलवाल जैसे सत्तारूढ़ दल के वरिष्ठ सांसद का इस मुद्दे पर खुलकर समर्थन यह संकेत देता है कि भविष्य में डिजिटल भुगतान की लागत-संरचना पर नीतिगत पुनर्विचार हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भी सच है कि अंततः वह बोझ उपभोक्ता या व्यापारी ही उठाता है। बिना स्पष्ट नीतिगत दस्तावेज़ के इस बहस को राजनीतिक बताकर खारिज करना, असली प्रश्न — 'किसकी जेब पर असर?' — को टालना है।
RashtraPress
26 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपीआई एमडीआर (MDR) क्या होता है?
मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वह शुल्क है जो डिजिटल लेनदेन प्रसंस्करण की लागत के रूप में लिया जाता है। यूपीआई पर फिलहाल यह शुल्क शून्य है, लेकिन 0.40% एमडीआर लागू करने की बहस चल रही है।
प्रवीण खंडेलवाल ने यूपीआई MDR पर क्या कहा?
BJP सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने 26 सितंबर 2026 को कहा कि 0.40% एमडीआर बेहद कम है और यह राशि सरकार के पास नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी प्रदाताओं और बैंकों को मिलती है। उन्होंने किसी भी सेवा पर शुल्क लेने को सामान्य प्रक्रिया बताया।
क्या यूपीआई पर शुल्क लगाने का कोई सरकारी फैसला हुआ है?
अभी तक सरकार की ओर से यूपीआई एमडीआर लागू करने की कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। यह विषय नीतिगत चर्चा के स्तर पर है और खंडेलवाल का बयान सत्तारूढ़ दल की संभावित दिशा का संकेत माना जा रहा है।
रुपे डेबिट कार्ड पर शुल्क क्यों नहीं लगता?
खंडेलवाल के अनुसार, ₹2,000 से अधिक के लेनदेन के लिए रुपे डेबिट कार्ड पर कोई एमडीआर नहीं लगता। यह सरकार की उस नीति का हिस्सा है जो घरेलू भुगतान नेटवर्क को बढ़ावा देने के लिए लागू की गई है।
यूपीआई MDR से आम उपभोक्ता और व्यापारी पर क्या असर पड़ सकता है?
यदि 0.40% एमडीआर लागू होता है, तो छोटे व्यापारियों और कम आय वर्ग के उपभोक्ताओं पर प्रत्यक्ष या परोक्ष वित्तीय बोझ बढ़ सकता है। व्यापारी इस लागत को उत्पाद की कीमत में जोड़ सकते हैं, जिससे अंततः उपभोक्ता प्रभावित होंगे।
राष्ट्र प्रेस
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