यूपीटीईटी 2026: सीएम योगी ने दिए निर्देश, 2-4 जुलाई को 60 जनपदों में होगी परीक्षा, 19.94 लाख अभ्यर्थी
सारांश
मुख्य बातें
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 30 जून 2026 को उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी)-2026 की तैयारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा करते हुए स्पष्ट किया कि यह परीक्षा प्रदेश के लाखों युवाओं की आकांक्षाओं से सीधे जुड़ी है और इसकी निष्पक्षता, पारदर्शिता एवं विश्वसनीयता हर हाल में सुनिश्चित की जाए। परीक्षा 2, 3 एवं 4 जुलाई 2026 को 60 जनपदों के 955 परीक्षा केन्द्रों पर 5 पालियों में आयोजित होगी, जिसमें कुल 19,94,661 अभ्यर्थी सम्मिलित होंगे।
परीक्षा का विस्तृत कार्यक्रम
2 जुलाई को दोनों पालियों में उच्च प्राथमिक स्तर की परीक्षा आयोजित होगी। 3 जुलाई की प्रथम पाली में उच्च प्राथमिक तथा द्वितीय पाली में प्राथमिक स्तर की परीक्षा होगी। 4 जुलाई को प्रथम पाली में प्राथमिक स्तर की परीक्षा संपन्न होगी।
कुल 19,94,661 अभ्यर्थियों में से 17,67,180 उत्तर प्रदेश के हैं, जबकि 2,27,481 अभ्यर्थी अन्य राज्यों से परीक्षा देने आएंगे। इनमें 1,85,791 सेवारत शिक्षक एवं 18,08,870 नए अभ्यर्थी शामिल हैं। प्राथमिक स्तर के लिए 3,88,179, उच्च प्राथमिक स्तर के लिए 8,16,436 तथा दोनों स्तरों के लिए 3,95,023 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है।
प्रमुख जनपदों में व्यवस्था
सर्वाधिक अभ्यर्थियों वाले जनपदों में वाराणसी, प्रयागराज, लखनऊ, गोरखपुर, कानपुर नगर, मेरठ, मऊ, मुरादाबाद, आगरा और जौनपुर प्रमुख हैं। वाराणसी में 68 केन्द्रों पर 1,27,239 अभ्यर्थी, प्रयागराज में 53 केन्द्रों पर 76,634 तथा लखनऊ में 43 केन्द्रों पर 76,720 अभ्यर्थी परीक्षा देंगे।
इन जनपदों में बाहरी जिलों एवं अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के आगमन को देखते हुए यातायात, सुरक्षा, चिकित्सीय सहायता तथा प्रवास संबंधी व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
सीएम के निर्देश: सुविधा और सुरक्षा
मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों तथा प्रमुख यातायात केन्द्रों पर पर्याप्त सहायता व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। परिवहन निगम, रेलवे तथा आवश्यकतानुसार निजी परिवहन संचालकों के साथ समन्वय कर अतिरिक्त परिवहन उपलब्ध कराया जाए।
सभी परीक्षा केन्द्रों पर पेयजल, स्वच्छ शौचालय, छायादार प्रतीक्षास्थल, निर्बाध विद्युत आपूर्ति, अग्निशमन व्यवस्था तथा आकस्मिक चिकित्सा सुविधा अनिवार्य रूप से उपलब्ध रहे। वर्तमान मौसम को देखते हुए स्वास्थ्य एवं आपदा प्रबंधन तंत्र पूरी तरह सक्रिय रखने के निर्देश भी दिए गए। खाद्य एवं पेय पदार्थों के मूल्य अनावश्यक रूप से न बढ़ाए जाएं, यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया।
परीक्षा की शुचिता पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि परीक्षा ड्यूटी में केवल स्वच्छ छवि वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों की तैनाती की जाए। गोपनीय परीक्षा सामग्री के भंडारण, परिवहन तथा परीक्षा उपरांत आयोग तक उसके सुरक्षित प्रेषण की पूरी प्रक्रिया उच्चतम सुरक्षा मानकों के अनुरूप संपन्न कराई जाए। परीक्षा से एक दिन पूर्व सभी व्यवस्थाओं का पूर्वाभ्यास अनिवार्य रूप से किया जाए।
सोशल मीडिया तथा अन्य माध्यमों पर अफवाह, भ्रामक अथवा गलत सूचनाएं प्रसारित करने के प्रयासों पर कड़ी निगरानी रखने और ऐसे मामलों में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए गए। प्रत्येक जनपद में स्थापित कंट्रोल रूम प्रभावी ढंग से कार्य करें और किसी भी सूचना पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित हो।
सेवारत शिक्षकों के लिए अलग परीक्षा का निर्णय
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर सेवारत शिक्षकों के हितों के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया। उन्होंने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को निर्देश दिए कि सेवारत शिक्षकों के लिए पृथक शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) आयोजित की जाए, ताकि उन्हें पात्रता सुनिश्चित करने के पर्याप्त अवसर मिल सकें और केवल अवसर के अभाव में किसी शिक्षक को कठिनाई न उठानी पड़े। गौरतलब है कि वर्तमान परीक्षा में 1,85,791 सेवारत शिक्षक भी सम्मिलित हो रहे हैं।
यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब टीईटी अनिवार्यता को लेकर सेवारत शिक्षकों में चिंता बनी हुई थी। आने वाले दिनों में इस अलग परीक्षा की तिथि एवं स्वरूप संबंधी विस्तृत दिशानिर्देश जारी होने की संभावना है।