ईरान-अमेरिका परमाणु वार्ता: तेल प्रतिबंधों में अस्थायी छूट पर सहमति, ईरानी मीडिया का दावा
सारांश
मुख्य बातें
ईरान-अमेरिका परमाणु वार्ता के बीच ईरानी अर्ध-सरकारी मीडिया ने 18 मई 2026 को दावा किया कि अमेरिका ने किसी अंतिम समझौते तक पहुँचने से पहले ईरान के तेल प्रतिबंधों में अस्थायी छूट देने पर सहमति जताई है। यह जानकारी सूत्रों के हवाले से दी गई है और अभी तक अमेरिका की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
क्या है अमेरिकी प्रस्ताव
ईरान की अर्ध-सरकारी न्यूज़ एजेंसी तस्नीम ने एक सूत्र के हवाले से बताया कि अमेरिका ने ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) के तहत लगाए गए प्रतिबंधों में तब तक छूट देने का प्रस्ताव रखा है जब तक कोई अंतिम समझौता नहीं हो जाता। यह छूट स्थायी नहीं, बल्कि अस्थायी राहत के रूप में प्रस्तावित है।
हालाँकि ईरान इस आंशिक राहत से संतुष्ट नहीं है — तेहरान का स्पष्ट रुख है कि अमेरिका को अपनी प्रतिबद्धता के तहत देश के खिलाफ सभी प्रतिबंध हटाने होंगे।
ईरान का 14-बिंदु प्रस्ताव
वार्ता में नया मोड़ तब आया जब ईरान ने पाकिस्तान की मध्यस्थता के ज़रिए संशोधित 14-बिंदु प्रस्ताव अमेरिका को सौंपा। इससे पहले ईरान ने अमेरिकी प्रस्ताव के जवाब में एक दस्तावेज़ भेजा था, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सिरे से नकार दिया था।
तस्नीम के अनुसार, नए 14-बिंदु दस्तावेज़ में युद्ध समाप्ति के लिए बातचीत शुरू करने और अमेरिका की ओर से विश्वास बहाली के उपायों पर विशेष ज़ोर दिया गया है।
यूरेनियम संवर्धन पर ईरान का कड़ा रुख
अमेरिका लंबे समय से माँग करता रहा है कि ईरान 20 वर्षों के लिए यूरेनियम संवर्धन गतिविधियाँ बंद करे। इस माँग को ट्रंप प्रशासन की प्रमुख शर्त माना जा रहा है।
इस पर ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने 18 मई को स्पष्ट शब्दों में कहा कि नॉन-प्रोलिफरेशन ट्रीटी (NPT) के तहत तेहरान का यूरेनियम संवर्धन का अधिकार गैर-परक्राम्य है और इसके लिए किसी अन्य पक्ष से मान्यता की कोई आवश्यकता नहीं है।
ईरान की चेतावनी और सैन्य तैयारी
बाघेई ने यह भी कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत जारी है, लेकिन ईरान प्रक्रिया के हर चरण में अपने सिद्धांतों पर दृढ़ता से कायम रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान किसी भी स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार है और किसी भी लापरवाही भरी कार्रवाई के खिलाफ ईरानी सशस्त्र बलों के पास 'सरप्राइज़' होंगे।
बाघेई ने कहा कि वाशिंगटन आर्थिक दबाव को एक औज़ार की तरह इस्तेमाल करता है, लेकिन धमकियाँ और दबाव ईरान को अपने नागरिकों के अधिकारों के लिए संघर्ष करने से नहीं रोक सकते।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच परमाणु समझौते की संभावना को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़रें टिकी हैं। पाकिस्तान की मध्यस्थक भूमिका इस वार्ता में एक नया कूटनीतिक आयाम जोड़ती है। गौरतलब है कि अंतिम समझौते की रूपरेखा अभी भी अनिश्चित बनी हुई है, और दोनों पक्षों के बीच प्रतिबंधों की प्रकृति तथा यूरेनियम संवर्धन पर गहरे मतभेद बरकरार हैं।