यूएस-ईरान परमाणु वार्ता में रूस की मध्यस्थता की पेशकश, उप विदेश मंत्री रॉबकॉफ बोले — 'थोपेंगे नहीं, पर मदद को तैयार'
सारांश
मुख्य बातें
रूसी उप विदेश मंत्री सर्गेई रॉबकॉफ ने 20 मई को स्पष्ट किया कि मास्को, अमेरिका और ईरान के बीच जारी परमाणु वार्ता में यदि आवश्यक हो तो सक्रिय भूमिका निभाने को तैयार है, लेकिन वह किसी पर अपना दृष्टिकोण थोपने का इरादा नहीं रखता। यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में तनाव के बीच कूटनीतिक प्रयास तेज़ हो रहे हैं।
रूस का रुख: मदद हाँ, दबाव नहीं
रॉबकॉफ ने एक साक्षात्कार में कहा, 'रूस इस संघर्ष के समाधान में हर संभव मदद देने के लिए तैयार है, जो इसकी पार्टियों के लिए अच्छी तरह जाना-पहचाना है। साथ ही, हमने कभी अपनी सोच जबरन नहीं थोपी और आगे भी थोपने का कोई इरादा नहीं है। लेकिन यदि उपयुक्त अनुरोध किया जाता है, तो हम मदद का हाथ बढ़ाएंगे।'
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि मास्को हमेशा से 'राजनीतिक और कूटनीतिक चैनलों के माध्यम से ही समाधान खोजने के लिए प्रतिबद्ध' रहा है। उनके अनुसार, किसी भी सैन्य या दबाव-आधारित उपाय से स्थायी शांति स्थापित नहीं की जा सकती।
अमेरिका-ईरान वार्ता को रूस का स्वागत
रॉबकॉफ ने अमेरिका और ईरान की ओर से वार्ता प्रक्रिया फिर से शुरू करने के प्रयासों का स्वागत किया। यह उल्लेखनीय है कि रूस पहले भी 2015 के ऐतिहासिक परमाणु समझौते — जिसे JCPOA के नाम से जाना जाता है — में एक प्रमुख हस्ताक्षरकर्ता रहा है, और वह इस प्रक्रिया की पृष्ठभूमि से भलीभाँति परिचित है।
बीजिंग में पुतिन-शी की साझा चिंता
यह बयान उस समय आया जब बीजिंग में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने संयुक्त रूप से मध्य पूर्व संकट को वैश्विक शांति के लिए गंभीर खतरा बताया। शी जिनपिंग ने चेतावनी दी, 'अगर लड़ाई नहीं रुकी तो अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और वैश्विक स्थिरता पर बड़ा असर पड़ेगा।'
शी ने यह भी कहा कि एकतरफा सैन्य कार्रवाई और लंबे समय तक चलने वाला युद्ध दुनिया को ऐसे दौर में ले जा सकता है जहाँ अंतरराष्ट्रीय नियम कमज़ोर पड़ जाएँ। गौरतलब है कि रूस और चीन दोनों ही पश्चिमी नेतृत्व वाली एकध्रुवीय व्यवस्था के विकल्प के रूप में बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की वकालत करते रहे हैं।
बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की माँग
शी जिनपिंग ने कहा, 'हम विश्व शासन की एक नई, अधिक तर्कसंगत और निष्पक्ष प्रणाली बनाने, दुनिया को समृद्धि की ओर ले जाने के लिए कंधे से कंधा मिलाकर काम करने के लिए तैयार हैं। दुनिया में बहुध्रुवीय व्यवस्था होनी चाहिए और अंतरराष्ट्रीय रिश्तों के नए तरीके अपनाए जाने चाहिए।'
यह बयान ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब रूस-चीन की रणनीतिक साझेदारी पश्चिमी देशों के साथ बढ़ते तनाव की पृष्ठभूमि में और गहरी होती दिख रही है।
आगे क्या होगा
कूटनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, रूस की यह 'सशर्त मध्यस्थता' की पेशकश अमेरिका-ईरान वार्ता में एक नया आयाम जोड़ सकती है। हालाँकि, वाशिंगटन और तेहरान के बीच सीधी बातचीत की गति और उसके परिणाम पर अभी अनिश्चितता बनी हुई है। आने वाले हफ्तों में यह स्पष्ट होगा कि मास्को की भूमिका औपचारिक मध्यस्थ की होगी या केवल पर्यवेक्षक की।