हिज्बुल्लाह सीजफायर को कर रहा कमजोर: मार्को रुबियो का इजरायल-लेबनान तनाव पर बड़ा बयान
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने 1 जून 2026 को स्पष्ट आरोप लगाया कि हिज्बुल्लाह, इजरायल और लेबनान के बीच युद्धविराम की कूटनीतिक कोशिशों को जानबूझकर पटरी से उतार रहा है। अमेरिका का कहना है कि उसने तनाव घटाने के लिए एक स्पष्ट प्रस्ताव रखा था, लेकिन हिज्बुल्लाह ने हमले रोकने से साफ इनकार कर दिया।
अमेरिका का प्रस्ताव क्या था
एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, वॉशिंगटन ने दो-चरणीय योजना पेश की थी। पहले चरण में हिज्बुल्लाह को इजरायल पर सभी हमले तत्काल बंद करने थे। इसके बदले में इजरायल बेरूत में किसी भी नई सैन्य कार्रवाई से परहेज करता। अधिकारी ने कहा, 'यह सबसे सीधा रास्ता था — लड़ाई रोकने और आम नागरिकों की जान बचाने का।'
रुबियो ने इस सिलसिले में लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू दोनों से अलग-अलग बातचीत की। राष्ट्रपति आउन इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के इच्छुक थे और सभी पक्षों के बीच सहमति बनाने की कोशिश कर रहे थे।
नबीह बेरी का 'टालमटोल' वाला जवाब
अमेरिकी प्रयास तब रुक गए जब लेबनान के संसद अध्यक्ष नबीह बेरी — जो हिज्बुल्लाह के करीबी सहयोगी माने जाते हैं — ने अमेरिकी प्रस्ताव पर अपना रुख स्पष्ट किया। अधिकारी ने कहा, 'बेरी का जवाब टालमटोल वाला और निराशाजनक था।'
बेरी ने कहा कि वे हिज्बुल्लाह की ओर से सीजफायर का 'भरोसा' दिला सकते हैं, लेकिन शर्त यह रखी कि पहले इजरायल को गोलीबारी बंद करनी होगी। अमेरिकी अधिकारी ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई: 'बेरी ने जिम्मेदारी इजरायल पर डाल दी, जबकि इस दौर की लड़ाई 2 मार्च को हिज्बुल्लाह ने खुद शुरू की थी।'
ईरान पर अमेरिका का सीधा आरोप
अमेरिका ने इस संघर्ष को लंबा खींचने के लिए ईरान को भी सीधे जिम्मेदार ठहराया। अधिकारी ने कहा, 'ईरान हिज्बुल्लाह को निर्देश दे रहा है। उसे लेबनान के लोगों की भलाई में कोई रुचि नहीं है। ईरान चाहता है कि यह संघर्ष लंबा चले, ताकि वह बाद में 'स्थिति संभालने' का श्रेय ले सके।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-ईरान के बीच परमाणु वार्ता भी जटिल दौर में है।
अमेरिका की इजरायल को दो-टूक
वॉशिंगटन ने स्पष्ट किया कि वह इजरायल से यह उम्मीद नहीं करता कि वह किसी आतंकवादी संगठन के लगातार हमले चुपचाप सहता रहे। अधिकारी के शब्दों में, 'तनाव घटाने और नागरिकों की सुरक्षा का सबसे तेज रास्ता एक ही है — हिज्बुल्लाह तुरंत गोलीबारी बंद करे।'
आगे क्या
इजरायल-हिज्बुल्लाह सीमा पर संघर्ष जारी है और कूटनीतिक प्रयास फिलहाल ठप हैं। अमेरिका की प्राथमिकता यह है कि यह लड़ाई पूरे पश्चिम एशिया में न फैले। गौरतलब है कि यह क्षेत्र पहले से ही गाजा संघर्ष के कारण अत्यंत संवेदनशील बना हुआ है। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि क्या लेबनान की सरकार हिज्बुल्लाह पर दबाव बनाने में सफल होती है या कूटनीतिक गतिरोध और लंबा खिंचता है।