हिज्बुल्लाह ने माना अमेरिकी प्रस्ताव: इजरायल के साथ आपसी हमले रोकने पर सहमति, ट्रंप ने नेतन्याहू से ली मंजूरी
सारांश
मुख्य बातें
लेबनान के राष्ट्रपति कार्यालय ने सोमवार, 2 जून 2026 को पुष्टि की कि हिज्बुल्लाह ने अमेरिका के उस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है, जिसमें इजरायल के साथ 'आपसी हमले रोकने' की शर्त रखी गई है। यह जानकारी बेरूत स्थित लेबनानी राष्ट्रपति कार्यालय के आधिकारिक बयान में दी गई, जिसमें वाशिंगटन में लेबनान के दूतावास का हवाला दिया गया।
कैसे आगे बढ़ी बातचीत
बयान के अनुसार, यह घटनाक्रम उस टेलीफोनिक बातचीत के बाद सामने आया जो लेबनानी राष्ट्रपति जोसेफ आउन और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच हुई। इस बातचीत में लेबनान की मौजूदा स्थिति और तनाव घटाने के उपायों पर विचार-विमर्श किया गया।
इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में लेबनानी राजदूत नाडा हमदेह मौवाड को सूचित किया कि उन्होंने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से इस प्रस्ताव पर सहमति प्राप्त कर ली है। राजदूत मौवाड ने यह जानकारी राष्ट्रपति आउन को दी, जिन्होंने आगे इसे हिज्बुल्लाह तक पहुँचाया।
प्रस्ताव में क्या है
दूतावास के बयान के अनुसार, अमेरिकी प्रस्ताव के तहत दोनों पक्ष एक-दूसरे पर हमले रोकेंगे। प्रारंभिक चरण में बेरूत के दक्षिणी इलाकों पर इजरायल के हवाई हमले बंद होंगे और बदले में हिज्बुल्लाह इजरायल पर अपने हमले थामेगा। बाद में इस समझौते को पूरे लेबनान तक विस्तारित करने की योजना है। बयान के अनुसार, मंगलवार और बुधवार को होने वाली बातचीत में इस समझौते को आगे बढ़ाने पर चर्चा होगी।
ज़मीनी हालात और इजरायली कार्रवाई
इसी दिन इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू और रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने कहा कि उन्होंने बेरूत के दहिये इलाके पर हमले के आदेश दिए हैं। यह इलाका हिज्बुल्लाह का गढ़ माना जाता है। यह कदम हिज्बुल्लाह की ओर से इजरायली सैन्य ठिकानों पर बढ़ते रॉकेट और ड्रोन हमलों के जवाब में उठाया गया।
इजरायल डिफेंस फोर्स (IDF) ने बताया कि हिज्बुल्लाह की ओर से एक साथ दागे गए दो विस्फोटक ड्रोन हमलों में एक इजरायली सैन्य डॉक्टर की मौत हो गई और सात सैनिक घायल हुए।
ईरान का रुख
यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब ईरान की अर्ध-सरकारी तस्नीम समाचार एजेंसी ने सोमवार को रिपोर्ट किया कि ईरान ने लेबनान में इजरायल की सैन्य कार्रवाई के विरोध में अमेरिका के साथ मध्यस्थों के जरिए होने वाली बातचीत रोक दी है। गौरतलब है कि ईरान हिज्बुल्लाह का प्रमुख समर्थक माना जाता है, इसलिए उसका यह कदम संघर्षविराम प्रक्रिया की जटिलता को और बढ़ाता है।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में तनाव अपने उच्चतम स्तर पर है और कूटनीतिक प्रयास एक साथ कई मोर्चों पर चल रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, प्रस्ताव की स्वीकृति और ज़मीनी हमलों के बीच की खाई इस बात का संकेत है कि औपचारिक संघर्षविराम अभी भी नाज़ुक दौर में है। आने वाले दो दिनों की वार्ता के नतीजे इस दिशा में निर्णायक साबित हो सकते हैं।