उत्तराखंड चुनाव 2027: बागेश्वर की दोनों सीटों पर भाजपा का दबदबा, कांग्रेस उपचुनाव में भी पिछड़ी
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच बागेश्वर जिले की दोनों सीटें — कपकोट और बागेश्वर (सुरक्षित) — एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इन दोनों सीटों पर जीत दर्ज की थी, और 2023 के उपचुनाव में भी भाजपा ने अपना किला बरकरार रखा। हालाँकि, उपचुनाव में जीत का अंतर तेजी से सिकुड़ने से कांग्रेस को आगामी चुनाव में उम्मीद की एक किरण दिख रही है।
कपकोट सीट: भाजपा का ऐतिहासिक वर्चस्व
कपकोट विधानसभा सीट पर राज्य गठन के बाद अब तक हुए छह चुनावों में से पाँच बार भाजपा ने जीत हासिल की है, जबकि एक बार कांग्रेस को सफलता मिली है। 2022 के चुनाव में भाजपा के सुरेश सिंह गड़िया ने कांग्रेस के ललित मोहन सिंह फर्सवान को 4,046 वोटों के अंतर से हराया। गड़िया को 31,275 वोट मिले, जबकि फर्सवान को 27,229 वोट। तीसरे स्थान पर आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रत्याशी भूपेश उपाध्याय को 3,529 वोट प्राप्त हुए।
यह सीट पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोशियारी का गृह क्षेत्र होने के कारण राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल मानी जाती है। स्थानीय जानकारों के अनुसार यहाँ 'कांडा फैक्टर' और स्थानीय नेताओं की भीतरघात अथवा लामबंदी चुनावी परिणामों को निर्णायक रूप से प्रभावित करती है। गौरतलब है कि इस सीट पर उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) की सक्रियता में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है, जिससे 2027 का मुकाबला और भी दिलचस्प हो सकता है।
बागेश्वर (सुरक्षित): उपचुनाव में घटा जीत का अंतर
बागेश्वर (सुरक्षित) सीट पर 2007 से 2022 तक भाजपा के चंदन राम दास लगातार जीतते रहे। उनके निधन के पश्चात 2023 के उपचुनाव में भाजपा ने उनकी पत्नी पार्वती दास को प्रत्याशी बनाया। पार्वती दास ने कांग्रेस के बसंत कुमार को 2,405 वोटों के अंतर से पराजित किया। उपचुनाव में पार्वती दास को 33,247 वोट और बसंत कुमार को 30,842 वोट मिले।
यह आँकड़ा भाजपा के लिए एक संकेत भी है। 2022 के विधानसभा चुनाव में दोनों दलों के बीच जीत का अंतर लगभग 12,000 वोटों का था, जो 2023 के उपचुनाव में सिमटकर मात्र 2,405 वोटों पर आ गया। इस बदलाव से कांग्रेस इस सीट पर अपनी संभावनाएँ तलाश रही है।
भाजपा की संगठनात्मक ताकत
भाजपा की बागेश्वर (सुरक्षित) सीट पर मजबूती का श्रेय बूथ स्तर के सूक्ष्म प्रबंधन और ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण तथा विकास कार्यों के विस्तार को दिया जाता है। बागेश्वर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान भी यहाँ की राजनीति में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जो परंपरागत रूप से भाजपा के पक्ष में झुकती रही है।
2027 में क्या होगा आगे
जानकारों के अनुसार 2027 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में बागेश्वर की दोनों सीटों पर मुकाबला कड़ा रहने की संभावना है। कपकोट में यूकेडी की बढ़ती सक्रियता त्रिकोणीय लड़ाई का रूप ले सकती है, जबकि बागेश्वर (सुरक्षित) में उपचुनाव के घटे अंतर ने कांग्रेस का उत्साह बढ़ाया है। भाजपा के लिए अपने किले की मज़बूत घेराबंदी बनाए रखना इस बार की सबसे बड़ी चुनौती होगी।