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उत्तराखंड चुनाव 2027: टिहरी गढ़वाल की 6 सीटों पर 2022 में BJP का दबदबा, सिर्फ प्रतापनगर में कांग्रेस जीती

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उत्तराखंड चुनाव 2027: टिहरी गढ़वाल की 6 सीटों पर 2022 में BJP का दबदबा, सिर्फ प्रतापनगर में कांग्रेस जीती

सारांश

2027 के उत्तराखंड चुनाव से पहले टिहरी गढ़वाल की 6 सीटों का 2022 का ट्रैक रिकॉर्ड साफ़ बताता है — BJP का दबदबा, लेकिन नरेंद्रनगर और टिहरी में 1,000 से भी कम वोटों का अंतर पार्टी को चैन नहीं लेने देगा। प्रतापनगर में कांग्रेस की जीत उसका एकमात्र सहारा है।

मुख्य बातें

2022 विधानसभा चुनाव में टिहरी गढ़वाल की 6 में से 5 सीटें BJP ने जीती थीं।
प्रतापनगर एकमात्र सीट रही जहाँ कांग्रेस के विक्रम सिंह नेगी ने 2,341 वोटों से जीत दर्ज की।
टिहरी सीट पर BJP के किशोर उपाध्याय की जीत का अंतर महज 951 वोट रहा — सबसे कम।
नरेंद्रनगर में BJP के सुबोध उनियाल ने 1,798 वोटों के अंतर से जीत हासिल की।
घनसाली (सुरक्षित) सीट पर 15 वर्षों से BJP का अखंड कब्जा बना हुआ है।
धनोल्टी में राज्य गठन के बाद से 5 में से 4 बार BJP ने जीत दर्ज की है।

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच टिहरी गढ़वाल जिले की छह विधानसभा सीटों — घनसाली (सुरक्षित), देवप्रयाग, प्रतापनगर, नरेंद्रनगर, टिहरी और धनोल्टी — का राजनीतिक समीकरण एक बार फिर चर्चा में है। 2022 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इनमें से पाँच सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि एकमात्र प्रतापनगर सीट पर कांग्रेस ने परचम लहराया था। राजनीतिक दलों ने अभी से इन सीटों पर रणनीति बनाना शुरू कर दिया है।

घनसाली (सुरक्षित): BJP का 15 वर्षों से अटूट किला

घनसाली (सुरक्षित) सीट पर 2022 में BJP के शक्ति लाल शाह ने कांग्रेस के धनी लाल शाह को 10,285 वोटों के बड़े अंतर से पराजित किया। शक्ति लाल शाह को 20,949 वोट मिले, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी को 10,664 वोट प्राप्त हुए। गौरतलब है कि इस सीट पर बीते 15 वर्षों से BJP का कब्जा बना हुआ है, जो इसे पार्टी के लिए एक सुरक्षित गढ़ बनाता है।

देवप्रयाग: त्रिकोणीय मुकाबले में BJP की जीत

देवप्रयाग सीट को राज्य की सबसे अप्रत्याशित और राजनीतिक रूप से जागरूक सीटों में गिना जाता है। 2022 में BJP के विनोद कंडारी ने उत्तराखंड क्रांति दल के दिवाकर भट्ट को 2,588 वोटों से हराया। कंडारी को 17,330 वोट मिले, दिवाकर भट्ट को 14,742 वोट, और तीसरे स्थान पर रहे कांग्रेस के मंत्री प्रसाद नैथानी को 13,585 वोट मिले। बीते दो विधानसभा चुनावों में BJP ने यहाँ लगातार जीत हासिल की है।

प्रतापनगर: कांग्रेस ने छीनी एकमात्र सीट

प्रतापनगर इन छह सीटों में एकमात्र ऐसी सीट रही जहाँ 2022 में कांग्रेस ने BJP को शिकस्त दी। कांग्रेस के विक्रम सिंह नेगी ने BJP के विजय सिंह पंवार उर्फ गुड्डू भाई को 2,341 वोटों से हराया। नेगी को 19,131 वोट मिले, जबकि पंवार को 16,790 वोट प्राप्त हुए। यहाँ का मतदाता व्यक्तिगत संघर्ष, स्थानीय पकड़ और सामाजिक समीकरण को तरजीह देता है — सिर्फ पार्टी के सिंबल को नहीं।

नरेंद्रनगर और टिहरी: कड़े मुकाबले में BJP की बाज़ी

नरेंद्रनगर में 2022 में BJP के सुबोध उनियाल ने कांग्रेस के ओम गोपाल को महज 1,798 वोटों के अंतर से हराया। उनियाल को 27,430 और ओम गोपाल को 25,632 वोट मिले — यह फासला बताता है कि 2027 में यह सीट पुनः कड़े मुकाबले की ओर जाएगी। यहाँ ग्रामीण मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

टिहरी सीट पर 2022 में BJP के किशोर उपाध्याय ने उत्तराखंड जन-एकता पार्टी के दिनेश धन्ना को केवल 951 वोटों से हराया। उपाध्याय को 19,802 और धन्ना को 18,851 वोट मिले। तीसरे स्थान पर कांग्रेस के धन सिंह नेगी 6,385 वोट लेकर रहे। यह सीट पार्टी के सिंबल से अधिक उम्मीदवार की व्यक्तिगत छवि और जनता से जुड़ाव पर तय होती है।

धनोल्टी: BJP का परंपरागत गढ़

धनोल्टी में 2022 में BJP के प्रीतम सिंह पंवार ने कांग्रेस के जोत सिंह बिष्ट को 4,684 वोटों से हराया। पंवार को 22,827 और बिष्ट को 18,143 वोट मिले। राज्य गठन के बाद से अब तक हुए पाँच चुनावों में चार बार BJP ने यहाँ जीत दर्ज की है, जबकि 2017 में एक निर्दलीय उम्मीदवार ने बाज़ी मारी थी। यह सीट BJP के लिए परंपरागत रूप से मज़बूत मानी जाती है।

2027 की ओर निगाहें: क्या बदलेगा समीकरण?

टिहरी गढ़वाल की इन सीटों का विश्लेषण बताता है कि नरेंद्रनगर और टिहरी जैसी सीटों पर जीत का अंतर बेहद कम रहा, जिससे ये 2027 में अत्यंत प्रतिस्पर्धी हो सकती हैं। प्रतापनगर में कांग्रेस की जीत उसे आशा की किरण देती है, जबकि BJP देवप्रयाग और घनसाली में अपनी बढ़त बनाए रखने की कोशिश करेगी। दोनों प्रमुख दलों की रणनीति उम्मीदवारों के चयन और स्थानीय मुद्दों पर टिकी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन नरेंद्रनगर में 1,798 और टिहरी में महज 951 वोटों का अंतर यह बताता है कि ज़मीनी पकड़ उतनी मजबूत नहीं जितनी दिखती है। प्रतापनगर में कांग्रेस की जीत केवल एक अपवाद नहीं — यह उस स्थानीय व्यक्तित्व-केंद्रित राजनीति का प्रमाण है जो पहाड़ी सीटों पर पार्टी लाइन को मात दे सकती है। 2027 में असली परीक्षा उम्मीदवार-चयन और स्थानीय मुद्दों पर होगी, न कि केंद्र सरकार की योजनाओं के भरोसे।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2022 में टिहरी गढ़वाल की कितनी सीटें BJP ने जीती थीं?
2022 विधानसभा चुनाव में टिहरी गढ़वाल जिले की 6 में से 5 सीटें BJP ने जीती थीं। केवल प्रतापनगर सीट पर कांग्रेस के विक्रम सिंह नेगी ने जीत दर्ज की।
प्रतापनगर सीट पर 2022 में क्या हुआ था?
प्रतापनगर सीट पर 2022 में कांग्रेस के विक्रम सिंह नेगी ने BJP के विजय सिंह पंवार को 2,341 वोटों से हराया था। नेगी को 19,131 और पंवार को 16,790 वोट मिले थे।
2027 में कौन-सी सीटें सबसे कड़े मुकाबले की हो सकती हैं?
नरेंद्रनगर (1,798 वोटों का अंतर) और टिहरी (951 वोटों का अंतर) 2022 में सबसे कम मार्जिन वाली सीटें रही हैं। 2027 में इन दोनों सीटों पर बेहद करीबी मुकाबला देखने को मिल सकता है।
धनोल्टी सीट का ऐतिहासिक रिकॉर्ड क्या है?
धनोल्टी में राज्य गठन के बाद से हुए पाँच चुनावों में चार बार BJP जीती है। 2017 में एकमात्र बार एक निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत हासिल की थी।
देवप्रयाग सीट की क्या विशेषता है?
देवप्रयाग को राज्य की सबसे अप्रत्याशित और राजनीतिक रूप से जागरूक सीटों में माना जाता है। 2022 में यहाँ त्रिकोणीय मुकाबला रहा, जिसमें BJP के विनोद कंडारी ने उत्तराखंड क्रांति दल के दिवाकर भट्ट को 2,588 वोटों से हराया।
राष्ट्र प्रेस
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