संतकबीरनगर की तीन विधानसभा सीटें 2027: मेंहदावल, खलीलाबाद, धनघटा का चुनावी गणित
सारांश
मुख्य बातें
पूर्वांचल के राजनीतिक रूप से संवेदनशील जिले संतकबीरनगर में तीन विधानसभा क्षेत्र हैं — मेंहदावल, खलीलाबाद और धनघटा (अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित) — जो उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले एक बार फिर राजनीतिक विश्लेषकों की नज़र में हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में इन तीनों सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके सहयोगियों ने कब्ज़ा बनाए रखा, हालाँकि जीत के अंतर बताते हैं कि मुकाबला कहीं भी एकतरफा नहीं था।
मेंहदावल: सबसे करीबी मुकाबला
मेंहदावल विधानसभा सीट 2022 में जिले के सबसे रोमांचक चुनावी संग्राम की गवाह बनी। निषाद पार्टी के उम्मीदवार अनिल कुमार त्रिपाठी ने 90,193 वोट हासिल कर समाजवादी पार्टी (सपा) के जयराम पांडेय को महज 5,223 वोटों के अंतर से हराया। पांडेय को 84,970 वोट मिले, जबकि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के मोहम्मद तबिश खान तीसरे स्थान पर रहे।
गौरतलब है कि 2017 में BJP के राकेश सिंह बघेल ने यहाँ 42,000 से अधिक वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी, जो 2022 की तुलना में कहीं अधिक था। 2012 में यह सीट सपा के खाते में थी। इस सीट पर निषाद, ब्राह्मण, मुस्लिम और पिछड़ा वर्ग के मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
खलीलाबाद: त्रिकोणीय मुकाबले की परंपरा
खलीलाबाद विधानसभा जिले की राजनीतिक दृष्टि से सर्वाधिक चर्चित सीट रही है। 2022 में BJP के अंकुर तिवारी ने 76,086 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। सपा के दिग्विजय नारायण को 63,464 और बसपा के अफ्ताब आलम को 58,368 वोट मिले। जीत का अंतर 12,622 वोट रहा।
2017 में BJP के दिग्विजय नारायण उर्फ जय चौबे ने इस सीट पर जीत हासिल की थी। 2012 में पीस पार्टी के डॉ. मोहम्मद अयूब ने सभी प्रमुख दलों को चौंकाते हुए यह सीट जीती थी। यह ऐसे समय में आया था जब पूर्वांचल में धार्मिक और जातीय समीकरण तेज़ी से बदल रहे थे। ब्राह्मण, मुस्लिम, व्यापारी और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) मतदाताओं का यहाँ निर्णायक प्रभाव है।
धनघटा: आरक्षित सीट पर BJP का दबदबा
धनघटा विधानसभा अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। 2022 में BJP के गणेश चंद्र चौहान ने 83,241 वोट प्राप्त कर जीत दर्ज की, जबकि सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के अलगू प्रसाद को 72,688 वोट मिले। बसपा के संतोष तीसरे स्थान पर रहे। जीत का अंतर 10,553 वोट रहा।
2017 में BJP के श्रीराम चौहान ने भी अलगू प्रसाद को पराजित किया था। 2012 में अलगू प्रसाद ने सपा के टिकट पर विधायक का पद जीता था। अनुसूचित जाति, चौहान, निषाद और अन्य पिछड़ा वर्ग के मत इस सीट का चुनावी भाग्य तय करते हैं।
तीनों सीटों का समग्र विश्लेषण
पिछले तीन विधानसभा चुनावों का विश्लेषण बताता है कि 2017 और 2022 में BJP और उसके सहयोगियों ने तीनों सीटों पर कब्ज़ा बनाए रखा। 2012 में सपा और पीस पार्टी ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया था। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए सभी दल अभी से अपनी रणनीति बनाने में जुटे हैं।
मेंहदावल में 5,223 वोटों का संकरा अंतर यह संकेत देता है कि सपा यहाँ कड़ी टक्कर देने की स्थिति में है। खलीलाबाद में बसपा की उपस्थिति वोटों के विभाजन में अहम भूमिका निभाती रहती है। 2027 में जातीय समीकरण, गठबंधन का स्वरूप और स्थानीय मुद्दे इन तीनों सीटों का परिणाम तय करेंगे।