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उत्तराखंड चुनाव 2027: चंपावत में धामी की 55,025 वोटों की ऐतिहासिक जीत, लोहाघाट में कांग्रेस का कब्जा

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उत्तराखंड चुनाव 2027: चंपावत में धामी की 55,025 वोटों की ऐतिहासिक जीत, लोहाघाट में कांग्रेस का कब्जा

सारांश

चंपावत में 55,025 वोटों की ऐतिहासिक जीत के बाद सीएम धामी का गढ़ और मज़बूत हुआ है, लेकिन लोहाघाट में कांग्रेस ने BJP से सीट छीन ली है। 2027 में दोनों सीटें उत्तराखंड की सबसे रोमांचक जंग बनने की ओर बढ़ रही हैं।

मुख्य बातें

चंपावत उत्तराखंड की सबसे हाई-प्रोफाइल सीट है, जहाँ सीएम पुष्कर सिंह धामी ने 2022 उपचुनाव में 55,025 मतों के अंतर से जीत दर्ज की थी।
धामी को 58,258 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस की निर्मला गहतोड़ी केवल 3,233 वोट पा सकीं।
लोहाघाट में कांग्रेस के खुशाल सिंह अधिकारी ने 2022 में BJP के पूरन सिंह फर्त्याल को 6,038 वोटों से हराकर सीट छीनी थी।
लोहाघाट में हाल ही में कई क्षेत्रीय BJP नेताओं ने कांग्रेस की सदस्यता ली है।
इस सीट पर BJP , कांग्रेस और उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) तीनों सक्रिय रूप से तैयारी कर रहे हैं।

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियाँ देहरादून से लेकर सीमावर्ती चंपावत जिले तक तेज होने लगी हैं। प्रमुख राजनीतिक दल अपनी रणनीति को धार दे रहे हैं और जिले की दोनों सीटों — चंपावत एवं लोहाघाट — पर जीत का समीकरण बनाने में जुट गए हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव के परिणामों के आलोक में इन दोनों सीटों का राजनीतिक मिज़ाज समझना इस बार के चुनावी संघर्ष की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।

चंपावत सीट: सीएम धामी का अभेद्य गढ़

चंपावत विधानसभा सीट इस समय प्रदेश की सबसे हाई-प्रोफाइल सीट मानी जाती है। 2022 के आम विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कैलाश गहतोड़ी ने यहाँ से जीत दर्ज की थी। उसी वर्ष खटीमा सीट से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के पराजित हो जाने के बाद गहतोड़ी ने यह सीट उनके लिए रिक्त कर दी।

इसके बाद हुए उपचुनाव में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस प्रत्याशी निर्मला गहतोड़ी को 55,025 मतों के ऐतिहासिक अंतर से परास्त किया। धामी को 58,258 वोट मिले जबकि कांग्रेस उम्मीदवार निर्मला गहतोड़ी मात्र 3,233 मत ही पा सकीं। यह राज्य के हालिया चुनावी इतिहास में किसी मुख्यमंत्री की सबसे बड़ी जीत के मार्जिन में से एक है।

यह ऐसे समय में आया था जब धामी स्वयं खटीमा से चुनाव हार चुके थे — एक दुर्लभ परिस्थिति जहाँ मुख्यमंत्री अपनी ही सीट से बाहर हो गए और दूसरी सीट पर ऐतिहासिक बहुमत से लौटे।

2027 में चंपावत पर क्या होगा दाँव

BJP धामी के व्यक्तित्व और उनकी सरकार के कार्यकाल को इस सीट पर अपना प्रमुख चुनावी हथियार मानती है। यदि वे 2027 में भी इसी सीट से चुनाव लड़ते हैं तो मुकाबला दिलचस्प होगा। स्थानीय विश्लेषकों के अनुसार यहाँ के मतदाताओं के लिए जातिगत समीकरण, स्थानीय विकास कार्य, कानून-व्यवस्था और किसान मुद्दे निर्णायक भूमिका निभाते हैं। गौरतलब है कि उपचुनाव में मिली अभूतपूर्व जीत के बावजूद BJP के लिए इस बार विपक्ष का प्रत्याशी और स्थानीय नाराज़गी — यदि कोई हो — महत्त्वपूर्ण चर साबित होंगे।

लोहाघाट: कांग्रेस का छिना हुआ किला, BJP की वापसी की कोशिश

लोहाघाट विधानसभा सीट पर 2012 और 2017 में लगातार दो बार जीतने के बाद BJP को 2022 में पराजय का मुँह देखना पड़ा। कांग्रेस के खुशाल सिंह अधिकारी ने BJP उम्मीदवार पूरन सिंह फर्त्याल को 6,038 मतों से शिकस्त दी। अधिकारी को 32,950 वोट मिले जबकि फर्त्याल को 26,912 मत मिले।

यह ऐसे समय में हुआ था जब उत्तराखंड में BJP ने समग्र रूप से बहुमत हासिल किया था — अर्थात् लोहाघाट उन चुनिंदा सीटों में से एक थी जहाँ लहर के बावजूद कांग्रेस ने सेंध लगाई।

लोहाघाट में बदलते राजनीतिक समीकरण

हाल ही में लोहाघाट के कई क्षेत्रीय BJP नेताओं ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की है, जिससे सत्तारूढ़ दल के लिए इस सीट पर चुनौती और गहरी हो गई है। दूसरी ओर BJP संगठनात्मक ढाँचे को मजबूत कर स्थानीय मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। इस सीट पर BJP और कांग्रेस के अलावा उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) की भी सक्रिय तैयारी चल रही है, जो त्रिकोणीय मुकाबले की संभावना बनाती है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि कांग्रेस अपनी 2022 की बढ़त बनाए रखती है या BJP पुनः इस सीट पर कब्जा करती है।

आगे क्या

चंपावत जिले की दोनों सीटें उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 के सबसे चर्चित मुकाबलों में शामिल होने की ओर अग्रसर हैं। एक ओर धामी की प्रतिष्ठा से जुड़ी चंपावत सीट है, तो दूसरी ओर लोहाघाट जहाँ तीन-तरफा लड़ाई का रोमांच बन रहा है। प्रत्याशियों की घोषणा और गठबंधन की संभावनाएँ इन दोनों सीटों का अंतिम राजनीतिक चित्र तय करेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

025 वोटों का अंतर असाधारण है — लेकिन यह उपचुनाव की विशेष परिस्थितियों का भी परिणाम था, जहाँ मुख्यमंत्री के चेहरे पर सहानुभूति का स्पष्ट प्रभाव था। 2027 में आम विधानसभा चुनाव में यह जादू दोहराना उतना सरल नहीं होगा। लोहाघाट से BJP नेताओं का पलायन और UKD की बढ़ती सक्रियता यह संकेत देती है कि पहाड़ी जिलों में स्थानीय असंतोष गहरा है — जिसे दोनों प्रमुख दल पूरी तरह संबोधित नहीं कर पाए हैं। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है वह यह है कि चंपावत जिले में विकास बनाम पहचान की राजनीति का तनाव 2027 के नतीजे को पिछली बार से कहीं अधिक अनिश्चित बना सकता है।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चंपावत उपचुनाव 2022 में सीएम धामी को कितने वोट मिले थे?
सीएम पुष्कर सिंह धामी को चंपावत उपचुनाव 2022 में 58,258 वोट मिले थे और उन्होंने कांग्रेस की निर्मला गहतोड़ी को 55,025 मतों के अंतर से हराया था। निर्मला गहतोड़ी को केवल 3,233 वोट मिले थे।
चंपावत में उपचुनाव की ज़रूरत क्यों पड़ी थी?
2022 के आम विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपनी खटीमा सीट से हार गए थे। तब BJP के कैलाश गहतोड़ी ने उनके लिए चंपावत सीट रिक्त कर दी, जिसके बाद यहाँ उपचुनाव कराया गया।
लोहाघाट सीट पर 2022 में कौन जीता था?
लोहाघाट विधानसभा सीट पर 2022 में कांग्रेस के खुशाल सिंह अधिकारी ने BJP के पूरन सिंह फर्त्याल को 6,038 वोटों के अंतर से हराया था। अधिकारी को 32,950 और फर्त्याल को 26,912 वोट मिले थे।
उत्तराखंड चुनाव 2027 में चंपावत जिले की कौन-सी सीटें हैं?
चंपावत जिले में विधानसभा की दो सीटें हैं — चंपावत और लोहाघाट। चंपावत सीट मुख्यमंत्री धामी के कारण प्रदेश की सबसे हाई-प्रोफाइल सीट बनी हुई है, जबकि लोहाघाट पर फिलहाल कांग्रेस का कब्जा है।
लोहाघाट में 2027 में कौन से दल मुकाबले में हैं?
लोहाघाट में 2027 के लिए BJP, कांग्रेस और उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) तीनों सक्रिय रूप से तैयारी कर रहे हैं। हाल ही में कई स्थानीय BJP नेताओं के कांग्रेस में शामिल होने से यहाँ का राजनीतिक समीकरण और जटिल हो गया है।
राष्ट्र प्रेस
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