यूपी चुनाव 2027: महोबा की दोनों सीटों पर BJP का दबदबा, चंदेल राजाओं की धरती का इतिहास और सियासत
सारांश
मुख्य बातें
बुंदेलखंड के ऐतिहासिक महोबा जिले की दोनों विधानसभा सीटों — महोबा (सीट क्रमांक 230) और चरखारी (सीट क्रमांक 231) — पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का कब्जा है। 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में BJP ने दोनों सीटें भारी मतों के अंतर से जीती थीं, और अब 2027 के चुनाव की तैयारियों के बीच यह जिला एक बार फिर राजनीतिक हलचल का केंद्र बनता दिख रहा है। दोनों सीटें हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती हैं।
महोबा और चरखारी सीट का राजनीतिक परिदृश्य
महोबा विधानसभा सीट एक सामान्य (अनारक्षित) सीट है। यहाँ से BJP के राकेश कुमार गोस्वामी मौजूदा विधायक हैं। 2022 के चुनाव में इस सीट पर 3,16,799 पंजीकृत मतदाता थे और 65.44 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था। गोस्वामी को 94,490 वोट (कुल वोटों का 45.61 प्रतिशत) मिले थे और उन्होंने समाजवादी पार्टी (SP) के मनोज तिवारी को 43,447 वोटों के बड़े अंतर से शिकस्त दी थी।
चरखारी विधानसभा सीट भी सामान्य श्रेणी की सीट है, जिस पर BJP के बृजभूषण राजपूत विधायक के रूप में 18वीं विधानसभा में पार्टी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। 2022 के चुनाव में यहाँ 3,46,471 पंजीकृत मतदाता थे और 64.43 प्रतिशत मतदान हुआ था। राजपूत ने 1,02,051 वोट (45.75 प्रतिशत) हासिल कर SP के रामजीवन यादव को 41,881 वोटों से पराजित किया था।
महोबा जिले का ऐतिहासिक महत्व
महोबा जिले की स्थापना 11 फरवरी 1995 को हमीरपुर जिले से अलग करके की गई थी। यह चित्रकूट मंडल के अंतर्गत आता है और इसमें महोबा, चरखारी और कुलपहाड़ — तीन तहसीलें हैं। जिले का प्राचीन नाम 'महोत्सव नगर' या महोत्सवपुर था, जिसका शाब्दिक अर्थ है 'उत्सवों का शहर'। इसे केकेईपुर, पाटनपुर और रतनपुर नामों से भी जाना जाता रहा है।
गौरतलब है कि यह क्षेत्र चंदेल राजाओं की सैन्य और सांस्कृतिक राजधानी रहा है। यशोवर्मन, धंगदेव और परमर्दिदेव (परमाल) यहाँ के प्रसिद्ध शासक थे। महोबा की पहचान वीर योद्धा आल्हा और ऊदल की शौर्यगाथाओं से भी है — ये दोनों वीर सेनापति चंदेल राजा परमाल के सामंत थे, जिन्होंने 1182 ईस्वी में पृथ्वीराज चौहान के विरुद्ध महोबा की रक्षा के लिए ऐतिहासिक युद्ध लड़ा था।
धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत
महोबा अपनी ऐतिहासिक झीलों के लिए भी सुप्रसिद्ध है — विजय सागर, मदन सागर और कल्याण सागर यहाँ की पहचान हैं। गोखार पहाड़ी प्रमुख दर्शनीय स्थल है, जहाँ 24 जैन तीर्थंकरों की चट्टान-कट प्रतिमाएं, पवित्र राम-कुंड और सीता-रसोई गुफा स्थित हैं। 9वीं शताब्दी का ग्रेनाइट सूर्य मंदिर प्रतिहार वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना है। चंद्रिका देवी मंदिर और रहिल्ला सागर सूर्य मंदिर भी पर्यटकों के प्रमुख आकर्षण हैं।
सांस्कृतिक दृष्टि से महोबा का सबसे प्रसिद्ध मेला 'कजली मेला' है, जो आल्हा-ऊदल की गाथाओं और स्थानीय परंपराओं से जुड़ा है। यहाँ का 'देशावरी पान' अपनी विशिष्ट खुशबू और स्वाद के लिए पूरे भारत में जाना जाता है।
परिवहन और भौगोलिक स्थिति
परिवहन की दृष्टि से महोबा राष्ट्रीय राजमार्ग NH-34 से जुड़ा है और रेलमार्ग द्वारा दिल्ली, ग्वालियर और मुंबई से सीधे संपर्क में है। निकटतम हवाई अड्डा खजुराहो है, जो लगभग 65 किमी की दूरी पर स्थित है।
2027 की संभावनाएं
यह ऐसे समय में अहम है जब उत्तर प्रदेश के 403 विधानसभा क्षेत्रों में 2027 के चुनाव की तैयारी शुरू हो चुकी है। महोबा और चरखारी दोनों सीटों पर BJP की पकड़ मजबूत है, लेकिन समाजवादी पार्टी ने पिछले चुनावों में इन सीटों पर कड़ी टक्कर दी थी। आने वाले महीनों में यह जिला एक बार फिर बुंदेलखंड की राजनीतिक धड़कन बन सकता है।