3 नवंबर 2026
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यूपी चुनाव 2027: महोबा की दोनों सीटों पर BJP का दबदबा, चंदेल राजाओं की धरती का इतिहास और सियासत

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यूपी चुनाव 2027: महोबा की दोनों सीटों पर BJP का दबदबा, चंदेल राजाओं की धरती का इतिहास और सियासत

सारांश

चंदेल राजाओं और आल्हा-ऊदल की वीरगाथाओं से जुड़ा महोबा जिला 2027 के चुनाव से पहले फिर सुर्खियों में है। दोनों सीटों पर BJP की मजबूत पकड़, लेकिन SP की चुनौती भी बरकरार — बुंदेलखंड की इस ऐतिहासिक धरती पर अगली जंग की तैयारी शुरू।

मुख्य बातें

महोबा और चरखारी — जिले की दोनों विधानसभा सीटें हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती हैं और फिलहाल BJP के पास हैं।
2022 में BJP के राकेश कुमार गोस्वामी ने महोबा सीट पर 94,490 वोट से SP के मनोज तिवारी को 43,447 वोटों के अंतर से हराया।
चरखारी में BJP के बृजभूषण राजपूत ने 1,02,051 वोट हासिल कर SP के रामजीवन यादव को 41,881 वोटों से पराजित किया।
महोबा जिले की स्थापना 11 फरवरी 1995 को हमीरपुर जिले से अलग होकर हुई; यह चित्रकूट मंडल के अंतर्गत है।
महोबा चंदेल राजाओं की ऐतिहासिक राजधानी और वीर आल्हा-ऊदल की कर्मभूमि रहा है।
निकटतम हवाई अड्डा खजुराहो लगभग 65 किमी दूर; जिला NH-34 से जुड़ा है।

बुंदेलखंड के ऐतिहासिक महोबा जिले की दोनों विधानसभा सीटों — महोबा (सीट क्रमांक 230) और चरखारी (सीट क्रमांक 231) — पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का कब्जा है। 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में BJP ने दोनों सीटें भारी मतों के अंतर से जीती थीं, और अब 2027 के चुनाव की तैयारियों के बीच यह जिला एक बार फिर राजनीतिक हलचल का केंद्र बनता दिख रहा है। दोनों सीटें हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती हैं।

महोबा और चरखारी सीट का राजनीतिक परिदृश्य

महोबा विधानसभा सीट एक सामान्य (अनारक्षित) सीट है। यहाँ से BJP के राकेश कुमार गोस्वामी मौजूदा विधायक हैं। 2022 के चुनाव में इस सीट पर 3,16,799 पंजीकृत मतदाता थे और 65.44 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था। गोस्वामी को 94,490 वोट (कुल वोटों का 45.61 प्रतिशत) मिले थे और उन्होंने समाजवादी पार्टी (SP) के मनोज तिवारी को 43,447 वोटों के बड़े अंतर से शिकस्त दी थी।

चरखारी विधानसभा सीट भी सामान्य श्रेणी की सीट है, जिस पर BJP के बृजभूषण राजपूत विधायक के रूप में 18वीं विधानसभा में पार्टी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। 2022 के चुनाव में यहाँ 3,46,471 पंजीकृत मतदाता थे और 64.43 प्रतिशत मतदान हुआ था। राजपूत ने 1,02,051 वोट (45.75 प्रतिशत) हासिल कर SP के रामजीवन यादव को 41,881 वोटों से पराजित किया था।

महोबा जिले का ऐतिहासिक महत्व

महोबा जिले की स्थापना 11 फरवरी 1995 को हमीरपुर जिले से अलग करके की गई थी। यह चित्रकूट मंडल के अंतर्गत आता है और इसमें महोबा, चरखारी और कुलपहाड़ — तीन तहसीलें हैं। जिले का प्राचीन नाम 'महोत्सव नगर' या महोत्सवपुर था, जिसका शाब्दिक अर्थ है 'उत्सवों का शहर'। इसे केकेईपुर, पाटनपुर और रतनपुर नामों से भी जाना जाता रहा है।

गौरतलब है कि यह क्षेत्र चंदेल राजाओं की सैन्य और सांस्कृतिक राजधानी रहा है। यशोवर्मन, धंगदेव और परमर्दिदेव (परमाल) यहाँ के प्रसिद्ध शासक थे। महोबा की पहचान वीर योद्धा आल्हा और ऊदल की शौर्यगाथाओं से भी है — ये दोनों वीर सेनापति चंदेल राजा परमाल के सामंत थे, जिन्होंने 1182 ईस्वी में पृथ्वीराज चौहान के विरुद्ध महोबा की रक्षा के लिए ऐतिहासिक युद्ध लड़ा था।

धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत

महोबा अपनी ऐतिहासिक झीलों के लिए भी सुप्रसिद्ध है — विजय सागर, मदन सागर और कल्याण सागर यहाँ की पहचान हैं। गोखार पहाड़ी प्रमुख दर्शनीय स्थल है, जहाँ 24 जैन तीर्थंकरों की चट्टान-कट प्रतिमाएं, पवित्र राम-कुंड और सीता-रसोई गुफा स्थित हैं। 9वीं शताब्दी का ग्रेनाइट सूर्य मंदिर प्रतिहार वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना है। चंद्रिका देवी मंदिर और रहिल्ला सागर सूर्य मंदिर भी पर्यटकों के प्रमुख आकर्षण हैं।

सांस्कृतिक दृष्टि से महोबा का सबसे प्रसिद्ध मेला 'कजली मेला' है, जो आल्हा-ऊदल की गाथाओं और स्थानीय परंपराओं से जुड़ा है। यहाँ का 'देशावरी पान' अपनी विशिष्ट खुशबू और स्वाद के लिए पूरे भारत में जाना जाता है।

परिवहन और भौगोलिक स्थिति

परिवहन की दृष्टि से महोबा राष्ट्रीय राजमार्ग NH-34 से जुड़ा है और रेलमार्ग द्वारा दिल्ली, ग्वालियर और मुंबई से सीधे संपर्क में है। निकटतम हवाई अड्डा खजुराहो है, जो लगभग 65 किमी की दूरी पर स्थित है।

2027 की संभावनाएं

यह ऐसे समय में अहम है जब उत्तर प्रदेश के 403 विधानसभा क्षेत्रों में 2027 के चुनाव की तैयारी शुरू हो चुकी है। महोबा और चरखारी दोनों सीटों पर BJP की पकड़ मजबूत है, लेकिन समाजवादी पार्टी ने पिछले चुनावों में इन सीटों पर कड़ी टक्कर दी थी। आने वाले महीनों में यह जिला एक बार फिर बुंदेलखंड की राजनीतिक धड़कन बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 40,000 से अधिक के जीत के अंतर को केवल BJP की ताकत मानना जल्दबाजी होगी — 2022 में SP ने भी बुंदेलखंड में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी। असली सवाल यह है कि 2027 तक जिले में विकास, पानी और रोज़गार जैसे बुंदेलखंड के पुराने मुद्दे कहाँ खड़े होंगे। चंदेल राजाओं की इस धरती पर इतिहास और पहचान का भावनात्मक कार्ड हमेशा चुनावी नतीजों को प्रभावित करता रहा है — आगामी चुनाव में देखना होगा कि BJP विकास के वादों और विपक्ष जातीय समीकरणों में से कौन भारी पड़ता है।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महोबा जिले में कितनी विधानसभा सीटें हैं और इन पर किसका कब्जा है?
महोबा जिले में कुल 2 विधानसभा सीटें हैं — महोबा (सीट क्रमांक 230) और चरखारी (सीट क्रमांक 231)। दोनों ही सीटें फिलहाल भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पास हैं और हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती हैं।
2022 में महोबा और चरखारी सीट पर कौन जीता था?
2022 के विधानसभा चुनाव में महोबा सीट से BJP के राकेश कुमार गोस्वामी ने 94,490 वोट हासिल कर SP के मनोज तिवारी को 43,447 वोटों के अंतर से हराया था। चरखारी में BJP के बृजभूषण राजपूत ने 1,02,051 वोट लेकर SP के रामजीवन यादव को 41,881 वोटों से पराजित किया था।
महोबा जिले का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
महोबा चंदेल राजाओं की सैन्य और सांस्कृतिक राजधानी रही है। यहाँ वीर आल्हा और ऊदल ने 1182 ईस्वी में पृथ्वीराज चौहान के विरुद्ध ऐतिहासिक युद्ध लड़ा था। जिले का प्राचीन नाम 'महोत्सव नगर' था और इसकी स्थापना 11 फरवरी 1995 को हमीरपुर जिले से अलग होकर हुई।
महोबा में 2027 चुनाव के मद्देनजर कौन-सी पार्टियाँ प्रमुख दावेदार हैं?
2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) मौजूदा विधायकों के साथ मजबूत स्थिति में है। समाजवादी पार्टी (SP) ने 2022 में दोनों सीटों पर कड़ी चुनौती दी थी और वह प्रमुख विपक्षी दावेदार बनी हुई है।
महोबा के प्रमुख पर्यटन स्थल और सांस्कृतिक विशेषताएं क्या हैं?
महोबा में विजय सागर, मदन सागर और कल्याण सागर जैसी ऐतिहासिक झीलें हैं। गोखार पहाड़ी पर 24 जैन तीर्थंकरों की चट्टान-कट प्रतिमाएं और 9वीं शताब्दी का ग्रेनाइट सूर्य मंदिर प्रमुख आकर्षण हैं। 'कजली मेला' यहाँ का सबसे प्रसिद्ध सांस्कृतिक उत्सव है और 'देशावरी पान' पूरे भारत में मशहूर है।
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