ओमान तट के पास 'एमएसवी अल जुसुफी' पर हमला: एक भारतीय नाविक की मौत, विदेश मंत्रालय ने की कड़ी निंदा
सारांश
मुख्य बातें
भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने 4 नवंबर 2026 को एक कड़े बयान में ओमान के समुद्री क्षेत्र में कमर्शियल जहाज 'एमएसवी अल जुसुफी' पर हुए घातक हमले की निंदा की, जिसमें 14 भारतीय नाविकों में से एक की मृत्यु हो गई और शेष 13 को सुरक्षित बचा लिया गया। यह हमला 2 नवंबर 2026 को ओमान के लिमाह तट के निकट एक अज्ञात हवाई वस्तु (एरियल ऑब्जेक्ट) द्वारा किया गया, जिसके बाद ओमानी तटरक्षक बल ने बचाव अभियान चलाया।
हमले का विवरण और बचाव अभियान
2 नवंबर की शाम को ओमान के समुद्री क्षेत्र में भारतीय ध्वजवाहक जहाज 'एमएसवी अल जुसुफी' पर एक अज्ञात एरियल ऑब्जेक्ट से हमला किया गया। जहाज पर कुल 14 भारतीय नाविक सवार थे। हमले के तुरंत बाद ओमानी तटरक्षक बल ने सभी नाविकों को बचाया, परंतु हमले में गंभीर रूप से घायल एक नाविक ने बाद में दम तोड़ दिया। शेष 13 नाविक सुरक्षित हैं।
यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब अरब सागर और लाल सागर के क्षेत्र में व्यावसायिक जहाजरानी पर हमलों की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं। गौरतलब है कि भारत इस क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर पहले से सतर्क रहा है।
विदेश मंत्रालय का बयान
भारत के विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, "हम सोमवार शाम लिमाह (ओमान) के पास एक व्यावसायिक जहाज, 'एमएसवी अल जुसुफी' पर हुए हमले की निंदा करते हैं। जहाज पर सवार 14 भारतीय नागरिकों में से 13 को बचा लिया गया है, जबकि एक घायल भारतीय नागरिक की मृत्यु हो गई है। हम इस नुकसान पर अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं।"
मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि ओमान स्थित भारतीय दूतावास स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रहा है और बचाए गए नाविकों तथा मृतक के पार्थिव शरीर को यथाशीघ्र स्वदेश लाने के लिए ओमानी अधिकारियों के साथ समन्वय किया जा रहा है।
भारत की नीतिगत स्थिति
भारत ने व्यावसायिक जहाजों और समुद्री बुनियादी ढाँचे को निशाना बनाने की बढ़ती प्रवृत्ति को 'चिंताजनक' करार दिया है। विदेश मंत्रालय ने अपील की कि "तनाव को तुरंत कम करने और कूटनीतिक समाधान के लिए प्रयास किए जाएँ, ताकि इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता वापस आ सके।" साथ ही अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुरूप समुद्री मार्गों से जहाजों की निर्बाध आवाजाही और व्यापार बहाली पर भी ज़ोर दिया गया।
यह भारत की उस दीर्घकालिक नीतिगत स्थिति के अनुरूप है जिसमें वह अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में वाणिज्यिक पोतों पर किसी भी हमले का विरोध करता है — चाहे वह किसी भी पक्ष द्वारा क्यों न हो।
वेस्ट एशिया संघर्ष में भारतीय जनहानि
यह घटना तब सामने आई है जब भारत सरकार ने पिछले सप्ताह पुष्टि की थी कि वेस्ट एशिया संघर्ष में अब तक 22 भारतीय नागरिक मारे जा चुके हैं। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 28 अक्टूबर को पाक्षिक प्रेस वार्ता में कहा था, "हम वेस्ट एशिया में चल रहे झगड़े को लेकर बहुत परेशान हैं। हमने इस झगड़े में 22 भारतीय नागरिकों को खो दिया है, जिसमें 14 नाविक शामिल हैं।"
'एमएसवी अल जुसुफी' पर हमले में मारे गए नाविक इसी आँकड़े का हिस्सा हैं, जो दर्शाता है कि वेस्ट एशिया की अस्थिरता का असर अब सीधे तौर पर भारतीय समुद्री कर्मियों पर पड़ रहा है।
आगे की स्थिति
भारतीय दूतावास, मस्कट, बचाए गए नाविकों की वतन वापसी और मृतक के पार्थिव शरीर को स्वदेश लाने की प्रक्रिया में जुटा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस हमले के मद्देनज़र भारत समुद्री सुरक्षा पर अपने क्षेत्रीय साझेदारों के साथ और गहरा समन्वय कर सकता है। अरब सागर क्षेत्र में व्यावसायिक पोतों की सुरक्षा अब एक राष्ट्रीय प्राथमिकता बनती जा रही है।