यूपी चुनाव 2027: झांसी की चारों विधानसभा सीटों पर 2022 में एनडीए का दबदबा, बुंदेलखंड की राजनीति में खास अहमियत
सारांश
मुख्य बातें
बुंदेलखंड का प्रवेशद्वार कहे जाने वाले झांसी जिले की राजनीतिक भूमिका उत्तर प्रदेश की चुनावी रणनीति में हमेशा से अहम रही है। 2022 के विधानसभा चुनावों में झांसी की चारों सीटों पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने जीत हासिल की थी — तीन सीटें भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खाते में गईं और एक सीट सहयोगी दल अपना दल (सोनेलाल) को मिली। 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले यह जिला एक बार फिर सियासी चर्चा के केंद्र में है।
झांसी जिले की चार विधानसभा सीटें
उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में से झांसी जिले में चार सीटें आती हैं। बबीना (222वीं सीट) एक सामान्य यानी अनारक्षित सीट है, जहाँ 2022 में करीब 3,31,743 पंजीकृत मतदाता थे। यहाँ से BJP के राजीव सिंह 'परिच्छा' विधायक हैं।
झांसी नगर (223वीं सीट) जिले की सबसे चर्चित सीट मानी जाती है। यहाँ 2022 में करीब 4,22,164 मतदाता पंजीकृत थे — जो चारों सीटों में सर्वाधिक है। इस सीट से BJP के रवि शर्मा विधायक हैं।
मऊरानीपुर (224वीं सीट) झांसी जिले की एकमात्र आरक्षित सीट है, जो अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। यहाँ 2022 में करीब 4,13,770 पंजीकृत मतदाता थे। इस सीट से अपना दल (सोनेलाल) की डॉ. रश्मि आर्या विधायक हैं।
गरौठा (225वीं सीट) भी एक सामान्य सीट है। यहाँ 2022 में लगभग 3,51,859 पंजीकृत मतदाता थे। इस सीट पर BJP के जवाहर लाल राजपूत विधायक हैं।
एनडीए का पूर्ण दबदबा
वर्तमान विधानसभा में झांसी जिले की तीन सीटें BJP के पास हैं और एक सीट अपना दल (सोनेलाल) के पास। इस तरह NDA का जिले में पूरा वर्चस्व है। गौरतलब है कि बुंदेलखंड क्षेत्र में किसी एक दल या गठबंधन का इस तरह का एकतरफा नियंत्रण 2027 के चुनावों में विपक्ष के लिए एक बड़ी चुनौती मानी जा रही है।
भौगोलिक और प्रशासनिक स्थिति
झांसी जिला उत्तर प्रदेश के दक्षिण में स्थित है और झांसी मंडल का प्रशासनिक मुख्यालय भी है। यह जिला उत्तर में जालौन, पूर्व में हमीरपुर और महोबा, दक्षिण में मध्य प्रदेश के टीकमगढ़, दक्षिण-पश्चिम में ललितपुर और उत्तर-पूर्व में मध्य प्रदेश के दतिया जिले से घिरा हुआ है। झांसी शहर पहुंज और बेतवा नदी के बीच 285 मीटर की ऊँचाई पर बसा है। नई दिल्ली से इसकी दूरी करीब 415 किलोमीटर है।
1891 में ललितपुर को झांसी में मिलाया गया था, और 1974 में उसे पुनः अलग जिला बनाया गया। पश्चिम-पूर्व औद्योगिक गलियारा झांसी से गुजरता है, जिसने इस क्षेत्र में विकास को नई गति दी है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
झांसी का इतिहास वीरता से भरा हुआ है। 1817 से 1854 तक इस शहर का नाम बलवंतनगर था और यह मराठा राजाओं की झांसी रियासत की राजधानी हुआ करता था। 1854 में अंग्रेजों ने इस पर कब्जा कर लिया, परंतु रानी लक्ष्मीबाई ने जून 1857 से जून 1858 तक यहाँ शासन किया। यह ऐतिहासिक विरासत आज भी झांसी की पहचान का अभिन्न हिस्सा है।
2027 में क्या होगा आगे
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी अभी से शुरू हो गई है। झांसी में NDA की मजबूत स्थिति को देखते हुए विपक्षी दलों को यहाँ पैठ बनाने के लिए ठोस रणनीति बनानी होगी। बुंदेलखंड की राजनीति में झांसी की भूमिका आने वाले चुनावों में और अधिक निर्णायक साबित हो सकती है।