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उत्तराखंड में अग्निवीरों के लिए देश का पहला रोजगार सेल, शहीद परिवारों को ₹50 लाख तक सहायता

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उत्तराखंड में अग्निवीरों के लिए देश का पहला रोजगार सेल, शहीद परिवारों को ₹50 लाख तक सहायता

सारांश

उत्तराखंड ने अग्निवीरों के लिए देश का पहला समर्पित रोजगार सेल बनाकर सैनिक कल्याण में नई मिसाल कायम की है। शहीद परिवारों की सहायता राशि पाँच गुना बढ़ाई गई, 28 आश्रितों को नौकरी मिली और देहरादून में सैन्य धाम तैयार है — धामी सरकार का यह कदम अन्य राज्यों के लिए एक नई नीतिगत मानक स्थापित करता है।

मुख्य बातें

उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना जिसने अग्निवीरों के लिए समर्पित रोजगार सेल की स्थापना की।
सरकारी नौकरियों में अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण पहले से लागू।
परमवीर चक्र विजेताओं के परिवारों की अनुग्रह राशि ₹1.5 करोड़ से बढ़कर ₹2 करोड़ हुई।
अन्य शहीद परिवारों की सहायता ₹10 लाख से बढ़कर ₹50 लाख — पाँच गुना वृद्धि।
अब तक 28 शहीद आश्रितों को सरकारी सेवा में नियुक्ति; आवेदन समय-सीमा 2 वर्ष से बढ़कर 5 वर्ष ।
देहरादून में सैन्य धाम का निर्माण पूर्ण, उद्घाटन की तैयारियाँ जारी।

उत्तराखंड सरकार ने 27 अगस्त 2026 को सैनिक कल्याण के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए अग्निवीरों के लिए देश का पहला समर्पित 'रोजगार सेल' स्थापित किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस सेल को मंजूरी दी गई, जो सशस्त्र बलों में चार वर्ष की सेवा पूरी कर घर लौटने वाले अग्निवीरों को उपयुक्त रोजगार के अवसर दिलाने में सहायता करेगा। इसके साथ ही राज्य ने शहीद परिवारों की अनुग्रह राशि में भी उल्लेखनीय वृद्धि की है।

अग्निवीर रोजगार सेल: क्या है यह पहल

उत्तराखंड इस विशेष रोजगार सेल की स्थापना करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। यह सेल उन अग्निवीरों की मदद करेगा जो सेना में अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद नागरिक जीवन में लौटते हैं। राज्य सरकार पहले ही सरकारी नौकरियों में अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा कर चुकी है। यह रोजगार सेल उस आरक्षण नीति को ज़मीनी स्तर पर लागू करने की दिशा में एक व्यावहारिक कदम है।

शहीद परिवारों को बढ़ी सहायता राशि

परमवीर चक्र विजेताओं के परिवारों के लिए अनुग्रह राशि ₹1.5 करोड़ से बढ़ाकर ₹2 करोड़ कर दी गई है। अन्य शहीदों के आश्रितों के लिए यह राशि ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹50 लाख कर दी गई है — पाँच गुना की वृद्धि। वीरता पुरस्कार प्राप्त सैनिकों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता में भी इजाफा किया गया है।

शहीदों के सम्मान में अन्य कल्याणकारी कदम

सरकार ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीदों की मूर्तियाँ उनके पैतृक गाँवों में स्थापित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है, जिससे युवा पीढ़ी को प्रेरणा मिले और शहीदों की विरासत अमर रहे। इसके अलावा प्रत्येक शहीद परिवार के एक योग्य सदस्य को सरकारी नौकरी देने की नीति के तहत अब तक 28 आश्रितों को सरकारी सेवा में नियुक्त किया जा चुका है। आवेदन की समय-सीमा दो वर्ष से बढ़ाकर पाँच वर्ष कर दी गई है।

सैन्य धाम और अन्य सुविधाएँ

देहरादून में निर्मित 'सैन्य धाम' का निर्माण पूरा हो चुका है और उद्घाटन की तैयारियाँ जारी हैं। इस स्मारक में उत्तराखंड के शहीद सैनिकों के घरों और आँगन से सम्मानपूर्वक लाई गई मिट्टी रखी गई है और उनकी वीरगाथाएँ प्रदर्शित की गई हैं। सेवारत और सेवानिवृत्त सैन्यकर्मियों को ₹25 लाख तक की संपत्ति खरीद पर 25 प्रतिशत स्टांप ड्यूटी छूट भी दी जा रही है। जिला अदालतों में लंबित भूमि धोखाधड़ी के मामलों में फँसे सैनिक परिवारों की कानूनी सहायता के लिए भी कदम उठाए गए हैं।

मुख्यमंत्री का बयान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, 'हमारी सरकार बहादुर सैनिकों, पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और शहीदों के परिवारों के सम्मान और कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सैन्य धाम उत्तराखंड की समृद्ध सैन्य विरासत का प्रतीक बनेगा।' गौरतलब है कि उत्तराखंड परंपरागत रूप से सशस्त्र बलों में सर्वाधिक योगदान देने वाले राज्यों में से एक रहा है, और इन नीतियों से राज्य की उस पहचान को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। आने वाले दिनों में सैन्य धाम के उद्घाटन और रोजगार सेल के क्रियान्वयन पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी — विशेषकर रोजगार सेल के लिए, जहाँ यह देखना होगा कि निजी क्षेत्र की भागीदारी कितनी सुनिश्चित होती है। शहीद आश्रितों की सहायता राशि में पाँच गुना वृद्धि सराहनीय है, पर यह भी ध्यान देने योग्य है कि 28 नियुक्तियाँ अभी तक एक सीमित संख्या है। अग्निवीर योजना को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर जो बहस चल रही है, उसमें उत्तराखंड का यह कदम एक सकारात्मक राज्य-स्तरीय प्रतिक्रिया है — पर यह केंद्र की नीतिगत अनिश्चितता का विकल्प नहीं बन सकता।
RashtraPress
28 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तराखंड का अग्निवीर रोजगार सेल क्या है?
यह देश का पहला समर्पित सरकारी सेल है जो सशस्त्र बलों में चार वर्ष की सेवा पूरी कर लौटने वाले अग्निवीरों को उपयुक्त नौकरी के अवसर दिलाने में मदद करेगा। धामी कैबिनेट ने इसे हाल ही में मंजूरी दी है।
उत्तराखंड में शहीद परिवारों को कितनी सहायता राशि मिलेगी?
अन्य शहीदों के आश्रितों के लिए सहायता राशि ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹50 लाख कर दी गई है। परमवीर चक्र विजेताओं के परिवारों के लिए यह राशि ₹1.5 करोड़ से बढ़कर ₹2 करोड़ हो गई है।
सैन्य धाम देहरादून क्या है और इसका उद्घाटन कब होगा?
सैन्य धाम देहरादून में उत्तराखंड के शहीद सैनिकों की स्मृति में बनाया गया एक स्मारक है, जिसमें शहीदों के घरों से लाई गई मिट्टी और उनकी वीरगाथाएँ प्रदर्शित हैं। निर्माण पूरा हो चुका है और उद्घाटन की तैयारियाँ जारी हैं।
उत्तराखंड में अग्निवीरों को सरकारी नौकरी में कितना आरक्षण मिलता है?
राज्य सरकार ने सरकारी नौकरियों में अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा पहले ही कर दी थी। नया रोजगार सेल इस आरक्षण नीति को व्यावहारिक रूप से लागू करने में सहायता करेगा।
उत्तराखंड में सैन्यकर्मियों को संपत्ति खरीद पर क्या छूट मिलती है?
सेवारत और सेवानिवृत्त सैन्यकर्मी ₹25 लाख तक की संपत्ति खरीद पर 25 प्रतिशत स्टांप ड्यूटी छूट के पात्र हैं। यह सुविधा राज्य में सैन्य परिवारों को आर्थिक राहत देने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
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