25 अगस्त 2026
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उत्तराखंड में 'अग्निवीर रोजगार सेल' को मंजूरी, देश का पहला राज्य बना; सेवामुक्त जवानों को मिलेगा करियर मार्गदर्शन

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उत्तराखंड में 'अग्निवीर रोजगार सेल' को मंजूरी, देश का पहला राज्य बना; सेवामुक्त जवानों को मिलेगा करियर मार्गदर्शन

सारांश

उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन गया है जिसने सेवामुक्त अग्निवीरों के लिए समर्पित 'रोजगार सेल' बनाया। मुख्यमंत्री धामी की इस पहल से सैन्य अनुभव को करियर में बदलने का रास्ता खुलेगा — और अग्निपथ योजना के पुनर्वास पक्ष पर राष्ट्रीय बहस में उत्तराखंड मॉडल एक नई मिसाल बन सकता है।

मुख्य बातें

उत्तराखंड कैबिनेट ने 25 अगस्त 2026 को 'अग्निवीर रोजगार सेल' की स्थापना को मंजूरी दी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अनुसार उत्तराखंड यह कदम उठाने वाला देश का पहला राज्य है।
सेल सेवामुक्त अग्निवीरों को उनकी योग्यता और सैन्य कौशल के आधार पर सरकारी व निजी क्षेत्र में रोजगार से जोड़ेगा।
कैबिनेट ने अमर बलिदानियों की प्रतिमाएँ उनके पैतृक गाँवों में स्थापित करने का भी निर्णय लिया।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कालाबाजारी और जमाखोरी के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।

उत्तराखंड मंत्रिमंडल ने 25 अगस्त 2026 को देहरादून में हुई कैबिनेट बैठक में 'अग्निवीर रोजगार सेल' की स्थापना को औपचारिक मंजूरी दे दी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अनुसार, उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन गया है जिसने सेवामुक्त होकर लौटने वाले अग्निवीरों के लिए एक समर्पित रोजगार सेल गठित करने का निर्णय लिया है। यह सेल सेवानिवृत्त जवानों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने, करियर मार्गदर्शन देने और निजी व सरकारी क्षेत्र में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का काम करेगा।

अग्निवीर रोजगार सेल की भूमिका और कार्यक्षेत्र

मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि यह सेल सेवामुक्त अग्निवीरों की योग्यता, कौशल और सैन्य अनुभव के आधार पर उन्हें उपयुक्त रोजगार से जोड़ेगा। सेल विभिन्न सरकारी विभागों, स्वायत्त संस्थानों और निजी क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों की जानकारी एकत्रित कर अग्निवीरों तक पहुँचाएगा।

इसके साथ ही सेल उन्हें आत्मनिर्भर भारत और अन्य केंद्र-राज्य योजनाओं का लाभ दिलाने में सहायक कारक के रूप में काम करेगा। धामी ने कहा कि यह पहल उन युवाओं के प्रति 'सम्मान, कृतज्ञता और जिम्मेदारी' की भावना को दर्शाती है जिन्होंने देश सेवा में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

राष्ट्रीय संदर्भ में उत्तराखंड की पहल

गौरतलब है कि अग्निपथ योजना के तहत भर्ती होने वाले जवानों की चार वर्षीय सेवा समाप्त होने के बाद उनके पुनर्वास को लेकर देशभर में बहस जारी है। विपक्षी दलों ने बार-बार माँग की है कि सरकार सेवामुक्त अग्निवीरों के लिए ठोस रोजगार गारंटी सुनिश्चित करे। इस पृष्ठभूमि में उत्तराखंड का यह कदम राज्य-स्तरीय नीतिगत पहल के रूप में उल्लेखनीय है।

यह ऐसे समय में आया है जब कई राज्य अग्निवीरों को पुलिस और अर्धसैनिक भर्तियों में प्राथमिकता देने की घोषणाएँ कर चुके हैं, लेकिन एक समर्पित संस्थागत सेल की स्थापना अब तक किसी राज्य ने नहीं की थी।

शहीदों की प्रतिमाएँ पैतृक गाँवों में स्थापित होंगी

कैबिनेट बैठक में एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय के तहत सरकार ने अमर बलिदानियों की प्रतिमाएँ उनके पैतृक गाँवों में स्थापित करने का फैसला किया। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि शहीदों की वीरगाथाएँ आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा और देशभक्ति के लिए प्रेरित करती रहें, इसी उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पहल शहीदों की स्मृति को सम्मान देने के साथ-साथ उनके परिवारों के प्रति राज्य की कृतज्ञता का प्रतीक भी होगी।

आवश्यक वस्तुओं पर मूल्य नियंत्रण के निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कैबिनेट बैठक के बाद शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को प्रदेश में आवश्यक वस्तुओं के मूल्यों पर प्रभावी नियंत्रण बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आम जनता को उचित दरों पर ज़रूरी सामान मिले, यह सुनिश्चित किया जाए।

धामी ने कालाबाजारी, जमाखोरी और मुनाफाखोरी के ज़रिये कृत्रिम रूप से कीमतें बढ़ाने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश दिए। यह निर्देश ऐसे समय में आया है जब त्योहारी सीजन से पहले खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका है।

आगे क्या होगा

अग्निवीर रोजगार सेल के गठन की प्रक्रिया और उसके परिचालन का विस्तृत ढाँचा शीघ्र जारी होने की उम्मीद है। यदि यह मॉडल सफल रहा, तो अन्य राज्य भी इसे अपनाने पर विचार कर सकते हैं — जिससे अग्निपथ योजना के पुनर्वास पक्ष को लेकर राष्ट्रीय बहस में उत्तराखंड की भूमिका और मजबूत होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी — सेल कितने अग्निवीरों को वास्तविक नौकरियाँ दिला पाता है, यह अभी अस्पष्ट है। अग्निपथ योजना की आलोचना का केंद्र बिंदु यही रहा है कि चार साल की सेवा के बाद जवानों के पास कोई संस्थागत सहारा नहीं होता; एक 'सेल' बनाना उस खालीपन को भरने की दिशा में पहला कदम है, पर पर्याप्त नहीं। यदि इस सेल के पास बजट, जनशक्ति और उद्योग से ठोस एमओयू नहीं हुए, तो यह महज एक और घोषणा बनकर रह जाएगी। अन्य राज्यों की नज़र इस मॉडल पर है — उत्तराखंड के पास अवसर है कि वह एक मापनीय और दोहराने योग्य ढाँचा पेश करे।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तराखंड का 'अग्निवीर रोजगार सेल' क्या है?
यह उत्तराखंड सरकार द्वारा स्थापित एक समर्पित संस्थागत इकाई है जो सेवामुक्त अग्निवीरों को उनकी योग्यता और सैन्य कौशल के आधार पर सरकारी व निजी क्षेत्र में रोजगार से जोड़ेगी। 25 अगस्त 2026 को कैबिनेट बैठक में इसे मंजूरी दी गई।
क्या उत्तराखंड ऐसा सेल बनाने वाला पहला राज्य है?
हाँ, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अनुसार उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जिसने सेवामुक्त अग्निवीरों के लिए एक समर्पित रोजगार सेल गठित करने का निर्णय लिया है।
अग्निवीर रोजगार सेल से सेवामुक्त जवानों को क्या फायदा होगा?
यह सेल अग्निवीरों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाएगा, करियर मार्गदर्शन प्रदान करेगा और सरकारी विभागों, स्वायत्त संस्थानों तथा निजी क्षेत्र में उपलब्ध रोजगार के अवसरों की जानकारी उन तक पहुँचाएगा।
कैबिनेट बैठक में शहीदों को लेकर क्या निर्णय लिया गया?
उत्तराखंड कैबिनेट ने अमर बलिदानियों की प्रतिमाएँ उनके पैतृक गाँवों में स्थापित करने का फैसला किया। इसका उद्देश्य शहीदों की स्मृति को सम्मान देना और आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति के लिए प्रेरित करना है।
अग्निपथ योजना के बाद सेवामुक्त जवानों के पुनर्वास पर राष्ट्रीय स्थिति क्या है?
अग्निपथ योजना के तहत चार वर्षीय सेवा के बाद जवानों के पुनर्वास को लेकर देशभर में बहस जारी है। कई राज्यों ने पुलिस भर्तियों में प्राथमिकता देने की घोषणा की है, लेकिन उत्तराखंड का समर्पित रोजगार सेल एक नई संस्थागत पहल है जो अन्य राज्यों के लिए मॉडल बन सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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