11 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

उत्तराखंड मदरसा ग्रांट बंद: एआईएमजे प्रमुख ने उठाए सवाल, साजिद रशीदी की टिप्पणी को बताया शर्मनाक

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
उत्तराखंड मदरसा ग्रांट बंद: एआईएमजे प्रमुख ने उठाए सवाल, साजिद रशीदी की टिप्पणी को बताया शर्मनाक

सारांश

उत्तराखंड में मदरसा ग्रांट बंद होने पर एआईएमजे प्रमुख मौलाना शहाबुद्दीन ने कड़ा विरोध जताया। साजिद रशीदी की महिलाओं पर टिप्पणी को 'शर्मनाक' बताते हुए निंदा की। वंदे मातरम गाइडलाइंस को सरकारी दायरे तक सीमित बताया और जम्मू-कश्मीर को राज्य दर्जा देने की अपील की।

मुख्य बातें

एआईएमजे प्रमुख मौलाना शहाबुद्दीन ने 11 जुलाई को बरेली में कई राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी।
उत्तराखंड सरकार ने 250 मदरसे बंद करने, मदरसा बोर्ड भंग करने और अब सरकारी अनुदान खत्म करने का निर्णय लिया है — इसे शहाबुद्दीन ने मुस्लिम शिक्षा पर हमला बताया।
मौलाना साजिद रशीदी की 14-15 वर्षीय लड़कियों की शादी पर विवादित टिप्पणी को शहाबुद्दीन ने 'गलत और शर्मिंदगी वाली बात' कहकर निंदा की।
गृह मंत्रालय की वंदे मातरम और राष्ट्रगान गाइडलाइंस को शहाबुद्दीन ने केवल सरकारी कार्यालयों तक सीमित बताया और विरोध को अनावश्यक करार दिया।
केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य दर्जा देने की अपील की और पीओके को भारत का अभिन्न अंग बताया।

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात (एआईएमजे) के प्रमुख मौलाना शहाबुद्दीन ने 11 जुलाई को बरेली में उत्तराखंड सरकार के मदरसा अनुदान समाप्त करने के फैसले, मौलाना साजिद रशीदी की महिलाओं पर विवादित टिप्पणी, वंदे मातरम और राष्ट्रगान पर नई गाइडलाइंस तथा जम्मू-कश्मीर के राज्य दर्जे पर अपनी प्रतिक्रिया दर्ज कराई। उन्होंने रशीदी की टिप्पणी को सीधे तौर पर 'शर्मनाक' करार देते हुए उसकी निंदा की।

उत्तराखंड मदरसा नीति पर कड़ा विरोध

मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि उत्तराखंड सरकार ने पहले 250 मदरसों को बंद किया, फिर मदरसा एजुकेशन बोर्ड को भंग कर दिया और अब सरकारी अनुदान भी समाप्त कर दिया है। उनके अनुसार, इन कदमों का उद्देश्य मुस्लिम समुदाय की नई पीढ़ी को अरबी, फारसी और उर्दू की शिक्षा से वंचित करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह नीति जानबूझकर समुदाय की शैक्षणिक प्रगति को अवरुद्ध करने के इरादे से बनाई गई है।

गौरतलब है कि उत्तराखंड सरकार ने हाल ही में कैबिनेट बैठक में मदरसों को दी जाने वाली सरकारी ग्रांट खत्म करने का निर्णय लिया था, जिसे लेकर मुस्लिम संगठनों में व्यापक आक्रोश है।

साजिद रशीदी की टिप्पणी पर कड़ी निंदा

मौलाना शहाबुद्दीन ने मौलाना साजिद रशीदी की उस टिप्पणी को 'गलत और शर्मिंदगी वाली बात' बताया, जिसमें कथित तौर पर कहा गया था कि 14-15 वर्ष की आयु में लड़कियों की शादी न होने पर उनके साथ दुष्कर्म की आशंका रहती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस्लाम में इस उम्र में 'बालिग' होने का अर्थ केवल यह है कि बच्चे अपने निर्णय स्वयं लेने में सक्षम हो जाते हैं — न कि विवाह की अनिवार्यता।

उन्होंने कहा, 'इस तरह के बयानों की मैं निंदा करता हूँ।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब रशीदी की टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया और विभिन्न सामाजिक संगठनों में तीखी प्रतिक्रिया देखी जा रही है।

वंदे मातरम और राष्ट्रगान गाइडलाइंस पर रुख

मौलाना शहाबुद्दीन ने गृह मंत्रालय की वंदे मातरम और राष्ट्रगान संबंधी नई गाइडलाइंस को लेकर संतुलित रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि ये निर्देश केवल सरकारी कार्यालयों के लिए हैं, सार्वजनिक या जन-कार्यक्रमों के लिए नहीं, इसलिए इनका विरोध करना उचित नहीं है। उनके अनुसार, जो लोग इनका गायन नहीं करना चाहते, उन पर किसी प्रकार का दबाव नहीं डाला जा रहा।

जम्मू-कश्मीर राज्य दर्जे की माँग का समर्थन

जम्मू-कश्मीर के राज्य दर्जे पर मौलाना शहाबुद्दीन ने केंद्र सरकार से अपील की कि वह जम्मू-कश्मीर को शीघ्र पूर्ण राज्य का दर्जा दे। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद से क्षेत्र में विकास कार्य हुए हैं और वहाँ की जनता अमन-शांति चाहती है। उन्होंने डॉ. फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और मीरवाइज जैसे नेताओं की राज्य दर्जे की माँग का भी उल्लेख किया।

पीओके पर उन्होंने कहा कि वह भारत का अभिन्न अंग है और शीघ्र ही भारत में शामिल होगा। आगे की राजनीतिक प्रक्रिया और केंद्र के निर्णय पर सभी की नज़रें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर बोर्ड भंग, अब ग्रांट समाप्त — एक सुनियोजित नीतिगत दिशा का संकेत देती है, जिस पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस होनी चाहिए। एआईएमजे जैसे संगठनों की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण है, लेकिन उतना ही ज़रूरी है कि मदरसा शिक्षा की गुणवत्ता और पाठ्यक्रम सुधार पर भी खुला विमर्श हो। साजिद रशीदी की टिप्पणी की निंदा स्वागत योग्य है, पर यह सवाल बना रहता है कि ऐसे बयानों पर समुदाय के भीतर से जवाबदेही का ढाँचा कितना मज़बूत है। वंदे मातरम गाइडलाइंस पर शहाबुद्दीन का संतुलित रुख एक परिपक्व राष्ट्रीय दृष्टिकोण दर्शाता है, जो सामुदायिक नेतृत्व में अपेक्षाकृत कम देखने को मिलता है।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तराखंड सरकार ने मदरसों के लिए ग्रांट क्यों बंद की?
उत्तराखंड कैबिनेट ने मदरसों को दी जाने वाली सरकारी अनुदान राशि समाप्त करने का निर्णय लिया है। इससे पहले सरकार ने 250 मदरसे बंद करने और मदरसा एजुकेशन बोर्ड को भंग करने के कदम भी उठाए थे। एआईएमजे प्रमुख मौलाना शहाबुद्दीन के अनुसार, यह फैसला मुस्लिम समुदाय को धार्मिक शिक्षा से वंचित करने की नीति का हिस्सा है।
मौलाना साजिद रशीदी ने क्या विवादित टिप्पणी की थी?
मौलाना साजिद रशीदी ने कथित तौर पर कहा था कि 14-15 वर्ष की आयु में लड़कियों की शादी न होने पर उनके साथ दुष्कर्म की आशंका रहती है। एआईएमजे प्रमुख मौलाना शहाबुद्दीन ने इस टिप्पणी को 'गलत और शर्मिंदगी वाली बात' बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की।
गृह मंत्रालय की वंदे मातरम गाइडलाइंस क्या हैं और एआईएमजे का क्या कहना है?
गृह मंत्रालय ने वंदे मातरम और राष्ट्रगान को सरकारी कार्यालयों में अनिवार्य करने की नई गाइडलाइंस जारी की हैं। मौलाना शहाबुद्दीन ने स्पष्ट किया कि ये निर्देश केवल सरकारी दफ्तरों के लिए हैं, जन-कार्यक्रमों के लिए नहीं, इसलिए इनका विरोध करना अनावश्यक है।
जम्मू-कश्मीर के राज्य दर्जे पर एआईएमजे का क्या रुख है?
एआईएमजे प्रमुख मौलाना शहाबुद्दीन ने केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर को शीघ्र पूर्ण राज्य का दर्जा देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद विकास कार्य हुए हैं और डॉ. फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला तथा मीरवाइज जैसे नेता लगातार यही माँग कर रहे हैं।
एआईएमजे क्या है और मौलाना शहाबुद्दीन कौन हैं?
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात (एआईएमजे) एक राष्ट्रीय मुस्लिम संगठन है। मौलाना शहाबुद्दीन इसके प्रमुख हैं और बरेली से विभिन्न सामाजिक-धार्मिक मुद्दों पर अपनी राय रखते हैं। वे मुस्लिम समुदाय से जुड़े शिक्षा, महिला अधिकार और राष्ट्रीय नीतियों पर नियमित रूप से प्रतिक्रिया देते हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 घंटा पहले
  2. 3 घंटे पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले