11 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मदरसा ग्रांट बंद करने पर जमात-ए-इस्लामी हिंद का विरोध, सीएम योगी को 'राजधर्म' निभाने की नसीहत

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मदरसा ग्रांट बंद करने पर जमात-ए-इस्लामी हिंद का विरोध, सीएम योगी को 'राजधर्म' निभाने की नसीहत

सारांश

उत्तराखंड सरकार के मदरसा ग्रांट बंद करने के फैसले पर जमात-ए-इस्लामी हिंद ने संवैधानिक अधिकारों का हवाला देते हुए कड़ा विरोध जताया। उपाध्यक्ष प्रो. मोहम्मद सलीम इंजीनियर ने सीएम योगी को 'राजधर्म' — यानी सभी के साथ समान न्याय — की याद दिलाई और अमेरिका-ईरान संघर्ष को इजराइली दबाव का नतीजा बताया।

मुख्य बातें

जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष प्रो.
मोहम्मद सलीम इंजीनियर ने 11 जुलाई 2026 को उत्तराखंड की मदरसा ग्रांट बंद करने की नीति को संविधान-विरोधी बताया।
उन्होंने कहा कि आज के मदरसों में हिंदी, अंग्रेजी सहित सभी विषय पढ़ाए जाते हैं और वे शिक्षा सुलभता में सरकार की भूमिका निभा रहे हैं।
सीएम योगी आदित्यनाथ के घाट-पूजा बयान को 'सामाजिक ध्रुवीकरण' को बढ़ावा देने वाला बताया गया।
इंजीनियर ने 'राजधर्म' की परिभाषा देते हुए कहा — सभी के साथ समान व्यवहार, न्याय और किसी के प्रति शत्रुता न रखना।
अमेरिका-ईरान संघर्ष पर उन्होंने कहा कि अमेरिका , इजराइल के दबाव में काम कर रहा है और यह जंग नेतन्याहू को राजनीतिक संकट से बचाने के लिए जारी है।

जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष प्रो. मोहम्मद सलीम इंजीनियर ने 11 जुलाई 2026 को उत्तराखंड सरकार के मदरसों की ग्रांट (अनुदान) बंद करने के फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यह कदम संवैधानिक अधिकारों के विरुद्ध है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हालिया बयान पर भी प्रतिक्रिया दी और अमेरिका-ईरान के बीच फिर से भड़के संघर्ष पर अपनी राय रखी।

मदरसा ग्रांट विवाद: संविधान का हवाला

प्रो. इंजीनियर ने कहा कि उत्तराखंड सरकार की नीतियों से राज्य में मुसलमानों के खिलाफ नफरत का माहौल बन रहा है और मदरसों को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा, 'देश को संविधान के अनुसार चलना चाहिए, और संविधान हर धर्म के लोगों को अपने संस्थान चलाने का अधिकार देता है।'

उन्होंने तर्क दिया कि मदरसे सरकारी नियमों के दायरे में रहकर शिक्षा के क्षेत्र में योगदान दे रहे हैं। उनके अनुसार, आज के मदरसे केवल अरबी और कुरान तक सीमित नहीं हैं — हिंदी, अंग्रेजी और अन्य विषय भी पाठ्यक्रम का अभिन्न हिस्सा हैं। इस प्रकार मदरसे शिक्षा को सुलभ बनाने की सरकारी जिम्मेदारी में भी साझेदार हैं।

सीएम योगी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस बयान पर — जिसमें उन्होंने पिछली सरकारों द्वारा घाटों पर नमाज की सुविधा देने और मौजूदा सरकार द्वारा पूजा-पाठ करवाने का जिक्र किया था — प्रो. इंजीनियर ने कहा कि ऐसी सोच 'नफरत, बंटवारे और सामाजिक ध्रुवीकरण' को बढ़ावा देती है।

उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक रूप से चुने गए और संवैधानिक पद पर आसीन मुख्यमंत्री को संविधान की शपथ का पालन करते हुए सभी धर्मों के नागरिकों के साथ समान व्यवहार करना चाहिए। 'किसी खास धर्म के प्रति नफरत नहीं होनी चाहिए — यह उस पद की बुनियादी जिम्मेदारी है।'

राजधर्म की परिभाषा

प्रो. इंजीनियर ने कहा कि सीएम योगी एक धार्मिक व्यक्ति और साधु हैं, इसलिए उनसे अपेक्षाएँ और भी अधिक हैं। उन्होंने 'राजधर्म' की व्याख्या करते हुए कहा कि इसका अर्थ है — सभी के साथ समान व्यवहार, सभी को न्याय, किसी के विरुद्ध शत्रुता का न होना और शांति व कानून-व्यवस्था का बनाए रखना। उन्होंने चेताया कि यदि नागरिकों को यह लगे कि सरकार एक समुदाय को आगे बढ़ा रही है और दूसरे को दबा रही है, तो यह शासन की विफलता है।

अमेरिका-ईरान संघर्ष पर रुख

अमेरिका और ईरान के बीच फिर से भड़के संघर्ष पर प्रो. इंजीनियर ने कहा कि अमेरिका ने शुरू से ही यही रवैया अपनाया है और ईरान को इसकी जानकारी पहले से थी। उनके अनुसार, परमाणु समझौते का उल्लंघन किया गया क्योंकि अमेरिका ईरान में वह सत्ता परिवर्तन नहीं करा सका जो वह चाहता था।

उन्होंने कहा कि ईरान के लोग भारी कुर्बानियों — प्रमुख नेताओं की शहादत और व्यापक नुकसान — के बावजूद अपनी सरकार के साथ मजबूती से खड़े रहे। प्रो. इंजीनियर ने यह भी कहा कि उनके विचार में अमेरिका, इजराइल के दबाव में काम कर रहा है और यह संघर्ष बेंजामिन नेतन्याहू को राजनीतिक रूप से बचाए रखने के लिए जारी रखा जा रहा है।

आगे क्या

उत्तराखंड में मदरसा ग्रांट का मामला अब राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर तेज होने की संभावना है। मुस्लिम संगठनों द्वारा संवैधानिक उपायों की तलाश किए जाने की आशंका है, जबकि राज्य सरकार अभी तक अपने फैसले पर कायम है। इस विवाद का असर उत्तर प्रदेश की राजनीति पर भी पड़ सकता है, जहाँ अल्पसंख्यक शिक्षा नीति पहले से ही बहस का केंद्र रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ग्रांट बंद करने का निर्णय किसी स्पष्ट नियामक आधार पर है या केवल राजनीतिक संदेश देने के लिए। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर यह नहीं पूछती कि इन मदरसों के पास सरकारी मान्यता और पाठ्यक्रम अनुपालन का क्या रिकॉर्ड है — जो ग्रांट की वैधता का असली पैमाना होना चाहिए। बिना इस तथ्यात्मक आधार के, यह बहस तथ्य से ज्यादा पहचान की राजनीति पर टिकी रहेगी।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तराखंड सरकार ने मदरसों की ग्रांट क्यों बंद की?
उत्तराखंड सरकार ने मदरसों को दी जाने वाली सरकारी ग्रांट बंद करने का फैसला किया है, हालांकि सरकार ने इसके लिए कोई विस्तृत आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं किया है। जमात-ए-इस्लामी हिंद ने इस फैसले को संविधान प्रदत्त अल्पसंख्यक शैक्षणिक अधिकारों का उल्लंघन बताया है।
जमात-ए-इस्लामी हिंद ने मदरसा ग्रांट विवाद पर क्या कहा?
जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष प्रो. मोहम्मद सलीम इंजीनियर ने कहा कि संविधान हर धर्म के लोगों को अपने संस्थान चलाने का अधिकार देता है और मदरसे शिक्षा के क्षेत्र में सरकारी जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं। उन्होंने उत्तराखंड सरकार पर मुसलमानों के खिलाफ नफरत का माहौल बनाने का आरोप लगाया।
प्रो. इंजीनियर ने सीएम योगी को 'राजधर्म' निभाने की नसीहत क्यों दी?
सीएम योगी आदित्यनाथ के उस बयान के संदर्भ में — जिसमें पिछली सरकारों द्वारा घाटों पर नमाज की सुविधा और मौजूदा सरकार द्वारा पूजा-पाठ करवाने का जिक्र था — प्रो. इंजीनियर ने कहा कि यह सोच सामाजिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देती है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक पद पर रहते हुए सभी धर्मों के नागरिकों के साथ समान व्यवहार करना 'राजधर्म' है।
क्या मदरसों में केवल धार्मिक शिक्षा दी जाती है?
नहीं। प्रो. मोहम्मद सलीम इंजीनियर के अनुसार, आज के मदरसों में हिंदी, अंग्रेजी और अन्य विषय भी पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं। वे केवल अरबी और कुरान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सरकारी नियमों के अनुसार शिक्षा सुलभ बनाने में भी योगदान दे रहे हैं।
अमेरिका-ईरान संघर्ष पर जमात-ए-इस्लामी हिंद का क्या रुख है?
प्रो. इंजीनियर ने कहा कि अमेरिका ने परमाणु समझौते का उल्लंघन किया क्योंकि वह ईरान में सत्ता परिवर्तन नहीं करा सका। उनके अनुसार, यह संघर्ष इजराइल के दबाव में जारी है और नेतन्याहू को राजनीतिक रूप से बचाए रखने का साधन बन गया है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 घंटे पहले
  2. 4 घंटे पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 8 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले