वैश्विक सभ्यता पहल: अस्थिर दुनिया में स्थिरता का मार्ग
सारांश
Key Takeaways
- वैश्विक सभ्यता पहल का उद्देश्य सांस्कृतिक सहिष्णुता को बढ़ावा देना है।
- 90.8%25 उत्तरदाता सांस्कृतिक विविधता के सम्मान के पक्ष में हैं।
- 77.2%25 का मानना है कि सभ्यताओं के बीच भेदभाव नहीं होना चाहिए।
- 87.4%25 का मानना है कि संवाद से विश्व शांति बढ़ सकती है।
- अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए सांस्कृतिक आदान-प्रदान महत्वपूर्ण है।
बीजिंग, 15 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस समय अप्रत्याशित और महत्वपूर्ण परिवर्तनों का सामना कर रहा है। सभी देश स्थिरता की तलाश में हैं। इसमें विभिन्न सभ्यताओं के बीच सहनशीलता और आपसी सीख का एक महत्वपूर्ण स्थान है।
चाइना मीडिया ग्रुप (सीएमजी) के अंतर्गत सीजीटीएन ने हाल ही में चीन के रेनमिन विश्वविद्यालय के सहयोग से 41 देशों के 12,302 इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के बीच एक सर्वेक्षण किया। उत्तरदाताओं ने चीन द्वारा प्रस्तुत वैश्विक सभ्यता पहल की सराहना की। उनका मानना है कि इस पहल में शामिल सांस्कृतिक विविधता का सम्मान और मानवता के साझा मूल्यों का विकास जैसे विचार वर्तमान अंतर्राष्ट्रीय परिस्थिति में अत्यंत प्रासंगिक हैं।
चीन का हमेशा से यह मानना रहा है कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान के माध्यम से सांस्कृतिक बाधाओं को पार किया जा सकता है। सभ्यताओं के बीच आपसी सीख के जरिये सभ्यताओं के टकराव को टाला जा सकता है। सभ्यता की समावेशिता के माध्यम से सभ्यता की श्रेष्ठता को पार किया जा सकता है। सर्वेक्षण में शामिल 90.8%25 उत्तरदाता इस बात से सहमत हैं कि सांस्कृतिक विविधता का सम्मान अंतरराष्ट्रीय समुदाय में एक बुनियादी सिद्धांत होना चाहिए।
77.2%25 उत्तरदाताओं का मानना है कि सभ्यताओं के बीच ऊंच-नीच और श्रेष्ठ-अश्रेष्ठ का कोई भेद नहीं होना चाहिए। 87.7%25 ने कहा कि सभी सभ्यताओं को समान सम्मान मिलना चाहिए।
चीन का यह मानना है कि शांति, विकास, निष्पक्षता, न्याय, लोकतंत्र और स्वतंत्रता सभी देशों के लोगों का साझा लक्ष्य है। विभिन्न सभ्यताओं द्वारा मूल्यों के अर्थ को समझने और सम्मान करने का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए। सर्वेक्षण में शामिल 91.8%25 नेटीजनों ने इस विचार का समर्थन किया। 87.7%25 ने कहा कि शांति और विकास वर्तमान समय में मुख्य मुद्दे हैं। 81%25 ने विभिन्न देशों से अपील की कि वे वैचारिक पूर्वाग्रहों को छोड़कर सांस्कृतिक विविधता का सम्मान करें।
आर्थिक वैश्वीकरण के इस युग में विभाजन रेखा के बजाय संपर्क के पुल की आवश्यकता है। सर्वेक्षण में शामिल 87.4%25 का मानना है कि सभ्यताओं के बीच संवाद अंतरराष्ट्रीय टकराव को कम करने और विश्व शांति को बढ़ावा देने में सहायक हो सकता है। 89.5%25 ने कहा कि सभ्यताओं के बीच आदान-प्रदान अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण आधार तैयार करता है। साथ ही, 89.8%25 का मानना है कि विभिन्न सभ्यताओं के बीच आवाजाही मानव विकास को आगे बढ़ा सकती है।
यह ध्यान देने योग्य है कि यह सर्वेक्षण ऑनलाइन किया गया था। उत्तरदाता मुख्य रूप से विकसित देशों और वैश्विक दक्षिण के देशों से थे।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)