वंदे मातरम ने स्वतंत्रता संग्राम को एकता में पिरोया: केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने 19 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि वंदे मातरम एक अमर राष्ट्रगीत है, जिसने भारत के स्वतंत्रता संग्राम को एकता के सूत्र में बाँधने का ऐतिहासिक कार्य किया। उनके अनुसार यह गीत देश के करोड़ों नागरिकों में देशभक्ति की अखंड भावना जगाता है।
वंदे मातरम का ऐतिहासिक महत्व
शेखावत ने कहा कि वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं, बल्कि स्वतंत्रता सेनानियों की प्रेरणा का स्रोत था। उनके शब्दों में, हजारों वीरों ने इस गीत को गाते हुए अपने प्राण न्योछावर किए और देश की आजादी की राह में वीरगति को प्राप्त हुए। उन्होंने यह भी कहा कि देश में अनेक ऐसी पुण्य आत्माएँ रही होंगी, जिन्होंने अपने जीवन के अंतिम क्षणों में भी यह गीत गाया होगा।
कांग्रेस नेताओं पर निशाना
केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं द्वारा वंदे मातरम के कथित अपमान की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि इस राष्ट्रीय गीत का अपमान करना उन शहीदों का अपमान करना है, जिन्होंने हँसते-हँसते अपने प्राणों की आहुति दी थी। शेखावत के अनुसार, वंदे मातरम का अपना एक विशिष्ट सम्मान है और इसे ठेस पहुँचाना राष्ट्रीय भावना के विरुद्ध है।
हर घर तिरंगा अभियान: नया रिकॉर्ड
शेखावत ने हर घर तिरंगा अभियान की सफलता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह अभियान अब अपने पाँचवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने बताया कि देश के हर कोने में इस अभियान का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
पिछले वर्ष इस अभियान के अंतर्गत साढ़े सात करोड़ लोगों ने 'सेल्फी विथ तिरंगा' अपने सोशल मीडिया हैंडल पर साझा किया था। शेखावत ने दावा किया कि इस बार यह रिकॉर्ड टूट गया है और उन्हें पूरा विश्वास है कि इस वर्ष यह आँकड़ा 10 करोड़ के पार जाएगा।
आम जनता पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में स्वतंत्रता दिवस की 78वीं वर्षगाँठ की भावना अभी भी ताज़ा है। हर घर तिरंगा अभियान ने नागरिकों में राष्ट्रीय एकता और गर्व की भावना को और प्रगाढ़ किया है। गौरतलब है कि यह अभियान 2022 में शुरू हुआ था और हर वर्ष इसकी भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है।
आगे क्या
शेखावत की यह टिप्पणी राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान और देशभक्ति के विमर्श को एक बार फिर केंद्र में ला देती है। वंदे मातरम को लेकर राजनीतिक बहस आने वाले दिनों में और तेज़ होने की संभावना है, जबकि हर घर तिरंगा अभियान के अंतिम आँकड़े सामने आने पर इसकी व्यापकता का सही मूल्यांकन हो सकेगा।