वाराणसी: बरेका में विजयादशमी पर 7 गेट और 3 रंग के पास से भीड़ प्रबंधन, 80 हजार दर्शकों की उम्मीद
सारांश
मुख्य बातें
वाराणसी स्थित बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) में इस वर्ष विजयादशमी पर्व के भव्य आयोजन की तैयारियाँ पूरी हो चुकी हैं। दशहरा उत्सव में रावण का 70 फुट, कुंभकर्ण का 65 फुट और मेघनाद का 60 फुट ऊँचे पुतलों का दहन किया जाएगा। आयोजकों को इस कार्यक्रम में 60 हजार से 80 हजार दर्शकों के पहुँचने की उम्मीद है, जिसके लिए सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के व्यापक इंतज़ाम किए गए हैं।
पर्यावरण-अनुकूल सजावट की खासियत
बरेका के जनसंपर्क अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि इस वर्ष पुतलों की सजावट में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। पहले पुतलों को आकर्षक बनाने के लिए रासायनिक (केमिकल) रंगों का इस्तेमाल होता था, लेकिन इस बार रंग-बिरंगे कपड़ों से सजावट की जा रही है। यह बदलाव पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए किया गया है।
राजेश कुमार के अनुसार, कपड़ों से की गई सजावट पुतलों को पहले की तुलना में अधिक आकर्षक और चमकीला रूप दे रही है। पहले रासायनिक रंगों से एक जैसे शेड बनते थे, जबकि कपड़े पुतलों को एकदम अलग लुक देते हैं। इसे इस वर्ष के आयोजन की प्रमुख विशेषताओं में से एक बताया गया है।
भीड़ प्रबंधन के लिए 7 गेट और 3 रंग के पास
बरेका के क्रिकेट स्टेडियम में भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। दर्शकों को सफेद, लाल और पीले तीन रंगों के पास वितरित किए जाते हैं, जिनके आधार पर अलग-अलग दर्शकों को निर्धारित क्षेत्र और गेट से प्रवेश मिलता है।
राजेश कुमार ने बताया कि स्टेडियम के आसपास सात गेट बनाए गए हैं। प्रवेश और बाहर निकलने के लिए अलग-अलग गेट निर्धारित हैं, ताकि सभी लोग एक ही रास्ते से न आएँ और भीड़ व्यवस्थित तरीके से अलग-अलग हिस्सों में बँटकर अपने स्थान तक पहुँच सके। गौरतलब है कि यह व्यवस्था इतनी बड़ी भीड़ में किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के उद्देश्य से की गई है।
बहु-एजेंसी सुरक्षा तंत्र तैनात
आयोजन की सुरक्षा के लिए जिला प्रशासन, प्रदेश पुलिस, रेलवे सुरक्षा बल, सिविल डिफेंस और भारतीय स्काउट्स एंड गाइड्स के स्वयंसेवक तैनात रहेंगे। यातायात पुलिस भी दर्शकों को उनके पास के अनुसार निर्धारित गेट और मार्ग की जानकारी देगी। यह बहु-एजेंसी समन्वय सुनिश्चित करता है कि इतनी बड़ी भीड़ को व्यवस्थित और सुरक्षित तरीके से संचालित किया जा सके।
बरेका की रावण दहन परंपरा
राजेश कुमार ने बताया कि बरेका की स्थापना से पहले से ही इस क्षेत्र में रावण दहन की परंपरा चली आ रही है। अब बरेका की विजयादशमी समिति के माध्यम से यह आयोजन हर वर्ष व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराया जाता है। यह परंपरा वाराणसी की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा बन चुकी है और हर साल दर्शकों की संख्या में इजाफा होता है।
यह आयोजन इस बार पर्यावरण-अनुकूल सजावट और अत्याधुनिक भीड़ प्रबंधन के साथ एक नया मानक स्थापित करने की दिशा में बढ़ रहा है।