10 अक्टूबर 2026
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वाराणसी में चुनाव आयोग के समर्थन में युवा परिषद का न्याय मार्च, सीजेपी और कांग्रेस के खिलाफ प्रदर्शन

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वाराणसी में चुनाव आयोग के समर्थन में युवा परिषद का न्याय मार्च, सीजेपी और कांग्रेस के खिलाफ प्रदर्शन

सारांश

वाराणसी की सड़कों पर युवा परिषद का न्याय मार्च — चुनाव आयोग की रक्षा का संदेश लेकर। सीजेपी और कांग्रेस के खिलाफ नारों के बीच कार्यकर्ताओं ने राहुल-प्रियंका गांधी का इस्तीफा माँगा और चेतावनी दी कि यह तो बस शुरुआत है।

मुख्य बातें

युवा परिषद के कार्यकर्ता 10 अक्टूबर 2026 को वाराणसी में सीजेपी और कांग्रेस के खिलाफ न्याय मार्च में शामिल हुए।
प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के समर्थन में नारे लगाए।
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से तत्काल इस्तीफे की माँग की गई।
पिछले चुनाव में 98 करोड़ मतदाताओं ने मताधिकार का उपयोग किया — वकील एके सिंह ने चुनाव आयोग की विश्वसनीयता के प्रमाण के रूप में यह आँकड़ा पेश किया।
नेताओं ने चेतावनी दी कि यह केवल सांकेतिक मार्च है; विपक्ष के रुख में बदलाव न आने पर बड़े प्रदर्शन की तैयारी है।

वाराणसी में युवा परिषद के कार्यकर्ता शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को सड़कों पर उतरे और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) तथा कांग्रेस के खिलाफ एक न्याय मार्च निकाला। इस प्रदर्शन का केंद्र मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के प्रति समर्थन जताना था।

प्रदर्शन की मुख्य मांगें

प्रदर्शनकारियों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से इस्तीफे की माँग की। उनका तर्क था कि चुनाव आयोग पर सवाल उठाने से पहले उन्हें अपने पदों से हटना चाहिए। इसके साथ ही, सीजेपी के नेताओं की गिरफ्तारी और उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की माँग भी की गई।

प्रदर्शनकारियों ने सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग का विरोध करते हुए स्पष्ट किया कि वे संवैधानिक संस्था के साथ खड़े हैं। कार्यकर्ताओं ने 'राहुल गांधी इस्तीफा दो' जैसे नारों के साथ बैनर और पोस्टर भी लहराए।

वकील एके सिंह की बात

वकील एके सिंह ने कहा, 'लोकतंत्र और अभिव्यक्ति के नाम पर आम लोगों को देश में संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ खड़ा करने की साजिश चल रही है, लेकिन हम चुनाव आयोग के समर्थन में हैं।' उन्होंने कहा कि वाराणसी का युवा आज एक सांकेतिक मार्च निकाल रहा है।

सिंह ने आगे कहा कि देश का लोकतंत्र चुनाव आयोग की वजह से सफल रहा है और पिछले चुनाव में 98 करोड़ मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया। उन्होंने विपक्ष को चेताया कि यदि उनके पास सबूत हैं तो वे अदालत का रुख करें।

प्रदर्शनकारियों का संदेश

एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि वे उन तत्वों के खिलाफ एकत्रित हुए हैं जो कथित तौर पर विदेशी फंडिंग से देश की संस्थाओं को कमज़ोर करने का प्रयास कर रहे हैं। उनका कहना था कि भारत को किसी अन्य देश जैसी स्थिति में नहीं आने दिया जाएगा।

आगे क्या

वकील एके सिंह ने चेतावनी दी कि यह केवल एक सांकेतिक मार्च है और यदि विपक्ष अपना रुख नहीं बदलता, तो लाखों युवा सड़कों पर उतर सकते हैं। यह प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है जब चुनाव आयोग की स्वायत्तता और सीईसी के पद को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ हो रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

सत्तापक्ष समर्थक समूह जवाबी प्रदर्शन करते हैं। ध्यान देने योग्य है कि इस प्रदर्शन में इस्तेमाल की गई भाषा और नारे काफी आक्रामक थे, जो राजनीतिक विमर्श की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करते हैं। असली मुद्दा यह है कि संवैधानिक संस्थाओं पर बहस अदालतों और संसद में होनी चाहिए, न कि सड़कों पर भड़काऊ नारों के जरिए। दोनों पक्षों का जनमत-निर्माण के लिए सड़कों पर उतरना लोकतंत्र की ताकत है, लेकिन इसके साथ जिम्मेदारी भी आती है।
RashtraPress
10 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वाराणसी में युवा परिषद ने प्रदर्शन क्यों किया?
युवा परिषद के कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के समर्थन में न्याय मार्च निकाला। वे सीजेपी और कांग्रेस द्वारा चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर उठाए जा रहे सवालों का विरोध कर रहे थे।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य माँगें क्या थीं?
प्रदर्शनकारियों ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से इस्तीफे की माँग की, सीजेपी नेताओं की गिरफ्तारी की माँग की, और सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की विपक्षी माँग का विरोध किया।
सीईसी ज्ञानेश कुमार को लेकर विवाद क्या है?
विपक्षी दल कथित तौर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए उनके इस्तीफे की माँग कर रहे हैं। युवा परिषद जैसे समूह इस माँग का विरोध करते हुए चुनाव आयोग की स्वतंत्रता के समर्थन में उतरे हैं।
वकील एके सिंह ने क्या कहा?
वकील एके सिंह ने कहा कि देश का लोकतंत्र चुनाव आयोग की वजह से सफल है और पिछले चुनाव में 98 करोड़ मतदाताओं ने मतदान किया। उन्होंने विपक्ष को सलाह दी कि यदि उनके पास सबूत हैं तो वे अदालत का दरवाजा खटखटाएँ।
क्या आगे और बड़े प्रदर्शन की संभावना है?
नेताओं ने स्पष्ट किया कि वाराणसी का यह मार्च केवल सांकेतिक था। यदि विपक्ष अपना रुख नहीं बदलता, तो लाखों युवाओं के सड़कों पर उतरने की चेतावनी दी गई है।
राष्ट्र प्रेस
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