वाराणसी में चुनाव आयोग के समर्थन में युवा परिषद का न्याय मार्च, सीजेपी और कांग्रेस के खिलाफ प्रदर्शन
सारांश
मुख्य बातें
वाराणसी में युवा परिषद के कार्यकर्ता शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को सड़कों पर उतरे और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) तथा कांग्रेस के खिलाफ एक न्याय मार्च निकाला। इस प्रदर्शन का केंद्र मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के प्रति समर्थन जताना था।
प्रदर्शन की मुख्य मांगें
प्रदर्शनकारियों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से इस्तीफे की माँग की। उनका तर्क था कि चुनाव आयोग पर सवाल उठाने से पहले उन्हें अपने पदों से हटना चाहिए। इसके साथ ही, सीजेपी के नेताओं की गिरफ्तारी और उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की माँग भी की गई।
प्रदर्शनकारियों ने सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग का विरोध करते हुए स्पष्ट किया कि वे संवैधानिक संस्था के साथ खड़े हैं। कार्यकर्ताओं ने 'राहुल गांधी इस्तीफा दो' जैसे नारों के साथ बैनर और पोस्टर भी लहराए।
वकील एके सिंह की बात
वकील एके सिंह ने कहा, 'लोकतंत्र और अभिव्यक्ति के नाम पर आम लोगों को देश में संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ खड़ा करने की साजिश चल रही है, लेकिन हम चुनाव आयोग के समर्थन में हैं।' उन्होंने कहा कि वाराणसी का युवा आज एक सांकेतिक मार्च निकाल रहा है।
सिंह ने आगे कहा कि देश का लोकतंत्र चुनाव आयोग की वजह से सफल रहा है और पिछले चुनाव में 98 करोड़ मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया। उन्होंने विपक्ष को चेताया कि यदि उनके पास सबूत हैं तो वे अदालत का रुख करें।
प्रदर्शनकारियों का संदेश
एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि वे उन तत्वों के खिलाफ एकत्रित हुए हैं जो कथित तौर पर विदेशी फंडिंग से देश की संस्थाओं को कमज़ोर करने का प्रयास कर रहे हैं। उनका कहना था कि भारत को किसी अन्य देश जैसी स्थिति में नहीं आने दिया जाएगा।
आगे क्या
वकील एके सिंह ने चेतावनी दी कि यह केवल एक सांकेतिक मार्च है और यदि विपक्ष अपना रुख नहीं बदलता, तो लाखों युवा सड़कों पर उतर सकते हैं। यह प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है जब चुनाव आयोग की स्वायत्तता और सीईसी के पद को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ हो रही है।