यूपी में खाद्य प्रसंस्करण को नई गति: वरुण बेवरेजेस, अमूल, आईटीसी और हल्दीराम सहित 40 परियोजनाओं को एलओसी
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र तेज़ी से विस्तार की ओर बढ़ रहा है — राज्य सरकार ने 40 खाद्य प्रसंस्करण परियोजनाओं को लेटर ऑफ कम्फर्ट (एलओसी) जारी किए हैं, जिनमें वरुण बेवरेजेस, अमूल, आईटीसी, बालाजी वेफर्स और हल्दीराम जैसे राष्ट्रीय ब्रांड शामिल हैं। 12 अगस्त 2026 को सामने आई इस जानकारी के अनुसार, इन परियोजनाओं में पूर्वांचल और मध्यांचल की 21 से अधिक परियोजनाएँ शामिल हैं, जो प्रदेश के उन क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधि को गति देने का संकेत हैं जो अब तक पारंपरिक औद्योगिक केंद्रों से दूर रहे हैं।
पूर्वांचल में उभरते निवेश केंद्र
अधिकारियों के अनुसार, पूर्वांचल में 10 परियोजनाओं के माध्यम से प्रयागराज, अमेठी, वाराणसी, गोरखपुर, अयोध्या, बाराबंकी और देवरिया जैसे जिलों में औद्योगिक गतिविधियों को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है। वरुण बेवरेजेस की परियोजनाएँ प्रयागराज, अमेठी और गोरखपुर क्षेत्र में प्रस्तावित हैं, जिससे पूर्वी उत्तर प्रदेश में पेय पदार्थ निर्माण से जुड़े औद्योगिक तंत्र को मज़बूती मिलने की संभावना है।
गोरखपुर में सीपी मिल्क एंड फूड प्रोडक्ट्स अपनी मौजूदगी का विस्तार कर रही है। बनासकांठा डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स यूनियन (अमूल) की वाराणसी में डेयरी परियोजना इस क्षेत्र में बढ़ते निवेश का अहम उदाहरण है। इसके अलावा रसिक रिफ्रेशमेंट और फॉरएवर डिस्टिलरी की परियोजनाएँ भी पूर्वांचल में खाद्य एवं पेय पदार्थ क्षेत्र के विस्तार को दर्शाती हैं।
मध्यांचल बन रहा है नया खाद्य प्रसंस्करण हब
मध्यांचल में 12 परियोजनाओं को एलओसी जारी किया गया है। हरदोई जिले में वरुण बेवरेजेस, आईटीसी, बालाजी वेफर्स और हल्दीराम की परियोजनाएँ इसे खाद्य प्रसंस्करण के उभरते केंद्र के रूप में स्थापित कर रही हैं। कानपुर देहात में एचएल एग्रो प्रोडक्ट्स विस्तार कर रही है, जबकि सीतापुर में रेडिको खेतान और डालमिया चीनी मिल्स कृषि आधारित औद्योगिक गतिविधियों को बल दे रही हैं।
इसके अतिरिक्त यूनाइटेड ब्रेवरीज, ग्लोबस स्पिरिट्स, नील श्री शुगर और आरएसपीएल लिमिटेड की परियोजनाएँ भी इस क्षेत्र में प्रस्तावित हैं। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश अपनी एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को गति देने में जुटा है।
राज्य की निवेशक-केंद्रित नीति का असर
इन परियोजनाओं को जारी एलओसी राज्य की निवेशक-केंद्रित औद्योगिक नीति को रेखांकित करते हैं। कंपनियों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप प्रोत्साहन और नीतिगत सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है। इसका उद्देश्य नई इकाइयों की स्थापना के साथ-साथ मौजूदा उद्योगों के विस्तार और कारोबार में विविधता को बढ़ावा देना है।
गौरतलब है कि इन परियोजनाओं के माध्यम से किसानों, स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला, परिवहन और संगठित विनिर्माण के बीच बेहतर तालमेल बनने की उम्मीद है। इससे कृषि उत्पादों में मूल्य संवर्धन और किसानों के लिए बाज़ार के नए अवसर खुलने की संभावना है।
आम जनता और किसानों पर असर
विशाल कृषि आधार, बेहतर कनेक्टिविटी और मज़बूत औद्योगिक बुनियादी ढाँचे के साथ उत्तर प्रदेश जिला-आधारित खाद्य प्रसंस्करण तंत्र विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। आधिकारिक अनुमानों के अनुसार, इन परियोजनाओं से रोज़गार सृजन, कृषि उत्पादों में मूल्य वृद्धि और ग्रामीण क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधि का विस्तार होने की संभावना है। यदि ये परियोजनाएँ समयबद्ध ढंग से धरातल पर उतरती हैं, तो पूर्वांचल और मध्यांचल के किसानों और युवाओं के लिए यह एक निर्णायक बदलाव साबित हो सकता है।