वस्त्र मंत्रालय की नई पहल से हैंडलूम व्यापारियों के चेहरे खिले, परिष्कृति मेले में मिला अनमोल अवसर
सारांश
Key Takeaways
- परिष्कृति मेला छोटे उद्यमियों के लिए एक सुनहरा अवसर है।
- हैंडलूम व्यवसायियों को वस्त्र मंत्रालय की मदद से वैश्विक पहचान मिल रही है।
- सभी उत्पाद बिना किसी मध्यस्थ के सीधे ग्राहकों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
नई दिल्ली, 23 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। छोटे उद्यमियों और हमारी पुरानी संस्कृति को संरक्षित करने के लिए वस्त्र मंत्रालय हर वर्ष विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करता है और 2026 की शुरुआत के साथ परिष्कृति का शुभारंभ हो चुका है।
परिष्कृति में सभी राज्यों की हैंडलूम स्टॉल का प्रदर्शन हो रहा है, और राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित हैंडलूम व्यापारी इस सुनहरे अवसर के लिए वस्त्र मंत्रालय और सरकार का दिल से आभार व्यक्त कर रहे हैं।
हथकरघा विभाग की विकास आयुक्त डॉ. एम. बीना ने परिष्कृति का दौरा किया और वहाँ उपस्थित सभी व्यापारियों से संवाद किया। उन्होंने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "परिष्कृति का उद्देश्य ग्राहकों को प्रीमियम उत्पाद बिना किसी मध्यस्थ के उपलब्ध कराना है। इससे ग्राहकों को उचित मूल्य पर उत्पाद मिलेंगे और व्यापारियों को भी लाभ होगा। हमारी कोशिश है कि परिष्कृति का आयोजन हर साल हो और देश के हथकरघा से जुड़े छोटे कलाकार इससे लाभान्वित हों।"
उन्होंने यह भी बताया कि हमारी संस्कृति और कला को संरक्षित करना भी हमारी जिम्मेदारी है। यदि हम ऐसे कार्यक्रम नहीं करेंगे, तो हमारी कला विलुप्त हो सकती है।
पश्चिम बंगाल के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित व्यापारी खोकन नंदी ने राष्ट्र प्रेस से कहा कि वे जामदानी साड़ी बनाने में बचपन से ही लगे हुए हैं। उन्होंने कहा, "पहले बंगाल में जामदानी साड़ी की भरपूर ताजगी थी, लेकिन अब वह स्थिति नहीं रही। न तो साड़ी बनाने के लिए वित्तीय संसाधन हैं और न ही मेहनत का उचित प्रतिफल मिलता है। लेकिन अब धीरे-धीरे सरकार की मदद से जामदानी साड़ियों को वैश्विक पहचान मिल रही है और व्यापार के नए रास्ते खुल रहे हैं। टेक्सटाइल मिनिस्ट्री की सहायता से हमें यहाँ व्यापार करने का अवसर मिला है।"
व्यापारी ने जामदानी साड़ियों की विशेषताएँ बताते हुए कहा कि ये साड़ियाँ प्योर सिल्क से निर्मित हैं और सभी कार्य हाथ से होते हैं। साड़ी पर कोई मशीन वर्क नहीं होता है और सिल्क में भी मिलावट नहीं होती है।
बनारस की संस्कृति और कला का प्रतिनिधित्व कर रही अंगिका कुशवाहा को भी 2023 में नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। अंगिका ने परिष्कृति में बनारस की साड़ी, दुपट्टे, सूट और लहंगे पेश किए हैं, जो बनारस की शुद्धता को दर्शाते हैं।
अंगिका ने राष्ट्र प्रेस को बताया कि टेक्सटाइल मिनिस्ट्री और सरकार के प्रयासों के कारण उन्हें परिष्कृति का हिस्सा बनने का अवसर मिला है। इस स्टॉल के माध्यम से वे ग्राहकों को सही दामों पर असली उत्पाद उपलब्ध करवा रही हैं और लोग उनके उत्पाद खरीद भी रहे हैं।