विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी: महाकालेश्वर मंदिर में गणेश स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, भस्म आरती में उमड़े भक्त
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में 30 सितंबर 2026 को तड़के विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी के पावन अवसर पर भव्य भस्म आरती का आयोजन हुआ, जिसमें देशभर से आए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। द्वादश ज्योतिर्लिंगों में सर्वोच्च स्थान रखने वाले बाबा महाकाल का इस विशेष तिथि पर गणेश स्वरूप में आकर्षक शृंगार किया गया, जो श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत दुर्लभ और अलौकिक दृश्य रहा।
मुख्य घटनाक्रम
आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी यानी विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी पर प्रातःकाल मंदिर के कपाट भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के बाद ढोल-नगाड़ों की गूँज के साथ खोले गए। गर्भगृह में बाबा महाकाल का पहले जलाभिषेक किया गया, इसके पश्चात दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से तैयार पंचामृत से विधि-विधान पूर्वक अभिषेक संपन्न हुआ।
पूजन क्रम में प्रथम घंटाल बजाकर बाबा को हरिओम जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के उपरांत भगवान को मुकुट धारण कराया गया, और तत्पश्चात झांझ-मंजीरों, ढोल-नगाड़ों एवं शंखनाद के मध्य भस्म आरती का शुभारंभ हुआ।
गणेश स्वरूप शृंगार की विशेषता
विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी के उपलक्ष्य में बाबा महाकाल को गणेश स्वरूप में सजाया गया। भगवान को भांग, मोरपंख, चंदन और सिंदूर से अलंकृत किया गया। शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाला और रुद्राक्ष की माला धारण कराई गई। सुगंधित पुष्पों की माला भी अर्पित की गई, तथा ड्रायफ्रूट, फल और मिठाइयों का भोग लगाया गया।
भस्म आरती की परंपरा
महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती अपनी अनूठी धार्मिक परंपरा और मान्यता के लिए देशभर में विख्यात है। परंपरा के अनुसार महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को पवित्र भस्म अर्पित की जाती है। मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के बाद बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप धारण कर भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि यह भस्म आरती देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालुओं को उज्जैन खींच लाती है।
श्रद्धालुओं का उत्साह
भस्म आरती के दौरान संपूर्ण मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। घंटियों की टंकार, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार के बीच भक्त भावविभोर होकर बाबा की भक्ति में लीन दिखे। यह ऐसे समय में आया है जब आश्विन माह में धार्मिक उत्सवों की श्रृंखला पूरे देश में श्रद्धा की लहर उत्पन्न किए हुए है।
महाकालेश्वर मंदिर का महत्व
गौरतलब है कि श्री महाकालेश्वर मंदिर भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एकमात्र ऐसा तीर्थ है जहाँ दक्षिणमुखी शिवलिंग स्थापित है, जिसे अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है। प्रतिदिन तड़के आयोजित होने वाली भस्म आरती यहाँ की पहचान है, किंतु विशेष तिथियों पर इस आरती का आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। संकष्टी चतुर्थी पर गणेश स्वरूप शृंगार इसी विशेषता का उदाहरण है।