17 सितंबर 2026
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विश्वकर्मा जयंती 2026: योगी, मोहन यादव, धामी सहित 8 मुख्यमंत्रियों ने दीं शुभकामनाएं

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विश्वकर्मा जयंती 2026: योगी, मोहन यादव, धामी सहित 8 मुख्यमंत्रियों ने दीं शुभकामनाएं

सारांश

विश्वकर्मा जयंती पर राजनीतिक एकता की दुर्लभ झलक — भाजपा और कांग्रेस दोनों के मुख्यमंत्रियों ने एक स्वर में शिल्पकारों और श्रमिकों को सम्मान दिया। योगी से सुक्खू तक, आठ राज्यों के नेताओं के संदेश इस पर्व की सर्वसमावेशी सांस्कृतिक शक्ति को दर्शाते हैं।

मुख्य बातें

17 सितंबर 2026 को देशभर में भगवान विश्वकर्मा जयंती धूमधाम से मनाई गई।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर पोस्ट कर शिल्पकारों और अभियंताओं को शुभकामनाएं दीं।
मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्रियों ने भी बधाई संदेश दिए।
भाजपा और कांग्रेस — दोनों दलों के मुख्यमंत्रियों ने एकसुर में इस पर्व पर शुभकामनाएं दीं।
यह पर्व विशेष रूप से कारीगरों, शिल्पकारों, इंजीनियरों और औद्योगिक श्रमिकों के लिए समर्पित है।

भगवान विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर 17 सितंबर 2026 को देशभर में पूजा-अर्चना और उत्सव का माहौल है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता तक, आठ से अधिक राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने शिल्पकारों, कारीगरों और श्रमिकों को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। सृजन, कौशल और श्रम के देवता के रूप में पूजे जाने वाले भगवान विश्वकर्मा की यह जयंती हर वर्ष 17 सितंबर को मनाई जाती है।

योगी आदित्यनाथ का संदेश

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर लिखा, 'सृजन, कौशल एवं श्रम-साधना के अधिष्ठाता भगवान विश्वकर्मा की पावन जयंती की सभी श्रद्धालुओं तथा प्रदेश वासियों को हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं।' उन्होंने प्रार्थना की कि 'देवशिल्पी' की कृपा से शिल्पकारों, अभियंता बंधुओं एवं श्रमिकों के जीवन में उन्नति व समृद्धि आए और 'नया भारत' प्रगति के नए शिखरों को प्राप्त करे।

मध्य प्रदेश, बिहार और उत्तराखंड के मुख्यमंत्रियों की बधाई

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक्स पर लिखा, 'सृजन, शिल्प और कौशल के आराध्य भगवान श्री विश्वकर्मा जी की जयंती की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।' उन्होंने कामना की कि श्रम, कौशल और नवाचार की भावना सशक्त हो और शिल्पकारों व कारीगरों के जीवन में सुख-समृद्धि आए।

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि 'निर्माण, सृजन और शिल्प-कौशल के अधिष्ठाता भगवान विश्वकर्मा जी की पूजा के पावन पर्व पर' सभी को शुभकामनाएं, और प्रार्थना की कि भगवान की कृपा से सभी के जीवन में सुख-समृद्धि एवं सफलता आए। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि 'निर्माण, सृजन और तकनीकी कौशल के देवता' को कोटिशः नमन करते हुए सभी के जीवन में सृजनशीलता और उत्कृष्टता का संचार हो, यही कामना है।

राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा के नेताओं का संदेश

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, 'शिल्प, वास्तुकला और तकनीकी कौशल के अधिष्ठाता देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा जी की पावन जयंती पर सभी को हार्दिक शुभकामनाएं!' उन्होंने कामना की कि भगवान विश्वकर्मा प्रदेश को उन्नति, समृद्धि और नव-सृजन की राह पर अग्रसर रखें।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक्स पर लिखा, 'इस पावन अवसर पर अपने श्रम, कौशल और परिश्रम से राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाले सभी शिल्पकारों, कारीगरों और कामगारों का हृदय से अभिनंदन करती हूं।' हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कहा कि 'देव शिल्पी, वास्तुकला एवं निर्माण के अधिष्ठाता' को नमन करते हुए प्रत्येक परिवार में सुख-समृद्धि और सफलता की कामना की।

हिमाचल प्रदेश के सुक्खू का संदेश

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'भगवान विश्वकर्मा की जयंती पर समस्त शिल्पी समाज एवं प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं।' उन्होंने कामना की कि 'हर हुनर को पहचान, हर हाथ को सम्मान और हर सृजन को नई ऊंचाई मिले।' गौरतलब है कि हिमाचल में कांग्रेस की सरकार है, जबकि अन्य अधिकांश राज्यों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) सत्ता में है — फिर भी सभी दलों के नेताओं ने इस अवसर पर एकसुर में शुभकामनाएं दी हैं, जो इस पर्व की सर्वसमावेशी सांस्कृतिक महत्ता को रेखांकित करता है।

विश्वकर्मा जयंती का महत्व

भगवान विश्वकर्मा को हिंदू धर्म में देवताओं के शिल्पकार और वास्तुकार के रूप में पूजा जाता है। यह पर्व विशेष रूप से कारखानों, उद्योगों, इंजीनियरिंग संस्थानों और निर्माण क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए महत्वपूर्ण है। हर वर्ष 17 सितंबर को यह जयंती मनाई जाती है, जब लाखों शिल्पकार और श्रमिक अपने औज़ारों की पूजा करते हैं। देश के औद्योगिक विकास और 'मेक इन इंडिया' जैसी पहलों के संदर्भ में यह पर्व और भी प्रासंगिक बन जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इनका राजनीतिक संदर्भ भी है — यह पर्व उन करोड़ों शिल्पकारों, कारीगरों और औद्योगिक श्रमिकों से सीधे जुड़ता है जो चुनावी दृष्टि से महत्वपूर्ण वर्ग हैं। यह ध्यान देने योग्य है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों के नेता इस अवसर पर समान उत्साह दिखाते हैं, जो इस पर्व की व्यापक सामाजिक स्वीकार्यता को रेखांकित करता है। 'मेक इन इंडिया' और कौशल विकास की नीतिगत चर्चाओं के बीच, इस पर्व को वास्तविक नीतिगत प्रतिबद्धताओं से जोड़ने का अवसर अभी भी काफी हद तक अनुपयोगी रह जाता है।
RashtraPress
17 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवान विश्वकर्मा जयंती कब और क्यों मनाई जाती है?
भगवान विश्वकर्मा जयंती हर वर्ष 17 सितंबर को मनाई जाती है। भगवान विश्वकर्मा को हिंदू धर्म में देवताओं के शिल्पकार, वास्तुकार और तकनीकी कौशल के अधिष्ठाता माना जाता है, इसलिए यह पर्व विशेष रूप से कारीगरों, शिल्पकारों और औद्योगिक श्रमिकों के लिए महत्वपूर्ण है।
2026 की विश्वकर्मा जयंती पर किन मुख्यमंत्रियों ने शुभकामनाएं दीं?
17 सितंबर 2026 को उत्तर प्रदेश के योगी आदित्यनाथ, मध्य प्रदेश के डॉ. मोहन यादव, बिहार के सम्राट चौधरी, उत्तराखंड के पुष्कर सिंह धामी, राजस्थान के भजनलाल शर्मा, दिल्ली की रेखा गुप्ता, हरियाणा के नायब सैनी और हिमाचल प्रदेश के सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शुभकामनाएं दीं।
योगी आदित्यनाथ ने विश्वकर्मा जयंती पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि 'देवशिल्पी' की कृपा से शिल्पकारों, अभियंता बंधुओं एवं श्रमिकों के जीवन में उन्नति व समृद्धि आए और 'नया भारत' प्रगति के नए शिखरों को प्राप्त करे।
क्या विपक्षी दलों के मुख्यमंत्रियों ने भी विश्वकर्मा जयंती पर बधाई दी?
हाँ, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, जो कांग्रेस से हैं, ने भी इस अवसर पर शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि 'हर हुनर को पहचान, हर हाथ को सम्मान और हर सृजन को नई ऊंचाई मिले।'
विश्वकर्मा जयंती का श्रमिकों और कारीगरों के लिए क्या महत्व है?
यह पर्व कारखानों, उद्योगों, इंजीनियरिंग संस्थानों और निर्माण क्षेत्र से जुड़े लाखों लोगों के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन श्रमिक और शिल्पकार अपने औज़ारों की पूजा करते हैं और देश के औद्योगिक विकास में अपने योगदान को उत्सव के रूप में मनाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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