26 अक्टूबर 2026
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ब्रिक्स संसदीय मंच में वोलोदिन की चेतावनी: AI मानवता पर हावी न हो, अभी से सतर्क रहना ज़रूरी

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ब्रिक्स संसदीय मंच में वोलोदिन की चेतावनी: AI मानवता पर हावी न हो, अभी से सतर्क रहना ज़रूरी

सारांश

नई दिल्ली में 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच में रूसी ड्यूमा अध्यक्ष वोलोदिन ने साफ कहा — AI को इंसान पर हावी होने से रोकना होगा। उन्होंने ब्रिक्स के भीतर AI विशेषज्ञ परिषद का प्रस्ताव रखा और PM मोदी से मिलकर पुतिन की शुभकामनाएँ दीं।

मुख्य बातें

रूसी स्टेट ड्यूमा अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोदिन ने 26 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच को संबोधित किया।
वोलोदिन ने चेतावनी दी कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को मानवता पर नियंत्रण न करने देने के लिए अभी से कदम उठाने होंगे।
उन्होंने ब्रिक्स के भीतर AI विशेषज्ञ परिषद गठित करने का प्रस्ताव रखा।
ब्रिक्स देशों का आपसी व्यापार 1.2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँचा; वैश्विक जीडीपी में 40% योगदान।
वोलोदिन ने PM नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर उन्हें राष्ट्रपति पुतिन की शुभकामनाएँ दीं।

रूस की स्टेट ड्यूमा के अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोदिन ने 26 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के पूर्ण सत्र में चेतावनी दी कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को मानवता पर हावी होने से रोकने के लिए अभी से ठोस कदम उठाने होंगे। उन्होंने ब्रिक्स के भीतर AI विशेषज्ञों की एक परिषद गठित करने का प्रस्ताव भी रखा, ताकि विधायी स्तर पर सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा किया जा सके।

मुख्य घटनाक्रम

दो दिवसीय इस मंच में वोलोदिन ने ब्रिक्स देशों की एकता पर ज़ोर देते हुए कहा, 'हम अलग-अलग राजनीतिक प्रणालियों, आर्थिक मॉडलों और परंपराओं वाले देशों का प्रतिनिधित्व करते हैं। लेकिन हम एक बहुध्रुवीय दुनिया बनाने के लिए एकजुट हैं।' उन्होंने आगे कहा कि प्रत्येक राष्ट्र को अपने विकास का संप्रभु मार्ग चुनने का अधिकार है और ब्रिक्स इसी सिद्धांत पर टिका है।

AI के बारे में अपनी चिंता व्यक्त करते हुए वोलोदिन ने कहा, 'आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस न केवल अवसर लाता है, बल्कि चुनौतियाँ भी पेश करता है। हमें ऐसी स्थितियों से बचना चाहिए जहाँ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मानवता को नियंत्रित करने लगे — यह एक ऐसा खतरा है जिसे हमें पहले ही रोक देना चाहिए।'

ब्रिक्स की आर्थिक ताकत और संसदीय भूमिका

वोलोदिन ने बताया कि अपने 20 वर्षों के अस्तित्व में ब्रिक्स उभरती बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का एक प्रमुख स्तंभ बन चुका है। संगठन के भीतर आपसी व्यापार 1.2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँच गया है और सदस्य देश वैश्विक निर्यात का लगभग एक चौथाई हिस्सा हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि ब्रिक्स वैश्विक जीडीपी में लगभग 40 प्रतिशत का योगदान देता है। ड्यूमा अध्यक्ष ने संसदीय स्तर पर इस समूह की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए हर अवसर के उपयोग पर बल दिया।

PM मोदी से मुलाकात और पुतिन का संदेश

मंच के उद्घाटन के दौरान वोलोदिन ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और उन्हें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की ओर से हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब भारत-रूस संबंधों को 'विशेष रणनीतिक साझेदारी' का दर्जा प्राप्त है।

वोलोदिन रविवार, 25 अक्टूबर को भारत यात्रा पर पहुँचे और नई दिल्ली में अपने विदेशी समकक्षों के साथ द्विपक्षीय चर्चाएँ कीं। रूसी विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारतीय संसद के सदस्यों के साथ भी बैठकें और बातचीत तय की गई हैं।

भारत-रूस संसदीय संबंधों पर जोर

रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा, 'रूस और भारत के बीच संबंध एक विशेष रणनीतिक साझेदारी हैं, जो दोस्ती, भरोसे और आपसी लाभ वाले सहयोग की परंपराओं पर आधारित हैं।' मंत्रालय ने संसदीय सहयोग के जरिए इन संबंधों को और मजबूत करने की जरूरत पर भी बल दिया।

गौरतलब है कि यह मंच ऐसे समय में हो रहा है जब ब्रिक्स का विस्तार हो चुका है और वैश्विक भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। आने वाले दिनों में मंच के निष्कर्ष और घोषणापत्र वैश्विक AI विनियमन बहस को नई दिशा दे सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ब्रिक्स — जो स्वयं विषम राजनीतिक प्रणालियों का समूह है — AI विनियमन पर कोई बाध्यकारी ढाँचा बना पाएगा। पश्चिमी देशों की तुलना में ब्रिक्स के भीतर AI नीति पर सहमति की राह टेढ़ी है, क्योंकि कुछ सदस्य देश ही AI के बड़े उपभोक्ता और उत्पादक दोनों हैं। यह संसदीय मंच एक विचार-मंथन मंच से अधिक नहीं है — जब तक इसके प्रस्ताव नीतिगत प्रतिबद्धताओं में नहीं बदलते, ये घोषणाएँ ऊँची उड़ान वाले भाषणों की श्रेणी में रहेंगी।
RashtraPress
26 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

12वाँ ब्रिक्स संसदीय मंच क्या है और यह कहाँ आयोजित हुआ?
यह ब्रिक्स सदस्य देशों की संसदों के बीच विचार-विमर्श का वार्षिक मंच है, जो 26 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में शुरू हुआ। इस दो दिवसीय आयोजन में जन केंद्रित विकास, AI विनियमन और संसदीय सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
वोलोदिन ने AI को लेकर क्या चेतावनी दी?
वोलोदिन ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अवसरों के साथ-साथ गंभीर चुनौतियाँ भी लाता है। उन्होंने जोर दिया कि ऐसी स्थिति से बचना होगा जहाँ AI मानवता को नियंत्रित करने लगे और इसके लिए पहले से कदम उठाने होंगे।
वोलोदिन ने ब्रिक्स के भीतर AI परिषद का प्रस्ताव क्यों रखा?
उनका उद्देश्य ब्रिक्स देशों के बीच AI के विधायी नियमन की सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करना है। उनके अनुसार, एक विशेषज्ञ परिषद के जरिए संसदीय स्तर पर सामूहिक नीति निर्माण अधिक प्रभावी हो सकता है।
ब्रिक्स की आर्थिक स्थिति कितनी मजबूत है?
वोलोदिन के अनुसार ब्रिक्स देशों का आपसी व्यापार 1.2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँच गया है। सदस्य देश वैश्विक निर्यात का लगभग एक चौथाई हिस्सा हैं और वैश्विक जीडीपी में लगभग 40 प्रतिशत योगदान करते हैं।
वोलोदिन की PM मोदी से मुलाकात का क्या महत्व है?
वोलोदिन ने मंच के उद्घाटन के दौरान PM मोदी से मिलकर राष्ट्रपति पुतिन की शुभकामनाएँ दीं, जो भारत-रूस विशेष रणनीतिक साझेदारी की निरंतरता को दर्शाता है। यह मुलाकात संसदीय और कूटनीतिक दोनों स्तरों पर द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के प्रयास का हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
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