मेघालय डीजीपी नियुक्ति: वीपीपी ने यूपीएससी प्रस्ताव में देरी पर एनपीपी सरकार से माँगा जवाब
सारांश
मुख्य बातें
विपक्षी दल वॉइस ऑफ द पीपुल्स पार्टी (वीपीपी) ने 15 अक्टूबर 2026 को मेघालय की राष्ट्रीय जन पार्टी (एनपीपी) के नेतृत्व वाली सरकार से यह स्पष्ट करने की माँग की कि राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति के लिए संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को प्रस्ताव भेजने में कथित तौर पर देरी क्यों हुई। पार्टी ने सरकार से पत्राचार का पूरा विवरण और उठाए गए कदमों की जानकारी भी माँगी।
मुख्य घटनाक्रम
वीपीपी के प्रवक्ता ए.डब्ल्यू. रानी ने कहा कि यूपीएससी ने सितंबर 2026 में राज्य सरकार को पत्र लिखकर सूचित किया था कि डीजीपी नियुक्ति का प्रस्ताव अभी भी प्रतीक्षित है। आयोग ने पुलिस प्रमुखों के चयन के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन करने का भी आह्वान किया था।
रानी ने प्रश्न उठाया कि यूपीएससी के बार-बार संपर्क किए जाने के बावजूद मेघालय सरकार आवश्यक औपचारिकताएँ पूरी करने में कथित तौर पर क्यों विफल रही। उन्होंने इसे 'मूलभूत प्रशासनिक प्रश्न' बताया।
वर्तमान डीजीपी की स्थिति
मेघालय की वर्तमान डीजीपी इदाशिशा नोंगरांग को 20 मई 2024 से 19 मई 2026 तक दो वर्षीय कार्यकाल के लिए नियुक्त किया गया था। केंद्र सरकार ने बाद में उनकी सेवा अवधि में छह महीने का विस्तार स्वीकृत किया, जिसके तहत वे 19 नवंबर 2026 तक पद पर बनी रह सकती हैं।
विस्तारित कार्यकाल की समाप्ति निकट आने के साथ ही वीपीपी ने यह जानना चाहा है कि समय पर उत्तराधिकार सुनिश्चित करने और पुलिस नेतृत्व में संभावित शून्यता टालने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
नियुक्ति प्रक्रिया क्या है
नियमित डीजीपी के चयन की प्रक्रिया के तहत राज्य सरकार यूपीएससी को योग्य अधिकारियों का पैनल तैयार करने हेतु प्रस्ताव भेजती है। सर्वोच्च न्यायालय ने इस प्रक्रिया का पालन अनिवार्य किया है ताकि पुलिस प्रमुख की नियुक्ति में पारदर्शिता और संस्थागत निष्पक्षता बनी रहे।
गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब पूरे देश में पुलिस सुधारों और स्वायत्त नियुक्ति प्रक्रियाओं पर बहस जारी है। मेघालय का यह मामला राज्यों में उच्च पुलिस पदों की नियुक्ति में कार्यपालिका की भूमिका और संवैधानिक संस्थाओं के निर्देशों का पालन न करने की व्यापक प्रवृत्ति को रेखांकित करता है।
वीपीपी की माँगें
वीपीपी ने सरकार से निम्नलिखित स्पष्टीकरण माँगे हैं: राज्य सरकार और यूपीएससी के बीच हुए पत्राचार का पूरा विवरण; प्रस्ताव तैयार करने और प्रस्तुत करने के लिए उठाए गए ठोस कदम; और कथित देरी के कारण।
हालाँकि, यह उल्लेखनीय है कि वीपीपी द्वारा लगाए गए देरी के आरोप और आयोग के पत्राचार का विवरण अभी तक स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हो सका है।
आगे क्या होगा
19 नवंबर 2026 को डीजीपी नोंगरांग का विस्तारित कार्यकाल समाप्त होने वाला है। यदि तब तक नई नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तो राज्य के पुलिस नेतृत्व में प्रशासनिक अनिश्चितता की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। मेघालय सरकार ने अभी तक वीपीपी की माँगों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।