16 अक्टूबर 2026
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मेघालय डीजीपी नियुक्ति: वीपीपी ने यूपीएससी प्रस्ताव में देरी पर एनपीपी सरकार से माँगा जवाब

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मेघालय डीजीपी नियुक्ति: वीपीपी ने यूपीएससी प्रस्ताव में देरी पर एनपीपी सरकार से माँगा जवाब

सारांश

मेघालय में डीजीपी की नियुक्ति अधर में है — वर्तमान प्रमुख का विस्तारित कार्यकाल 19 नवंबर 2026 को समाप्त होगा, और विपक्षी वीपीपी का आरोप है कि सरकार ने यूपीएससी को अनिवार्य प्रस्ताव भेजने में देरी की है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों की अनदेखी का यह मामला राज्य के पुलिस नेतृत्व पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

मुख्य बातें

वीपीपी ने 15 अक्टूबर 2026 को मेघालय की एनपीपी सरकार से डीजीपी नियुक्ति प्रस्ताव में कथित देरी पर स्पष्टीकरण माँगा।
यूपीएससी ने सितंबर 2026 में राज्य सरकार को पत्र लिखकर बताया था कि प्रस्ताव अभी भी प्रतीक्षित है।
वर्तमान डीजीपी इदाशिशा नोंगरांग का विस्तारित कार्यकाल 19 नवंबर 2026 को समाप्त होगा।
सर्वोच्च न्यायालय ने पुलिस प्रमुखों की नियुक्ति में यूपीएससी पैनल प्रक्रिया का पालन अनिवार्य किया है।
वीपीपी के देरी संबंधी आरोप अभी तक स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं।

विपक्षी दल वॉइस ऑफ द पीपुल्स पार्टी (वीपीपी) ने 15 अक्टूबर 2026 को मेघालय की राष्ट्रीय जन पार्टी (एनपीपी) के नेतृत्व वाली सरकार से यह स्पष्ट करने की माँग की कि राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति के लिए संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को प्रस्ताव भेजने में कथित तौर पर देरी क्यों हुई। पार्टी ने सरकार से पत्राचार का पूरा विवरण और उठाए गए कदमों की जानकारी भी माँगी।

मुख्य घटनाक्रम

वीपीपी के प्रवक्ता ए.डब्ल्यू. रानी ने कहा कि यूपीएससी ने सितंबर 2026 में राज्य सरकार को पत्र लिखकर सूचित किया था कि डीजीपी नियुक्ति का प्रस्ताव अभी भी प्रतीक्षित है। आयोग ने पुलिस प्रमुखों के चयन के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन करने का भी आह्वान किया था।

रानी ने प्रश्न उठाया कि यूपीएससी के बार-बार संपर्क किए जाने के बावजूद मेघालय सरकार आवश्यक औपचारिकताएँ पूरी करने में कथित तौर पर क्यों विफल रही। उन्होंने इसे 'मूलभूत प्रशासनिक प्रश्न' बताया।

वर्तमान डीजीपी की स्थिति

मेघालय की वर्तमान डीजीपी इदाशिशा नोंगरांग को 20 मई 2024 से 19 मई 2026 तक दो वर्षीय कार्यकाल के लिए नियुक्त किया गया था। केंद्र सरकार ने बाद में उनकी सेवा अवधि में छह महीने का विस्तार स्वीकृत किया, जिसके तहत वे 19 नवंबर 2026 तक पद पर बनी रह सकती हैं।

विस्तारित कार्यकाल की समाप्ति निकट आने के साथ ही वीपीपी ने यह जानना चाहा है कि समय पर उत्तराधिकार सुनिश्चित करने और पुलिस नेतृत्व में संभावित शून्यता टालने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।

नियुक्ति प्रक्रिया क्या है

नियमित डीजीपी के चयन की प्रक्रिया के तहत राज्य सरकार यूपीएससी को योग्य अधिकारियों का पैनल तैयार करने हेतु प्रस्ताव भेजती है। सर्वोच्च न्यायालय ने इस प्रक्रिया का पालन अनिवार्य किया है ताकि पुलिस प्रमुख की नियुक्ति में पारदर्शिता और संस्थागत निष्पक्षता बनी रहे।

गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब पूरे देश में पुलिस सुधारों और स्वायत्त नियुक्ति प्रक्रियाओं पर बहस जारी है। मेघालय का यह मामला राज्यों में उच्च पुलिस पदों की नियुक्ति में कार्यपालिका की भूमिका और संवैधानिक संस्थाओं के निर्देशों का पालन न करने की व्यापक प्रवृत्ति को रेखांकित करता है।

वीपीपी की माँगें

वीपीपी ने सरकार से निम्नलिखित स्पष्टीकरण माँगे हैं: राज्य सरकार और यूपीएससी के बीच हुए पत्राचार का पूरा विवरण; प्रस्ताव तैयार करने और प्रस्तुत करने के लिए उठाए गए ठोस कदम; और कथित देरी के कारण।

हालाँकि, यह उल्लेखनीय है कि वीपीपी द्वारा लगाए गए देरी के आरोप और आयोग के पत्राचार का विवरण अभी तक स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हो सका है।

आगे क्या होगा

19 नवंबर 2026 को डीजीपी नोंगरांग का विस्तारित कार्यकाल समाप्त होने वाला है। यदि तब तक नई नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तो राज्य के पुलिस नेतृत्व में प्रशासनिक अनिश्चितता की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। मेघालय सरकार ने अभी तक वीपीपी की माँगों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

संस्थागत जवाबदेही की गंभीर कमी को दर्शाता है। विपक्ष की माँग तथ्यपरक है, लेकिन असली परीक्षण यह होगा कि क्या सरकार 19 नवंबर की समय सीमा से पहले पारदर्शी प्रक्रिया पूरी करती है, या फिर एक और अस्थायी व्यवस्था की ओर बढ़ती है जो न्यायिक आदेशों की भावना को कमज़ोर करे।
RashtraPress
16 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मेघालय डीजीपी नियुक्ति विवाद क्या है?
विपक्षी वीपीपी का आरोप है कि मेघालय की एनपीपी सरकार ने यूपीएससी को डीजीपी नियुक्ति का अनिवार्य प्रस्ताव भेजने में देरी की है, जबकि यूपीएससी ने सितंबर 2026 में इस बारे में राज्य सरकार को पत्र भी लिखा था। यह मामला सर्वोच्च न्यायालय के उन निर्देशों के पालन से जुड़ा है जो पुलिस प्रमुखों की नियुक्ति में यूपीएससी की भूमिका सुनिश्चित करते हैं।
डीजीपी इदाशिशा नोंगरांग का कार्यकाल कब समाप्त होगा?
डीजीपी इदाशिशा नोंगरांग का मूल दो वर्षीय कार्यकाल 19 मई 2026 को समाप्त हो गया था। केंद्र सरकार द्वारा छह महीने का विस्तार मिलने के बाद वे 19 नवंबर 2026 तक पद पर बनी रह सकती हैं।
यूपीएससी डीजीपी नियुक्ति में क्या भूमिका निभाता है?
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार राज्य सरकार को यूपीएससी को योग्य अधिकारियों का पैनल तैयार करने के लिए प्रस्ताव भेजना अनिवार्य है। यूपीएससी उस पैनल की समीक्षा करता है और इससे नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता व संस्थागत निष्पक्षता सुनिश्चित होती है।
वीपीपी ने सरकार से कौन-सी जानकारी माँगी है?
वीपीपी ने राज्य सरकार और यूपीएससी के बीच हुए पत्राचार का पूरा विवरण, प्रस्ताव तैयार करने के लिए उठाए गए कदम और कथित देरी के कारण स्पष्ट करने की माँग की है।
क्या वीपीपी के आरोप सत्यापित हैं?
अभी तक वीपीपी द्वारा लगाए गए देरी के आरोप और यूपीएससी के पत्राचार का विवरण स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुआ है। मेघालय सरकार ने भी अभी तक इन आरोपों पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
राष्ट्र प्रेस
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