झारखंड DGP नियुक्ति विवाद: केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की, राज्य पर नियम उल्लंघन का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 7 अक्टूबर 2026 को सर्वोच्च न्यायालय में अर्जी दाखिल कर आरोप लगाया कि झारखंड सरकार ने पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति के लिए 2025 में बनाए गए नियमों में शीर्ष अदालत के ऐतिहासिक 'प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ' मामले के निर्देशों की अनदेखी की। केंद्र ने इन नियमों के तहत की गई नियुक्तियों को गैर-कानूनी घोषित करने की माँग की है और मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।
मुख्य घटनाक्रम
केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने यह मामला उठाया। अर्जी में माँग की गई है कि झारखंड को सर्वोच्च न्यायालय के पुराने निर्देशों के अनुसार DGP नियुक्ति की प्रक्रिया अपनाने का आदेश दिया जाए।
केंद्र के अनुसार, झारखंड सरकार ने 8 जनवरी 2025 को 'झारखंड के पुलिस महानिदेशक और पुलिस महानिरीक्षक (पुलिस बल के प्रमुख) के चयन और नियुक्ति नियम, 2025' अधिसूचित किए थे। केंद्र का आरोप है कि इन नियमों में सर्वोच्च न्यायालय के 22 सितंबर 2006, 3 जुलाई 2018, 16 जनवरी 2019 और 13 मार्च 2019 के निर्देशों का पालन नहीं किया गया।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश क्या कहते हैं
3 जुलाई 2018 के सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के अनुसार, राज्य सरकारों को मौजूदा DGP की सेवानिवृत्ति से कम से कम तीन महीने पहले संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को अधिकारियों के नाम भेजने होते हैं। UPSC उस पैनल को तैयार करता है और राज्य सरकार को उसी पैनल से DGP नियुक्त करना अनिवार्य है।
केंद्र का यह भी आरोप है कि झारखंड ने 2025 के नियम बनाने से पहले सर्वोच्च न्यायालय की अनुमति तक नहीं ली — जो प्रक्रियागत दृष्टि से आवश्यक था।
विवादित नियुक्तियों का विवरण
2 फरवरी 2025 को IPS अधिकारी अनुराग गुप्ता को दो वर्ष के लिए झारखंड का DGP नियुक्त किया गया। केंद्र की अर्जी के अनुसार, नियुक्ति के समय गुप्ता की सेवा में मात्र करीब तीन महीने बचे थे और उनकी सेवानिवृत्ति 30 अप्रैल 2025 को निर्धारित थी।
गृह मंत्रालय ने 22 अप्रैल, 3 मई और 23 मई 2025 को पत्र भेजकर इस नियुक्ति पर आपत्ति जताई। अंततः झारखंड सरकार ने 6 नवंबर 2025 को गुप्ता की स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के अनुरोध को मंजूरी दी।
इसके बाद 29 दिसंबर 2025 को झारखंड सरकार ने 2025 की नियमावली में संशोधन कर DGP नियुक्ति के लिए छह महीने की न्यूनतम बची सेवा की अनिवार्य शर्त हटा दी। अगले ही दिन 30 दिसंबर 2025 को तदाशा मिश्रा को DGP नियुक्त किया गया — जबकि वे 31 दिसंबर 2025 को ही सेवानिवृत्त होने वाली थीं। इस नियुक्ति पर भी केंद्र ने आपत्ति जताई।
सरकार की प्रतिक्रिया और पूर्व कार्रवाई
जनवरी 2026 में गृह मंत्रालय ने झारखंड सरकार को पत्र भेजकर 2025 की नियमावली और मिश्रा की नियुक्ति रद्द करने तथा सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार DGP नियुक्ति की प्रक्रिया नए सिरे से शुरू करने को कहा।
गौरतलब है कि मई 2026 में सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए झारखंड से अनुपालन हलफनामा माँगा था और यह भी पूछा था कि DGP नियुक्ति का प्रस्ताव UPSC को क्यों नहीं भेजा गया। अब उसी मामले में केंद्र ने नई अर्जी दाखिल कर 2025 की नियमावली और उसके तहत की गई नियुक्तियों को सीधे चुनौती दी है।
क्या होगा आगे
मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर 2026 को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ के समक्ष होगी। यदि सर्वोच्च न्यायालय केंद्र की माँग स्वीकार करता है, तो झारखंड को UPSC के माध्यम से DGP नियुक्ति की पूरी प्रक्रिया नए सिरे से शुरू करनी होगी — जो राज्य में पुलिस प्रशासन पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।