सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड की डीजीपी नियुक्ति नियमावली को प्रकाश सिंह फैसले के विपरीत माना, डीजीपी तदाशा मिश्रा को नोटिस
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 8 अक्टूबर 2026 को झारखंड की पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) नियुक्ति नियमावली के एक प्रमुख प्रावधान को प्रथम दृष्टया 'प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ' मामले में तय कानून के सीधे विपरीत करार दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि यह नियमावली रद्द की जाती है, तो वर्तमान डीजीपी तदाशा मिश्रा की नियुक्ति भी स्वतः निरस्त हो सकती है। न्यायालय ने तदाशा मिश्रा को अपना पक्ष रखने का अवसर देते हुए उन्हें नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है।
मामले की पृष्ठभूमि
केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर कर झारखंड की 'डीजीपी और पुलिस महानिरीक्षक (पुलिस बल के प्रमुख) के चयन एवं नियुक्ति विनियमन, 2025' की वैधता को चुनौती दी है। यह नियमावली 8 जनवरी 2025 को अधिसूचित की गई थी। केंद्र का आरोप है कि इसे सर्वोच्च न्यायालय की अनुमति के बिना बनाया गया और इसमें प्रकाश सिंह मामले में दिए गए निर्देशों का पूर्ण रूप से पालन नहीं किया गया।
मुख्य न्यायिक घटनाक्रम
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने गुरुवार को सुनवाई की। झारखंड सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सवाल उठाया कि जब अन्य राज्यों में भी इसी प्रकार के प्रावधान हैं, तो केंद्र केवल झारखंड की नियमावली को ही क्यों चुनौती दे रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों में तो इससे भी अधिक गंभीर प्रावधान मौजूद हैं।
इस पर केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने स्पष्ट किया कि केंद्र किसी एक राज्य को लक्षित नहीं कर रहा। उन्होंने कहा कि यदि अन्य राज्यों में भी ऐसी नियमावलियाँ हैं, तो उन्हें भी हटाया जाना चाहिए।
विवादित नियुक्तियों का विवरण
केंद्र ने झारखंड के पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता की नियुक्ति पर भी आपत्ति जताई है। अनुराग गुप्ता को 2 फरवरी 2025 को डीजीपी नियुक्त किया गया था, जबकि उस समय उनकी सेवा में लगभग तीन महीने शेष थे और वे 30 अप्रैल 2025 को सेवानिवृत्त होने वाले थे।
तदाशा मिश्रा को 30 दिसंबर 2025 को डीजीपी नियुक्त किया गया, जबकि उनकी निर्धारित सेवानिवृत्ति 31 दिसंबर 2025 को थी। उल्लेखनीय है कि नियुक्ति से ठीक एक दिन पहले — 29 दिसंबर 2025 को — राज्य सरकार ने नियम में संशोधन कर डीजीपी नियुक्ति के लिए छह महीने की न्यूनतम शेष सेवा की अनिवार्य शर्त हटा दी थी। केंद्र ने इसी नियुक्ति को प्रकाश सिंह मामले के निर्देशों के विपरीत बताते हुए न्यायालय में चुनौती दी है।
अदालत का रुख और राज्य को राहत
सर्वोच्च न्यायालय ने झारखंड सरकार को संबंधित नियमावली पर पुनर्विचार की छूट दी है। राज्य सरकार चाहे तो अपना जवाब दाखिल कर सकती है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद के लिए निर्धारित की है, जिसमें तदाशा मिश्रा अपना पक्ष रख सकेंगी और झारखंड सरकार संबंधित नियम पर जवाब दाखिल कर सकेगी।
आगे क्या होगा
यह मामला देशभर में डीजीपी नियुक्ति की प्रक्रिया पर दूरगामी असर डाल सकता है। प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने पहले ही पुलिस सुधारों के लिए बाध्यकारी दिशा-निर्देश जारी किए थे, जिनका पालन अनेक राज्यों में अब भी अधूरा है। यह सुनवाई ऐसे समय में आई है जब राज्यों और केंद्र के बीच पुलिस नियुक्तियों पर तनाव बढ़ता जा रहा है। अगली तारीख पर न्यायालय का रुख तय करेगा कि झारखंड की नियमावली और वर्तमान डीजीपी की नियुक्ति का भविष्य क्या होगा।