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झारखंड हाईकोर्ट का डीजीपी तदाशा मिश्रा को अवमानना नोटिस, थानों में CCTV न लगाना पड़ा भारी

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झारखंड हाईकोर्ट का डीजीपी तदाशा मिश्रा को अवमानना नोटिस, थानों में CCTV न लगाना पड़ा भारी

सारांश

झारखंड हाईकोर्ट ने डीजीपी तदाशा मिश्रा को सीधे अवमानना नोटिस थमाया — थानों में CCTV लगाने के बार-बार के आदेशों की अनदेखी अब न्यायिक धैर्य की सीमा पार कर चुकी है। 24 सितंबर को जवाब न आया तो कार्रवाई तय है।

मुख्य बातें

झारखंड हाईकोर्ट ने 1 सितंबर 2026 को डीजीपी तदाशा मिश्रा को अवमानना कारण बताओ नोटिस जारी किया।
मुख्य न्यायाधीश एम.एस.
सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने कहा — प्रथम दृष्टया अधिकारियों की रुचि CCTV न लगाने में है।
18 जून 2026 के आदेश सहित कई पूर्व निर्देशों के बावजूद किसी भी थाने में CCTV नहीं लगाया गया।
सरकार के टेंडर जारी करने और रद्द करने के कारण अदालत ने असंतोषजनक माने।
मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर 2026 को; जवाब संतोषजनक न रहा तो औपचारिक अवमानना कार्यवाही संभव।

झारखंड हाईकोर्ट ने 1 सितंबर 2026 को राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तदाशा मिश्रा को कारण बताओ नोटिस जारी किया है — यह पूछते हुए कि उनके विरुद्ध अदालती आदेश की अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए। अदालत की नाराज़गी की वजह है राज्य के सभी पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के बार-बार दिए गए निर्देशों का अब तक पालन न होना। मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि पुलिस अधिकारियों की रुचि यह सुनिश्चित करने में है कि थानों में कैमरे न लगें।

मुख्य घटनाक्रम

खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि 18 जून 2026 के आदेश और उससे पहले विभिन्न पीठों द्वारा दिए गए निर्देशों के बावजूद किसी भी पुलिस थाने में सीसीटीवी लगाने की दिशा में प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। अदालत ने कहा कि 18 जून को ही डीजीपी के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी करने पर विचार किया गया था, लेकिन उस समय राज्य सरकार को एक और अवसर देते हुए अनुपालन का मौका दिया गया था।

गौरतलब है कि यह मामला केवल तकनीकी चूक का नहीं, बल्कि न्यायिक आदेशों की सुनियोजित अनदेखी का है — जो न्यायपालिका की नज़र में गंभीर संवैधानिक प्रश्न खड़े करता है।

सरकार के दिए गए कारण और अदालत की प्रतिक्रिया

राज्य सरकार की ओर से पहले टेंडर जारी करने और बाद में उसे रद्द करने समेत कई स्पष्टीकरण दिए जाते रहे हैं। खंडपीठ ने इन कारणों को प्रथम दृष्टया असंतोषजनक करार दिया। अदालत ने कहा कि बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद अनुपालन न होना गंभीर विषय है और इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।

मुख्य सचिव और गृह सचिव को भी निर्देश

इससे पहले अदालत ने मुख्य सचिव और गृह सचिव को भी निर्देश दिया था कि वे डीजीपी को आदेश की गंभीरता से अवगत कराएँ और अनुपालन सुनिश्चित करें। इसके बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं आया, जिसे अदालत ने अत्यंत गंभीरता से लिया है।

यह ऐसे समय में आया है जब पुलिस हिरासत में पारदर्शिता और मानवाधिकार सुरक्षा को लेकर देशभर में बहस तेज़ है। सर्वोच्च न्यायालय भी अपने पूर्व के निर्देशों में थानों में सीसीटीवी को अनिवार्य बता चुका है।

आगे क्या होगा

मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर 2026 को निर्धारित है, जब डीजीपी तदाशा मिश्रा को अपना जवाब दाखिल करना होगा। यदि अदालत उनके जवाब से संतुष्ट नहीं हुई, तो औपचारिक अवमानना कार्यवाही शुरू की जा सकती है — जो झारखंड पुलिस प्रशासन के लिए एक बड़ा संकट बन सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे सर्वोच्च न्यायालय भी अनिवार्य बता चुका है। झारखंड में टेंडर जारी करके रद्द करने का चक्र यह संकेत देता है कि प्रतिरोध आकस्मिक नहीं, संस्थागत है। हाईकोर्ट का यह कदम देर से आया है, लेकिन सही दिशा में है — असली परीक्षा 24 सितंबर के बाद होगी जब देखना होगा कि क्या अवमानना की औपचारिक कार्यवाही वास्तव में अनुपालन करवा पाती है या फिर नई तारीखों का सिलसिला शुरू होता है।
RashtraPress
18 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड हाईकोर्ट ने डीजीपी को नोटिस क्यों जारी किया?
अदालत ने राज्य के सभी पुलिस थानों में CCTV कैमरे लगाने के बार-बार दिए गए आदेशों का पालन न होने पर डीजीपी तदाशा मिश्रा को अवमानना कारण बताओ नोटिस जारी किया। 18 जून 2026 के आदेश सहित कई पूर्व निर्देशों के बावजूद किसी भी थाने में CCTV नहीं लगा।
इस मामले में अगली सुनवाई कब होगी?
मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर 2026 को निर्धारित है, जब डीजीपी तदाशा मिश्रा को अपना जवाब दाखिल करना होगा। यदि जवाब संतोषजनक नहीं रहा तो औपचारिक अवमानना कार्यवाही शुरू हो सकती है।
राज्य सरकार ने CCTV न लगाने के क्या कारण बताए?
राज्य सरकार की ओर से पहले टेंडर जारी करने और बाद में उसे रद्द करने समेत कई स्पष्टीकरण दिए गए। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इन कारणों को प्रथम दृष्टया असंतोषजनक करार दिया।
इस मामले में मुख्य सचिव और गृह सचिव की क्या भूमिका है?
अदालत ने पहले मुख्य सचिव और गृह सचिव को निर्देश दिया था कि वे डीजीपी को आदेश की गंभीरता से अवगत कराएँ और अनुपालन सुनिश्चित करें। इसके बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं आया, जिसे अदालत ने गंभीरता से लिया है।
थानों में CCTV लगाना क्यों ज़रूरी माना जाता है?
थानों में CCTV कैमरे पुलिस हिरासत में पारदर्शिता और मानवाधिकार सुरक्षा के लिए अनिवार्य माने जाते हैं। सर्वोच्च न्यायालय भी अपने पूर्व के निर्देशों में इसे अनिवार्य बता चुका है, और झारखंड हाईकोर्ट उसी के अनुपालन की निगरानी कर रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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