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झारखंड डीजीपी नियुक्ति विवाद: सुप्रीम कोर्ट में 2 सितंबर की सुनवाई टली, अगली तारीख 7 सितंबर

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झारखंड डीजीपी नियुक्ति विवाद: सुप्रीम कोर्ट में 2 सितंबर की सुनवाई टली, अगली तारीख 7 सितंबर

सारांश

झारखंड डीजीपी नियुक्ति विवाद में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई एक बार फिर आगे नहीं बढ़ सकी — इस बार एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट सरकार को न मिलने के कारण। 7 सितंबर की तारीख तय हुई है, लेकिन असली सवाल यह है कि राज्य सरकार की विवादित नियमावली सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों की कसौटी पर खरी उतरेगी या नहीं।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय में 2 सितंबर 2025 को झारखंड डीजीपी नियुक्ति मामले की सुनवाई स्थगित हुई।
झारखंड सरकार के वकील कपिल सिब्बल को एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट नहीं मिली थी, इसलिए पक्ष रखने में असमर्थता जताई।
न्यायालय ने रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया; अगली सुनवाई 7 सितंबर को।
18 अगस्त की पिछली सुनवाई में नियुक्ति से जुड़े दस्तावेज एमिकस क्यूरी को सौंपे गए थे।
विवाद 'डीजीपी का चयन एवं नियुक्ति नियमावली, 2024' की वैधता और प्रकाश सिंह बनाम केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों से जुड़ा है।
BJP नेता बाबूलाल मरांडी की अवमानना याचिका पहले ही खारिज हो चुकी है; नियमावली की वैधता वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित है।

सर्वोच्च न्यायालय में 2 सितंबर 2025 को झारखंड डीजीपी नियुक्ति विवाद से जुड़ी याचिका पर सुनवाई आगे नहीं बढ़ सकी, क्योंकि झारखंड सरकार को न्यायालय द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट अभी तक उपलब्ध नहीं कराई गई थी। अदालत ने अब इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 7 सितंबर की तारीख निर्धारित की है।

सुनवाई क्यों टली

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहनन की पीठ के समक्ष सुनवाई प्रारंभ होते ही झारखंड सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने न्यायालय को अवगत कराया कि उन्हें एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। सिब्बल ने स्पष्ट किया कि रिपोर्ट देखे बिना वे सरकार का पक्ष प्रभावी ढंग से नहीं रख सकते।

उन्होंने न्यायालय से अनुरोध किया कि एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट सरकार को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया जाए। पीठ ने यह अनुरोध स्वीकार करते हुए रिपोर्ट सुलभ कराने का आदेश दिया और मामले की सुनवाई 7 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दी।

पिछली सुनवाई में क्या हुआ था

18 अगस्त को हुई पिछली सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय ने डीजीपी नियुक्ति से संबंधित आवश्यक दस्तावेज एमिकस क्यूरी को सौंपे थे और उन्हें इस मामले में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था। एमिकस क्यूरी ने अपनी रिपोर्ट न्यायालय को सौंप दी है, परंतु उसकी विषय-वस्तु झारखंड सरकार को अभी तक नहीं बताई गई थी — यही इस स्थगन का मूल कारण बना।

गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय ने इससे पहले राज्य सरकार को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था, जिसमें पूछा गया था कि डीजीपी पद के लिए अधिकारियों के नाम संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को क्यों नहीं भेजे गए।

विवाद की पृष्ठभूमि

झारखंड में डीजीपी नियुक्ति का यह मामला लंबे समय से विवादों में है। यह विवाद मूलतः प्रकाश सिंह बनाम केंद्र सरकार मामले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों से जुड़ा है, जिनमें पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति में UPSC की भूमिका अनिवार्य की गई है।

झारखंड सरकार ने वर्ष 2024 में झारखंड अधिनियम, 1897 की धारा 21 और पुलिस अधिनियम, 1861 की धारा 2 के आधार पर अपनी अलग 'डीजीपी का चयन एवं नियुक्ति नियमावली, 2024' बनाई। याचिकाकर्ता पक्ष का आरोप है कि यह नियमावली सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के विपरीत है।

इसी नियमावली के तहत पहले अनुराग गुप्ता को डीजीपी नियुक्त किया गया था। उनके पद से हटने के बाद तदाशा मिश्रा को भी इसी नियमावली के अंतर्गत डीजीपी नियुक्त किया गया।

बाबूलाल मरांडी की याचिकाएँ और न्यायालय का रुख

भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता और झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस मामले में दो याचिकाएँ दायर की थीं — एक झारखंड उच्च न्यायालय में और दूसरी सर्वोच्च न्यायालय में। उच्च न्यायालय में दायर याचिका में डीजीपी नियुक्ति नियमावली की वैधता को चुनौती दी गई थी, जबकि सर्वोच्च न्यायालय में दायर याचिका में चयन समिति के सदस्यों के विरुद्ध अवमानना कार्रवाई की माँग की गई थी।

सर्वोच्च न्यायालय ने मरांडी की अवमानना याचिका खारिज कर दी। साथ ही नियमावली की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका को उच्च न्यायालय से स्थानांतरित कर सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई के लिए स्वीकार किया। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में पुलिस प्रशासन और राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता दोनों एक साथ चरम पर हैं।

आगे क्या होगा

7 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई में झारखंड सरकार एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट देखने के बाद अपना पक्ष रखेगी। यह सुनवाई इस दृष्टि से महत्वपूर्ण होगी कि न्यायालय राज्य सरकार की नियमावली की वैधता पर क्या रुख अपनाता है और क्या UPSC को नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल करने का आदेश दिया जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि संघीय ढाँचे में सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों की बाध्यकारी प्रकृति का प्रश्न है। झारखंड सरकार ने 2024 में जो अलग नियमावली बनाई, वह प्रकाश सिंह मामले के उन निर्देशों को दरकिनार करने का प्रयास मानी जा रही है जो दो दशक पहले पुलिस सुधार के लिए जारी हुए थे। सुनवाई का बार-बार टलना प्रक्रियागत देरी की उस पुरानी प्रवृत्ति को दर्शाता है जिसमें राज्य सरकारें न्यायिक समीक्षा को लंबित रखकर विवादित नियुक्तियों को यथावत बनाए रखती हैं। असली परीक्षा 7 सितंबर को होगी — जब न्यायालय यह तय करेगा कि UPSC की अनदेखी करके बनाई गई नियमावली संवैधानिक कसौटी पर टिकती है या नहीं।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड डीजीपी नियुक्ति विवाद क्या है?
झारखंड सरकार ने वर्ष 2024 में अपनी अलग 'डीजीपी का चयन एवं नियुक्ति नियमावली, 2024' बनाई, जिसकी वैधता को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि यह नियमावली प्रकाश सिंह बनाम केंद्र सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट के उन दिशा-निर्देशों के विरुद्ध है जिनमें UPSC की भूमिका अनिवार्य की गई है।
2 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई क्यों नहीं हो सकी?
झारखंड सरकार के वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पीठ को बताया कि उन्हें न्यायालय द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। रिपोर्ट देखे बिना सरकार का पक्ष रखना संभव नहीं था, इसलिए सुनवाई 7 सितंबर तक स्थगित कर दी गई।
एमिकस क्यूरी की भूमिका इस मामले में क्या है?
सर्वोच्च न्यायालय ने 18 अगस्त की सुनवाई में डीजीपी नियुक्ति से जुड़े दस्तावेज एमिकस क्यूरी को सौंपे थे और उनसे इस मामले में स्वतंत्र रिपोर्ट तैयार करने को कहा था। एमिकस क्यूरी ने अपनी रिपोर्ट न्यायालय को सौंप दी है, लेकिन उसकी विषय-वस्तु अभी तक झारखंड सरकार को नहीं बताई गई थी।
बाबूलाल मरांडी ने इस मामले में क्या याचिकाएँ दायर की थीं?
BJP नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने दो याचिकाएँ दायर की थीं — एक झारखंड उच्च न्यायालय में नियमावली की वैधता को चुनौती देने के लिए, और दूसरी सुप्रीम कोर्ट में चयन समिति के सदस्यों के विरुद्ध अवमानना कार्रवाई की माँग के लिए। सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना याचिका खारिज कर दी और नियमावली वाली याचिका उच्च न्यायालय से अपने पास स्थानांतरित कर ली।
7 सितंबर की सुनवाई में क्या अपेक्षित है?
7 सितंबर को झारखंड सरकार एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट देखने के बाद अपना पक्ष रखेगी। न्यायालय यह तय कर सकता है कि राज्य सरकार की 2024 की नियमावली प्रकाश सिंह मामले के दिशा-निर्देशों के अनुरूप है या नहीं, और UPSC को नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल करने पर कोई आदेश दिया जाए।
राष्ट्र प्रेस
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