वाजिद खान: कला की नई परिभाषा, जहां हथौड़े और कीलें बनाती हैं अनोखी चित्रकला
सारांश
Key Takeaways
- वाजिद खान का जन्म 10 मार्च 1981 को हुआ।
- उन्होंने कला के लिए हथौड़े और कीलें का उपयोग किया।
- उनकी कला में विविधता है, जैसे आयरन नेल आर्ट और स्कल्पचर।
- उन्होंने कई पुरस्कार जीते हैं, जिनमें गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स शामिल है।
- वाजिद एक परफेक्शनिस्ट हैं और अपने चरित्र में पूरी तरह समाहित हो जाते हैं।
नई दिल्ली, 9 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। आज हम बात कर रहे हैं एक ऐसे अद्वितीय व्यक्तित्व की, जो न केवल एक प्रसिद्ध मूर्तिकार हैं, बल्कि एक आविष्कारक और पेटेंट धारक भी हैं, फिर भी वे भौतिक दुनिया से काफी हद तक अलग-थलग हैं। उनकी चित्रकारी में न तो पेंट, न ब्रश और न ही पेंसिल, बल्कि हथौड़े और कीलें शामिल हैं, और उन्होंने यह साबित कर दिया है कि कला का निर्माण सिर्फ रंगों और ब्रश से नहीं, बल्कि किसी भी सामग्री से किया जा सकता है।
वाजिद खान का जन्म 10 मार्च 1981 को मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के सोनगिरी गांव में हुआ। उन्होंने अपनी कला को कई माध्यमों से प्रदर्शित किया, जिनमें आयरन नेल आर्ट, ऑटोमोबाइल आर्ट और स्कल्पचर शामिल हैं। मंदसौर में अपने घर को छोड़ने के बाद, वाजिद ने पुराने कपड़े बेचकर और भूखे रहकर अपने जीवन की कठिनाईयों का सामना किया, लेकिन इस संघर्ष के दौरान उन्होंने जीवन के कई महत्वपूर्ण पाठ सीखे।
जब वाजिद 5वीं कक्षा में थे, तब उनके परिवार वाले उनके कला के प्रति जुनून से परेशान हो गए। उनके किसान पिता उनसे बहुत नाराज रहते थे, जबकि वाजिद उस समय दुनिया की सबसे छोटी प्रेस बनाने में व्यस्त थे। उन्होंने स्टील और लोहे से एक छोटी आयरन प्रेस बनाई, जिसने सभी को हैरान कर दिया।
जैसे-जैसे वह बड़े हुए, उन्होंने 14 साल की उम्र में पानी में चलने वाला सबसे छोटा जहाज बनाया। इसके बाद, उन्होंने एक कलाकृति के रूप में हेलिकॉप्टर का निर्माण किया। जब इन अनोखी कलाकृतियों की प्रशंसा हुई, तो उनके सपनों को भी उड़ान मिली। हालांकि, मार्गदर्शन की कमी ने उनके आविष्कारों को वह पहचान नहीं दी, जिसके वे हकदार थे।
एक साक्षात्कार में वाजिद ने कहा, "मैं न तो स्केचिंग करता हूँ और न ही मार्किंग। मैं सीधे पोर्ट्रेट बनाता हूँ। जब मैं पोर्ट्रेट बनाता हूँ, तो मैं बोर्ड को फर्श पर रखता हूँ और उस पर हथौड़े से ठोकता हूँ, इसलिए मैं पोर्ट्रेट को देख नहीं पाता। मुझे यह जानने का इंतजार करना पड़ता है कि मैंने क्या बनाया है। अगर आप गलत जगह पर कील ठोकते हैं, तो पूरा पोर्ट्रेट बर्बाद हो जाएगा।"
वाजिद खान की कला केवल कील तक सीमित नहीं है। उन्होंने प्रसिद्ध श्रीलंकाई आर्किटेक्ट जेफ्री बावा का अद्भुत चित्र भी पत्थरों से बनाया है।
वह एक परफेक्शनिस्ट हैं। अपनी कला को पूर्ण न्याय देने के लिए वे उस चरित्र में पूरी तरह समाहित हो जाते हैं। उनका कहना है, "जब मैं उस चरित्र में जाता हूँ तो मैं उसकी जिंदगी जीता हूँ। मुझे कठिन परिश्रम से ज्यादा उस व्यक्ति के जीवन को जीने में आनंद आता है। मैंने विभिन्न क्षेत्रों में इतना कुछ सीख लिया है कि मैं दुनिया की किसी भी सामग्री से कला बना सकता हूँ।"
उन्होंने अपने कार्य के लिए कई पुरस्कार और सम्मान प्राप्त किए हैं, जिसमें गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स, गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स और लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज होना शामिल है।