25 जुलाई 2026
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सोनम वांगचुक का अनशन तोड़ना: इमरान मसूद ने पूछा — मंत्रियों के आने पर ही क्यों माने?

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सोनम वांगचुक का अनशन तोड़ना: इमरान मसूद ने पूछा — मंत्रियों के आने पर ही क्यों माने?

सारांश

विपक्ष के 45 सांसदों की अपील ठुकराने वाले सोनम वांगचुक BJP के दो मंत्रियों के आते ही अनशन से क्यों उठ गए? कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने यही सवाल दागा है — और लद्दाख की माँगों पर हुए किसी भी 'समझौते' का खुलासा करने की माँग की है।

मुख्य बातें

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने 25 जुलाई को सोनम वांगचुक के अनशन तोड़ने के फैसले पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए।
मसूद का आरोप — विपक्ष के 45 सांसद अनुरोध लेकर गए, वांगचुक नहीं माने; लेकिन BJP के 2 मंत्रियों के आने पर तुरंत अनशन समाप्त कर दिया।
मसूद ने सोनम वांगचुक की तुलना अन्ना हजारे से की, जो कथित तौर पर 12 साल से चुप हैं।
पेपर लीक पर नया कानून बनाने की बजाय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग की।
मसूद ने पिछले 12-13 दिनों में सोशल मीडिया पर युवाओं की सक्रियता की सराहना की।

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने 25 जुलाई को जलवायु कार्यकर्ता और लद्दाख के प्रतिनिधि सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त करने के फैसले पर तीखे सवाल उठाए। मसूद ने पूछा कि जब विपक्ष के 45 सांसद वांगचुक से अनुरोध करने गए थे तब उन्होंने उपवास नहीं तोड़ा, लेकिन केंद्र सरकार के दो मंत्रियों के पहुँचते ही वे तुरंत मान गए — ऐसे में यह जानना ज़रूरी है कि आखिर किस आधार पर यह समझौता हुआ।

मुख्य आरोप और सवाल

मसूद ने कहा, 'हमने कहा था कि जब आप आंदोलन कर रहे थे, तो विपक्ष के 45 सांसद आपसे अनुरोध करने गए थे, लेकिन आप नहीं माने। हम लंबे समय से लगातार कह रहे थे कि आपकी जान कीमती है और आपको खुद को खतरे में नहीं डालना चाहिए, लेकिन जब बीजेपी सरकार के दो मंत्री आपके पास गए, तो आप तुरंत मान गए? असल में आप किस बात पर सहमत हुए?'

उन्होंने यह भी पूछा कि जब अभिजीत दिपके जैसे नेताओं ने बार-बार अनुरोध किया था, तब भी वांगचुक ने अनशन क्यों नहीं तोड़ा। मसूद के अनुसार, यदि वांगचुक ने किसी छात्र-समूह के हाथों से जूस लिया होता, तो उनकी अपील पर अनशन समाप्त करना समझ में आता — लेकिन मंत्रियों की उपस्थिति में लिया गया यह निर्णय स्पष्टीकरण माँगता है।

वांगचुक की तुलना अन्ना हजारे से

कांग्रेस सांसद ने सोनम वांगचुक की तुलना सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे से करते हुए कहा कि 'अन्ना हजारे 12 साल से चुप हैं और सोनम वांगचुक अन्ना हजारे पार्ट-2 हैं।' मसूद ने इस बयान को उचित ठहराते हुए कहा कि इसमें कोई संवेदनशील बात नहीं है। गौरतलब है कि वांगचुक हाल ही में कह चुके हैं कि अनशन तोड़ने पर उनसे 'सर्टिफिकेट' माँगा जा रहा है।

पेपर लीक और शिक्षा मंत्री पर निशाना

पेपर लीक मामले में केंद्र सरकार द्वारा नया कानून बनाने की घोषणा पर मसूद ने कहा कि मौजूदा कानून पर्याप्त हैं, लेकिन समस्या यह है कि इस सरकार में चार्जशीट ही दाखिल नहीं होती। उन्होंने माँग की कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए, क्योंकि उनके कार्यकाल में पूरी शिक्षा प्रणाली प्रभावित हुई है।

सोशल मीडिया और युवाओं की भूमिका

प्रधानमंत्री के सोशल मीडिया फॉलोअर्स बढ़ने के मुद्दे पर मसूद ने कहा कि 'जो फर्जी लोग नैरेटिव सेट करते थे, उन्हें युवाओं ने मुहंतोड़ जवाब दिया है।' उन्होंने पिछले 12-13 दिनों में युवाओं की सक्रियता को सराहा और कहा कि 'जेन-जी जिसके खिलाफ हो जाते हैं, उनका इलाज पक्का होता है।'

आगे क्या

कांग्रेस की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची में शामिल करने की माँग को लेकर वांगचुक के आंदोलन को व्यापक समर्थन मिल रहा था। अब जब अनशन समाप्त हो गया है, तो यह देखना होगा कि केंद्र सरकार लद्दाख की मूल माँगों पर क्या ठोस कदम उठाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल में यह उस राजनीतिक असुविधा को उजागर करता है जो तब पैदा होती है जब कोई गैर-दलीय आंदोलन सत्ता पक्ष के साथ बातचीत में उतरता है। विपक्ष की यह आलोचना दोधारी तलवार है — एक तरफ वांगचुक की विश्वसनीयता पर सवाल, दूसरी तरफ यह स्वीकारोक्ति कि विपक्ष खुद वांगचुक को मनाने में नाकाम रहा। असली सवाल यह है कि क्या केंद्र ने लद्दाख की मूल माँगों — छठी अनुसूची और पूर्ण राज्य का दर्जा — पर कोई लिखित आश्वासन दिया, या यह महज़ एक प्रतीकात्मक मुलाकात थी जिसे 'सफलता' के रूप में पेश किया गया।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोनम वांगचुक ने अनशन क्यों तोड़ा?
रिपोर्टों के अनुसार, केंद्र सरकार के दो मंत्रियों के पहुँचने के बाद सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त किया। हालाँकि किसी औपचारिक समझौते की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, और कांग्रेस ने इस निर्णय के आधार पर स्पष्टीकरण माँगा है।
इमरान मसूद ने वांगचुक पर क्या सवाल उठाए?
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने पूछा कि जब विपक्ष के 45 सांसद अनुरोध लेकर गए तब वांगचुक नहीं माने, लेकिन BJP के दो मंत्रियों के आने पर तुरंत अनशन क्यों तोड़ दिया। उन्होंने माँग की कि वांगचुक बताएँ कि किस आधार पर यह फैसला लिया गया।
वांगचुक की तुलना अन्ना हजारे से क्यों की गई?
इमरान मसूद ने कहा कि सोनम वांगचुक 'अन्ना हजारे पार्ट-2' हैं, यह इशारा करते हुए कि जिस तरह अन्ना हजारे का आंदोलन 2011 के बाद प्रभावहीन हो गया, उसी तरह वांगचुक का आंदोलन भी बिना ठोस नतीजे के समाप्त हो सकता है। मसूद ने इस तुलना को उचित बताया।
पेपर लीक पर कांग्रेस का क्या रुख है?
इमरान मसूद ने कहा कि मौजूदा कानून पेपर लीक से निपटने के लिए पर्याप्त हैं, लेकिन सरकार चार्जशीट ही दाखिल नहीं करती। उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग की।
लद्दाख आंदोलन की मूल माँगें क्या हैं?
सोनम वांगचुक के नेतृत्व में लद्दाख के लोग लंबे समय से लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की माँग कर रहे हैं, जिससे वहाँ के आदिवासी समुदायों को विशेष संरक्षण मिल सके। इन माँगों पर अब तक केंद्र की ओर से कोई लिखित आश्वासन सामने नहीं आया है।
राष्ट्र प्रेस
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