पश्चिम बंगाल में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण की पहचान के लिए राज्यव्यापी सर्वे, 6 महीने में पूरा होगा
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्यभर में सरकारी स्वामित्व वाली भूमि का व्यापक सर्वे कराने का निर्णय लिया है, जिसका मुख्य उद्देश्य सरकारी जमीन पर हुए अतिक्रमण की पहचान करना और अवैध कब्जे वाली भूमि को वापस लेना है। यह सर्वे पश्चिम बंगाल भूमि अभिलेख एवं सर्वेक्षण निदेशालय द्वारा संचालित किया जाएगा, जो राज्य के भूमि एवं भूमि राजस्व विभाग के अधीन कार्य करता है। राज्य सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया को अगले छह महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
सर्वे की आवश्यकता क्यों पड़ी
अधिकारियों के अनुसार, सरकारी रिकॉर्ड में राज्य सरकार के स्वामित्व वाली बड़ी मात्रा में भूमि दर्ज है, परंतु वास्तव में कितनी जमीन सरकार के कब्जे में है और कितनी पर अतिक्रमण हो चुका है — यह स्थिति अब तक स्पष्ट नहीं थी। रिपोर्टों के मुताबिक, राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के अधिकार क्षेत्र में आने वाली अनेक जमीनें वर्षों से खाली पड़ी थीं, और समय के साथ इन पर व्यक्तिगत अथवा संस्थागत स्तर पर धीरे-धीरे अतिक्रमण कर लिया गया। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य बड़े निवेश के लिए भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में सक्रिय है।
सर्वे की कार्यप्रणाली और तकनीक
सर्वे में सटीकता सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS) तकनीक का उपयोग किया जाएगा। भूमि अभिलेख एवं सर्वेक्षण निदेशालय ने सर्वे का कार्य किसी विशेषज्ञ एजेंसी को सौंपने के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) यानी टेंडर भी जारी कर दिया है। विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सर्वे के जरिए सरकारी स्वामित्व वाली प्रत्येक भूमि की सटीक सीमा निर्धारित की जाएगी।
अतिक्रमण मुक्त जमीन की सुरक्षा की योजना
भूमि एवं भूमि राजस्व विभाग ने अतिक्रमण से वापस ली गई जमीन पर सरकार का स्थायी कब्जा बनाए रखने के लिए उसकी सीमाओं पर स्थायी खंभे या पिलर लगाने का भी निर्णय लिया है। गौरतलब है कि यह कदम केवल अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य में पुनः अतिक्रमण रोकने की दिशा में भी एक ठोस उपाय है।
नई भूमि नीति और निवेश से जुड़ाव
राज्य सरकार नई भूमि नीति के तहत बड़े निवेश को आकर्षित करने की दिशा में अग्रसर है। बड़े औद्योगिक और वाणिज्यिक निवेश के लिए एक साथ बड़े भूखंडों की आवश्यकता होती है, और यही कारण है कि अतिक्रमण वाली सरकारी जमीन की पहचान कर उसे वापस लेना इस पूरी रणनीति का एक अहम हिस्सा है। आलोचकों का कहना है कि ऐसे सर्वे पहले भी होते रहे हैं, लेकिन जमीन पर उनका असर सीमित रहा है — इस बार क्रियान्वयन की गुणवत्ता ही इसकी सफलता तय करेगी।
सर्वे के बाद क्या होगा
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, सर्वे पूरा होने के पश्चात प्रशासन के लिए सरकारी भूमि की सटीक स्थिति, क्षेत्रफल और सीमाएं निर्धारित करना सरल हो जाएगा। इससे भूमि-संबंधी विवादों में भी कमी आने की उम्मीद है। राज्य सरकार का यह सर्वे पश्चिम बंगाल की भूमि प्रशासन व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।