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पश्चिम बंगाल: मतदाता सूची में नाम न होने के कारण युवक ने किया आत्मघाती कदम, दो दिन बाद हुई मृत्यु

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पश्चिम बंगाल: मतदाता सूची में नाम न होने के कारण युवक ने किया आत्मघाती कदम, दो दिन बाद हुई मृत्यु

सारांश

पश्चिम बंगाल के कांक्सा क्षेत्र में 35 वर्षीय खेपा हाजरा के जहर खाने की घटना ने क्षेत्र में हलचल मचाई है। यह घटना उस समय हुई जब उनका नाम मतदाता सूची में नहीं था, जिसके कारण उन्हें गहरी निराशा हुई।

मुख्य बातें

खेपा हाजरा की मृत्यु ने क्षेत्र में हलचल मचाई।
उनका नाम मतदाता सूची में नहीं था।
परिवार ने आरोप लगाया कि वह अवसाद में चले गए थे।
राजनीतिक क्षेत्र में बहस का विषय बन गया है।
इस घटना ने चुनावी प्रक्रिया की कमजोरियों को उजागर किया।

कोलकाता, 30 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बर्धमान जिले के कांक्सा क्षेत्र के अकंद्रा गांव के 35 वर्षीय खेपा हाजरा की असामान्य मृत्यु ने सोमवार को क्षेत्र में हलचल मचा दी। परिवार ने आरोप लगाया कि व्यक्ति ने जहर खा लिया, क्योंकि वह विशेष गहन पुनरीक्षण सुनवाई में शामिल होने के बावजूद अंतिम मतदाता सूची में अपना नाम न होने से बहुत निराश था।

हाजरा की मृत्यु के मामले में परिवार ने कहा कि उन्होंने गंभीर अवसाद के कारण आत्महत्या की, जो उनकी नागरिकता खोने के भय से उत्पन्न हुआ था।

पुलिस के अनुसार, हाजरा का नाम पश्चिम बंगाल की 2002 की मतदाता सूची में शामिल नहीं था। हालिया विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद, उनका नाम 'अंडर-एज्यूडिकेशन' श्रेणी में आया, सामान्य मतदाता सूची में नहीं। सुनवाई में शामिल होने के बावजूद उनका नाम पूरक सूची में भी नहीं जुड़ा। इसके बाद वह अवसाद की गिरफ्त में चले गए।

परिवार ने बताया कि हाजरा दैनिक मजदूरी करते थे और पिछले कुछ दिनों से ठीक से खाना नहीं खा रहे थे और किसी से बात नहीं कर रहे थे।

शनिवार को, जब उन्हें लंबे समय तक नहीं देखा गया, तो परिवार ने तलाश शुरू की। उन्हें गांव के खेत के पास बेहोश पाया गया। उन्हें दुर्गापुर उप-जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने जहर खाने की पुष्टि की। दो दिन के इलाज के बाद सोमवार को उनकी मृत्यु हो गई।

मृतक की पत्नी, बृंदा हाजरा ने कहा, "जब से उनका नाम मतदाता सूची में नहीं आया, वह लगातार डर में जी रहे थे। वे मुश्किल से खाते या बोलते थे। अंततः उन्होंने यह गंभीर कदम उठाया। अब हमें समझ नहीं आ रहा कि क्या करें।"

उनकी बेटी, दुर्गा ने कहा, "हमने उन्हें मनाने की पूरी कोशिश की, लेकिन एसआईआर के बारे में फैला भय उन्हें पूरी तरह से घेरे हुए था।"

इस घटना ने राजनीतिक बहस को भी जन्म दिया है। दुर्गापुर पूर्व निर्वाचन क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार प्रदीप मजूमदार ने चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए कहा, "अवैध प्रवासियों की पहचान के बहाने जानबूझकर भय फैलाया जा रहा है। वैध दस्तावेज रखने वाले लोगों को मृत्यु के कगार पर लाया जा रहा है।"

वहीं, भाजपा के जिला प्रवक्ता सुमंत मंडल ने इसका विरोध करते हुए कहा, "यह प्रक्रिया अन्य राज्यों में भी लागू की गई है, लेकिन वहां ऐसी कोई घटना नहीं हुई। तृणमूल कांग्रेस जनता को जानबूझकर भ्रमित कर रही है। हम सभी को आश्वस्त करते हैं कि घबराने की कोई वजह नहीं है।"

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह उस प्रणाली की कमजोरियों को भी उजागर करती है, जो नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने में विफल रही है। एक व्यक्ति की नागरिकता की पहचान और चुनावी प्रक्रिया में भागीदारी का महत्व अत्यधिक है।
RashtraPress
29 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खेपा हाजरा ने जहर क्यों खाया?
खेपा हाजरा ने जहर इसलिए खाया क्योंकि उनका नाम मतदाता सूची में नहीं था, जिससे वह गहरे अवसाद में चले गए थे।
क्या इस मामले में राजनीतिक बहस हुई है?
जी हां, इस घटना ने राजनीतिक बहस को जन्म दिया है, जिसमें तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिले हैं।
क्या पुलिस ने इस मामले में कोई कार्रवाई की है?
पुलिस मामले की जांच कर रही है और मृतक के परिवार से बयान लिए गए हैं।
हाजरा के परिवार की स्थिति क्या है?
हाजरा का परिवार इस घटना से अत्यंत दुखी है और उनकी पत्नी और बेटी ने इस संबंध में बयान दिए हैं।
क्या ऐसी घटनाएं अन्य राज्यों में भी होती हैं?
हालांकि ऐसी घटनाएं अन्य राज्यों में भी हो सकती हैं, लेकिन इस मामले में घटना की गंभीरता ने सभी को चिंतित कर दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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