विश्व पर्यटन दिवस 2026: 48% यात्राएं धार्मिक उद्देश्य से, उत्तर प्रदेश सबसे लोकप्रिय गंतव्य
सारांश
मुख्य बातें
विश्व पर्यटन दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर जारी आंकड़े भारत में पर्यटन की बदलती तस्वीर को स्पष्ट करते हैं — पत्र सूचना कार्यालय (PIB) के अनुसार, जुलाई 2025 से जून 2026 के बीच देश में हुई कुल यात्राओं में से 48 प्रतिशत तीर्थयात्रा और धार्मिक उद्देश्य से की गईं, जो किसी भी अन्य श्रेणी से कहीं अधिक है। इस दौरान उत्तर प्रदेश सर्वाधिक पर्यटकों को आकर्षित करने वाला राज्य बनकर उभरा।
विश्व पर्यटन दिवस: इतिहास और महत्व
प्रत्येक वर्ष 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस मनाया जाता है। इसकी शुरुआत वर्ष 1980 में हुई थी। इससे पहले 1979 में स्पेन में आयोजित संयुक्त राष्ट्र पर्यटन महासभा के तीसरे सत्र में इस दिवस की स्थापना का निर्णय लिया गया था। 27 सितंबर 1980 को पहली बार यह दिवस विधिवत मनाया गया था।
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, पर्यटन केवल यात्रा तक सीमित नहीं है — यह रोज़गार सृजन, स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने और सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक विरासत के संरक्षण से भी गहराई से जुड़ा है। होटल, परिवहन, खान-पान, बाज़ार और अनेक सेवा क्षेत्र पर्यटन की गतिविधियों से सीधे लाभान्वित होते हैं।
इस वर्ष की थीम
विश्व पर्यटन दिवस 2026 की आधिकारिक थीम है — 'पर्यटन को नया रूप देने के लिए डिजिटल एजेंडा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता'। यह थीम इस बात को रेखांकित करती है कि डिजिटल प्रौद्योगिकी और AI किस प्रकार यात्रा अनुभव, पर्यटन प्रबंधन और गंतव्य विपणन को बदल रहे हैं।
भारत में पर्यटन के ताज़ा आंकड़े
PIB के सर्वेक्षण के अनुसार, जुलाई 2025 से जून 2026 की अवधि में उत्तर प्रदेश में 15.7 प्रतिशत पर्यटकों ने यात्राएं कीं — इसमें राज्य के भीतर और बाहर से आने वाले दोनों पर्यटक शामिल हैं। तमिलनाडु 13.7 प्रतिशत के साथ दूसरे और राजस्थान 8 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर रहा।
गौरतलब है कि धार्मिक पर्यटन की 48 प्रतिशत हिस्सेदारी उत्तर प्रदेश की अग्रणी स्थिति को सीधे तौर पर प्रभावित करती है, क्योंकि वाराणसी, अयोध्या और मथुरा जैसे तीर्थस्थल देश के सर्वाधिक दर्शनीय धार्मिक गंतव्यों में गिने जाते हैं।
यात्रा व्यय और स्वास्थ्य पर्यटन
सर्वेक्षण में यह भी उजागर हुआ कि पिछले 365 दिनों में स्वास्थ्य और चिकित्सा संबंधी यात्राओं पर सबसे अधिक खर्च हुआ। ग्रामीण परिवारों का औसत यात्रा व्यय ₹29,454 और शहरी परिवारों का ₹41,649 रहा।
यह आंकड़े इस बात के संकेत हैं कि भारतीय परिवार अब स्वास्थ्य सेवाओं के लिए यात्रा पर उल्लेखनीय राशि व्यय कर रहे हैं, जो देश में चिकित्सा पर्यटन की बढ़ती प्रासंगिकता को दर्शाता है।
पर्यटन का आर्थिक और सामाजिक महत्व
पर्यटन किसी भी देश की अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक पहचान की रीढ़ माना जाता है। यह न केवल स्थानीय रोज़गार उत्पन्न करता है, बल्कि विभिन्न संस्कृतियों, परंपराओं और विरासत के बीच संवाद का सेतु भी बनता है। आने वाले वर्षों में डिजिटल तकनीक और AI के समावेश से भारत के पर्यटन क्षेत्र के और अधिक विस्तार की संभावना है।