नवीन निर्माण के नौ वर्ष: यूपी ने पर्यटन में सभी रिकॉर्ड तोड़े, बना पर्यटन का सिरमौर
सारांश
Key Takeaways
- पर्यटन नीति-2022 ने यूपी में पर्यटन क्षेत्र में बदलाव लाए हैं।
- महाकुंभ-2025 ने पर्यटकों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि की है।
- ‘टेंपल एंड फेस्टिवल इकॉनमी’ मॉडल ने यूपी को वैश्विक केंद्र बनाया है।
- इको-टूरिज्म का विकास प्राकृतिक सौंदर्य को बढ़ावा दे रहा है।
- सांस्कृतिक गतिविधियों ने रोजगार के अवसर बढ़ाए हैं।
लखनऊ, 26 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश में आस्था और आर्थिकी एक-दूसरे के पूरक बनकर प्रदेश के पर्यटन विकास को एक नई दिशा प्रदान कर रहे हैं। इस संदर्भ में, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप विकसित की गई पर्यटन नीति-2022 का सफल कार्यान्वयन, इको टूरिज्म का विकास, पर्यटन सुविधाओं में अवसंरचनात्मक सुधार, बेहतर कनेक्टिविटी, सुदृढ़ कानून व्यवस्था, एयरपोर्ट, एक्सप्रेस-वे और परिवहन सेवाओं के विस्तार ने यूपी में पर्यटन के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
योगी सरकार का ‘टेंपल एंड फेस्टिवल इकॉनमी’ मॉडल उत्तर प्रदेश को एक वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने में सहायक हो रहा है। आईआईएम लखनऊ ने हाल ही में अयोध्या में पर्यटन के संदर्भ में एक अध्ययन किया है, जिसमें योगी सरकार की टेम्पल इकॉनमी की प्रशंसा की गई है।
योगी सरकार के 9 वर्षों में उत्तर प्रदेश ने पर्यटन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है, जिसका प्रमाण पर्यटन के आंकड़े देते हैं। 2017 में, यूपी में लगभग 23.75 करोड़ पर्यटक आए थे, जो 2019 में बढ़कर 54.06 करोड़ हो गए। हालांकि, कोविड महामारी के दौरान गिरावट आई, लेकिन पर्यटन नीति-2022 के प्रभावी कार्यान्वयन से तेज रिकवरी हुई।
परिणामस्वरूप, 2024 में 64.91 करोड़ पर्यटक यूपी में आए, जिससे यह देश में सबसे अधिक घरेलू पर्यटकों वाला राज्य बन गया और विदेशी पर्यटकों के मामले में चौथा स्थान प्राप्त किया। 2025 में महाकुंभ के आयोजन से पर्यटकों की संख्या 156.18 करोड़ तक पहुंच गई।
पिछले 9 वर्षों में यूपी में आने वाले पर्यटकों की संख्या लगभग सात गुना बढ़ चुकी है। वर्तमान में राष्ट्रीय पर्यटन में यूपी की हिस्सेदारी 21.9 प्रतिशत हो गई है, जो इसे वैश्विक पर्यटन केंद्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत है।
सीएम योगी के दृष्टिकोण को साकार करती पर्यटन नीति-2022 ने राज्य में पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण परिवर्तन लाने का कार्य किया है। इस नीति के अंतर्गत होटल, होमस्टे, इको-टूरिज्म, वेलनेस और एडवेंचर टूरिज्म समेत 22 गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे अब तक 36,681 करोड़ रुपए का निवेश हुआ है।
धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को मजबूत करने के लिए विभिन्न तीर्थ परिषदों का निर्माण किया गया, जिससे तीर्थ स्थलों की सुविधाएं बढ़ी हैं। अयोध्या, देवीपाटन, ब्रज तीर्थ, विंध्याचल, चित्रकूट, नैमिषारण्य, और शुक तीर्थ जैसे क्षेत्रों में पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिला है।
प्रदेश में इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए अगस्त 2022 में यूपी इको-टूरिज्म बोर्ड का गठन किया गया। इसके माध्यम से प्रमुख इको-टूरिज्म केंद्रों में नाइट स्टे, वॉच टॉवर, और बर्ड वॉचिंग जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं।
योगी सरकार का ‘टेंपल एंड फेस्टिवल इकॉनमी’ मॉडल यूपी में पर्यटन विकास का सबसे प्रभावशाली कारक साबित हुआ है, जैसा कि अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा से स्पष्ट है। अयोध्या में आने वाले पर्यटकों की संख्या 2017 में 2.84 लाख से बढ़कर 2024 में 16.44 करोड़ हो गई।
उत्तर प्रदेश में त्योहार अब दिव्य-भव्य महोत्सव बन चुके हैं, जैसे अयोध्या का दीपोत्सव, वाराणसी की देव दीपावली और मथुरा के होली उत्सव। प्रयागराज के महाकुंभ-2025 में आए 66.30 करोड़ पर्यटकों ने सारे विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। ये आयोजन पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ रोजगार के अवसर भी सृजित कर रहे हैं। इस प्रकार, उत्तर प्रदेश को वैश्विक स्पिरिचुअल टूरिज्म हब बनाने की दिशा में यह सांस्कृतिक पुनर्जागरण और पर्यटन सुविधाओं का विस्तार एक महत्वपूर्ण कदम है।