ब्रज रंगोत्सव: आस्था और आर्थिक पर्यटन का अनूठा संगम, ४४ लाख पर्यटकों ने मनाई होली

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ब्रज रंगोत्सव: आस्था और आर्थिक पर्यटन का अनूठा संगम, ४४ लाख पर्यटकों ने मनाई होली

सारांश

उत्तर प्रदेश की धार्मिक पर्यटन की दुनिया में ब्रज रंगोत्सव ने एक नई पहचान बनाई है। इस वर्ष ४४ लाख से अधिक पर्यटक ब्रज क्षेत्र में पहुंचे, जो तीर्थ पर्यटन की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है। यह आस्था और आर्थिक विकास का अनूठा मिलाजुला स्वरूप है।

Key Takeaways

  • ब्रज रंगोत्सव में ४४ लाख से अधिक पर्यटक शामिल हुए।
  • उत्तर प्रदेश की टेम्पल इकॉनमी में तेजी से विकास हो रहा है।
  • पर्यटन सुविधाओं के लिए ३०० करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत हुआ।
  • ब्रज क्षेत्र में स्थानीय रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
  • भगवान कृष्ण के तीर्थस्थलों की वैश्विक पहचान बन रही है।

लखनऊ, १६ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश में उभरती 'टेम्पल इकॉनमी' अब पर्यटन और स्थानीय रोजगार का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुकी है। तीर्थ स्थलों पर आने वाले पर्यटकों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है और पर्यटन से जुड़ी सुविधाएं भी तेजी से विकसित हो रही हैं। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने सोमवार को बताया कि प्रदेश अब 'ग्रेवयार्ड इकॉनमी' से निकलकर मंदिरों, तीर्थों और सांस्कृतिक आयोजनों पर आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में बढ़ चुका है। पहले की सरकारों का विकास कब्रिस्तानों की दीवारों तक सीमित रह गया था, लेकिन अब आस्था, त्योहार और संस्कृति के माध्यम से पर्यटन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।

मंत्री ने कहा कि ब्रज रंगोत्सव २०२६ के दौरान होली के प्रमुख दिनों में ब्रज क्षेत्र में ४४ लाख से अधिक पर्यटक पहुंचे। इस दौरान लठमार होली, फूलों की होली, हुरंगा और मथुरा-वृंदावन के मंदिरों में पारंपरिक आयोजनों ने देश-विदेश के श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित किया। अमेरिका, यूके, रूस और ब्राजील समेत कई देशों के लोग इन उत्सवों में शामिल होने आए।

जयवीर सिंह ने बताया कि मथुरा-वृंदावन से लेकर अयोध्या और काशी तक उत्तर प्रदेश के प्रमुख तीर्थस्थल अब वैश्विक पहचान बना चुके हैं। वर्ष २०२५ में अकेले मथुरा में लगभग १०.२४ करोड़ पर्यटक और श्रद्धालु पहुंचे, जो प्रदेश में धार्मिक पर्यटन की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है। इसी तर्ज पर अब ब्रजधाम के समग्र विकास पर भी ध्यान दिया जा रहा है। ब्रज क्षेत्र में पर्यटन सुविधाओं और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए हाल ही में ब्रज तीर्थ विकास परिषद की बैठक में लगभग ३०० करोड़ रुपए के विकास कार्यों को मंजूरी दी गई है। इसके तहत मथुरा से वृंदावन के बीच ११.८० किलोमीटर लंबे फोरलेन मार्ग का निर्माण और आधुनिक पॉड रैपिड ट्रांजिट सिस्टम जैसे कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स पर कार्य चल रहा है।

उप्र ब्रज तीर्थ विकास परिषद की स्थापना के साथ ही राज्य सरकार ने ब्रज क्षेत्र के समग्र विकास को प्राथमिकता देते हुए बजट में वृद्धि सुनिश्चित की है। परिषद के गठन के बाद से ही ब्रज क्षेत्र में आधारभूत ढांचे, तीर्थ स्थलों के संरक्षण और पर्यटन सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए बजट में निरंतर वृद्धि की गई है। वित्तीय वर्ष २०१८-१९ में ४३८७.९१ लाख रुपए से शुरू हुई यह राशि २०१९-२० में बढ़कर १२४८३.४७ लाख रुपए हो गई, जबकि २०२०-२१ में ५१७० लाख रुपए और २०२१-२२ में ५५०० लाख रुपए स्वीकृत किए गए। इसके बाद वित्तीय वर्ष २०२२-२३ में ६००० लाख रुपए, २०२३-२४ में १०००० लाख रुपए और वित्त वर्ष २०२४-२५ में १४००० लाख रुपए की स्वीकृति देकर राज्य सरकार ने ब्रज क्षेत्र के समग्र विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत किया है। मथुरा-वृंदावन सहित ब्रज क्षेत्र के सर्वांगीण विकास ने दुनियाभर के पर्यटकों को आकर्षित किया है।

भगवान कृष्ण की लीलाओं और राधा रानी के प्रेम को समर्पित ब्रज क्षेत्र में मंदिरों की एक विस्तृत श्रृंखला है। बांके बिहारी मंदिर, इस्कॉन मंदिर, प्रेम मंदिर, राधा रमण मंदिर, श्री रंगनाथ मंदिर और गोविंद देव जी मंदिर जैसे आस्था स्थल हैं जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। खास बात ये है कि फरवरी-मार्च में होने वाले रंगोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या में जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिली है। आंकड़े इसकी पुष्टि कर रहे हैं। वर्ष २०१६ में जहां फरवरी-मार्च के दौरान १९.९० लाख श्रद्धालु ब्रज धाम पहुंचे थे, वहीं २०२३ में यह संख्या बढ़कर ३३.२६ लाख हो गई। २०२४ में ४४ लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने ब्रज धाम की ओर कदम बढ़ाए और २०२५ में यह आंकड़ा ५४ लाख के पार चला गया।

उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ब्रज क्षेत्र के धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के विकास पर तेजी से काम कर रहा है। मथुरा–वृंदावन मार्ग पर मयूर संरक्षण केंद्र के सौंदर्यीकरण, मथुरा परिक्रमा मार्ग के नवीनीकरण और पांच पवित्र कुंडों के जल शोधन एवं सौंदर्यीकरण जैसे कई प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इसके अलावा गोवर्धन के ग्राम परासौली में सूरदास की समाधि परिसर के संरक्षण और अकबरपुर में पर्यटक सुविधा केंद्र का निर्माण भी लगभग पूरा होने की ओर है। इनके साथ ही मथुरा और वृंदावन के बीच बन रहा ऑडिटोरियम/कन्वेंशन हॉल भी अंतिम चरण में है।

मथुरा के जैत गांव में तुलसी माला निर्माण एक बड़ा रोजगार केंद्र बन गया है, जहां सैकड़ों लोग इससे जुड़कर आजीविका कमा रहे हैं। तीर्थ पर्यटन की बढ़ती गतिविधियों से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिली है। जैत की तुलसी मालाएं, परासौली के हस्तशिल्प और गोवर्धन का फूल बाजार रोजगार के नए अवसर पैदा कर रहे हैं। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार मथुरा, अयोध्या और काशी जैसे तीर्थ अब बेहतर कनेक्टिविटी और सुविधाओं के कारण आर्थिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र बनते जा रहे हैं।

Point of View

बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का माध्यम भी है। यह एक सकारात्मक बदलाव का प्रतीक है, जो आस्था और संस्कृति को एक साथ जोड़ता है।
NationPress
18/03/2026

Frequently Asked Questions

ब्रज रंगोत्सव क्या है?
ब्रज रंगोत्सव एक धार्मिक उत्सव है जो भगवान कृष्ण की लीलाओं और राधा रानी के प्रेम को समर्पित है। यह हर वर्ष होली के आस-पास मनाया जाता है।
इस वर्ष कितने पर्यटक ब्रज आए?
इस वर्ष ब्रज क्षेत्र में ४४ लाख से अधिक पर्यटक पहुंचे।
ब्रज क्षेत्र में पर्यटन सुविधाओं का विकास कैसे हो रहा है?
ब्रज क्षेत्र में विभिन्न विकास कार्यों के अंतर्गत आधारभूत ढांचे और पर्यटन सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है।
ब्रज रंगोत्सव में कौन-कौन से आयोजन होते हैं?
ब्रज रंगोत्सव में लठमार होली, फूलों की होली, और पारंपरिक आयोजनों का समावेश होता है।
ब्रज क्षेत्र का आर्थिक विकास कैसे हो रहा है?
ब्रज क्षेत्र में तीर्थ पर्यटन की गतिविधियों के कारण स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिल रही है।
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