एक्स डाउन: 17 जून को ऐप और वेबसाइट पर लॉगिन-फीड में रुकावट, 40% यूजर्स प्रभावित
सारांश
मुख्य बातें
एलन मस्क के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) की सेवाएँ बुधवार, 17 जून को बाधित हुईं, जब सुबह करीब 8:30 बजे IST पर बड़ी संख्या में यूजर्स ने ऐप और वेबसाइट पर लॉगिन तथा फीड लोड करने में गंभीर दिक्कतें रिपोर्ट कीं। यह पिछले 24 घंटों में दूसरी बार था जब प्लेटफॉर्म की सेवाएँ प्रभावित हुईं — इससे पहले मंगलवार शाम को भी यूजर्स ने समस्याओं की शिकायत की थी।
आउटेज का विवरण और प्रभाव
आउटेज ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म डाउनडिटेक्टर के आँकड़ों के अनुसार, लगभग 40 प्रतिशत यूजर्स ने ऐप में खराबी की सूचना दी। 29 प्रतिशत यूजर्स ने फीड और टाइमलाइन में रुकावटें बताईं, जबकि 18 प्रतिशत ने वेबसाइट के जरिए एक्सेस करने में परेशानी की जानकारी दी। शिकायतों की संख्या सुबह के पीक आवर्स में सबसे अधिक रही।
2025 में एक्स के पिछले आउटेज
यह घटना अलग-थलग नहीं है। मई 2025 में भारत समेत दुनिया भर में एक्स पर आउटेज आया था, जिसके दौरान यूजर्स न तो नई पोस्ट लोड कर पा रहे थे और न ही अपने अकाउंट में लॉग-इन कर पा रहे थे। उस घटना में 41 प्रतिशत यूजर्स ने लॉगिन विफलता और उतने ही यूजर्स ने ऐप में खराबी की बात कही थी।
इससे पहले फरवरी 2025 में एक्स को एक वैश्विक आउटेज का सामना करना पड़ा था, जो भारत, अमेरिका और ब्रिटेन तक फैला था। उस दौरान 25,000 से अधिक आउटेज रिपोर्ट दर्ज हुई थीं — 53 प्रतिशत ऐप यूजर्स लॉगिन नहीं कर पाए थे और 16 प्रतिशत वेबसाइट यूजर्स को भी दिक्कत हुई थी।
नवंबर 2024 में भी भारत और अन्य देशों में एक्स के हजारों यूजर्स को सेवा बाधा का सामना करना पड़ा था। उस समय क्लाउडफ्लेयर के इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर अन्य वेबसाइटें भी प्रभावित हुई थीं।
व्यापक सोशल मीडिया आउटेज का संदर्भ
गौरतलब है कि हाल के महीनों में बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर आउटेज की घटनाएँ बढ़ी हैं। जून 2025 की शुरुआत में फेसबुक और इंस्टाग्राम के यूजर्स को भी वैश्विक स्तर पर बड़े पैमाने पर सेवा बाधा का सामना करना पड़ा था, जहाँ फीड लोड नहीं हो रहे थे और कंटेंट रिफ्रेश नहीं हो पा रहा था। भारत के कई शहरों के यूजर्स भी उस आउटेज से प्रभावित हुए थे। यह आउटेज किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं था — एक साथ कई देशों में समस्याएँ रिपोर्ट हुईं।
आगे क्या
एक्स की ओर से 17 जून की इस सेवा बाधा पर कोई आधिकारिक बयान अभी तक सामने नहीं आया है। यह ऐसे समय में आया है जब प्लेटफॉर्म पहले से ही अपने तकनीकी बुनियादी ढाँचे की विश्वसनीयता को लेकर सवालों के घेरे में है। बार-बार होने वाले आउटेज यूजर विश्वास और विज्ञापन राजस्व दोनों के लिए चुनौती बनते जा रहे हैं।