शी जिनपिंग 24 सितंबर को अमेरिका दौरे पर, ट्रंप ने कहा — 'सकारात्मक नतीजों की उम्मीद'
सारांश
मुख्य बातें
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 24 सितंबर को अमेरिका का दौरा करेंगे — यह जानकारी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यात्रा उद्योग के अधिकारियों के साथ एक बैठक के दौरान दी। इस बैठक में विदेशी निवेश, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और अमेरिका-चीन आर्थिक प्रतिस्पर्धा जैसे अहम विषयों पर चर्चा हो रही थी।
ट्रंप ने क्या कहा
ट्रंप ने बैठक में कहा, 'चीन के राष्ट्रपति 24 तारीख को यहाँ आ रहे हैं। यह बहुत रोमांचक होगा। उनका स्वागत करके खुशी होगी।' उन्होंने यह भी कहा कि शी के साथ 'कई अच्छी बातें और सकारात्मक नतीजे' सामने आने की उम्मीद है, हालाँकि यात्रा के एजेंडे का कोई विस्तृत ब्यौरा नहीं दिया गया।
गौरतलब है कि इससे पहले बुधवार को ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान भी ट्रंप ने संकेत दिया था कि शी जिनपिंग अमेरिका आने वाले हैं। 24 सितंबर की तारीख का खुलासा उन्होंने पहली बार इसी बैठक में किया।
एआई और निवेश पर ज़ोर
बैठक के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका में इस समय रिकॉर्ड स्तर पर विदेशी निवेश आ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि एआई के क्षेत्र में अमेरिका चीन से 'काफी आगे' है। अमेरिकी राष्ट्रपति लंबे समय से एआई, सेमीकंडक्टर, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और अन्य रणनीतिक तकनीकों में चीन के साथ प्रतिस्पर्धा को अपनी आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा नीति का केंद्रीय स्तंभ बताते रहे हैं।
कनाडा पर चौंकाने वाली टिप्पणी
इसी चर्चा के दौरान ट्रंप ने कनाडा का भी ज़िक्र किया और कहा कि कई लोग हैरान होते हैं जब वह यह कहते हैं कि कनाडा से बातचीत करना कभी-कभी चीन से भी ज़्यादा मुश्किल रहा है। उनके शब्दों में, 'लोग मुझसे पूछते हैं कि सबसे मुश्किल देश कौन है? क्या वह चीन है? वियतनाम है? लेकिन मैं कहता हूँ कि वास्तव में कनाडा से निपटना ज़्यादा कठिन रहा है।'
मुलाकात की पृष्ठभूमि
24 सितंबर को प्रस्तावित यह शिखर मुलाकात ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका और चीन के बीच व्यापार, तकनीक और वैश्विक प्रभाव को लेकर तनाव बना हुआ है। टैरिफ, निर्यात नियंत्रण और संवेदनशील तकनीकों पर दोनों देशों के बीच गहरे मतभेद हैं। फिर भी, दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के रूप में दोनों देश आर्थिक रूप से एक-दूसरे से अविभाज्य रूप से जुड़े हुए हैं।
यह बैठक दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है — और इसके नतीजों पर पूरी दुनिया की नज़र होगी।