अमला शंकर: आधुनिक भारतीय नृत्य की पुरोधा, जिन्होंने 92 वर्ष की उम्र में भी मंच नहीं छोड़ा
सारांश
मुख्य बातें
आधुनिक भारतीय नृत्य की अग्रदूत अमला शंकर का जीवन उस विरल कलाकार की गाथा है, जिन्होंने नौ दशकों से अधिक समय तक भारतीय नृत्य और संस्कृति की लौ को जलाए रखा। 24 जुलाई 2020 को कोलकाता में उनके निधन के पाँच वर्ष बाद भी उनकी विरासत भारतीय कला जगत में उतनी ही प्रासंगिक है।
कान्स से कोलकाता तक: एक अविस्मरणीय यात्रा
2012 में फ्रांस के प्रतिष्ठित कान्स फिल्म फेस्टिवल की रेड कार्पेट पर एक 93 वर्षीय भारतीय महिला की उपस्थिति ने दुनिया भर के मीडिया का ध्यान खींचा। यह अवसर था 1948 की ऐतिहासिक फिल्म 'कल्पना' के डिजिटल रूप से पुनर्संरक्षित संस्करण की विशेष स्क्रीनिंग का। अपनी चिर-परिचित मुस्कान के साथ उन्होंने पत्रकारों से कहा, "मैं इस साल कान्स में आई सबसे युवा फिल्म स्टार हूँ" — यह वाक्य उनके अदम्य जीवट का प्रतीक बन गया।
बचपन और कलात्मक जागृति
अमला शंकर का जन्म 27 जून 1919 को ब्रिटिश भारत की बंगाल प्रेसीडेंसी के मगूरा जिले (वर्तमान बांग्लादेश) के बाटाजोर गाँव में एक स्वर्ण व्यापारी परिवार में हुआ था। उनका बचपन का नाम अमला नंदी था। उनके पिता अक्षय कुमार नंदी शिक्षा और कला के प्रबल समर्थक थे।
1931 में मात्र 11 वर्ष की आयु में वे अपने पिता के साथ पेरिस की 'अंतर्राष्ट्रीय औपनिवेशिक प्रदर्शनी' में गईं, जहाँ उनकी भेंट दिग्गज भारतीय नर्तक उदय शंकर और उनके परिवार से हुई। उदय शंकर की माँ हेमांगिनी देवी ने अमला को स्नेहपूर्वक एक साड़ी भेंट की — और यहीं से एक ऐतिहासिक कलात्मक सफर की नींव पड़ी।
गौरतलब है कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस, जो अमला की नृत्य के प्रति लगन से परिचित थे, ने उनके पिता को उन्हें अल्मोड़ा स्थित उदय शंकर डांस अकादमी भेजने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बाद में अमला को यूरोप में भारत के सांस्कृतिक राजदूत के रूप में भी भेजा। 1931 में ही बेल्जियम में 'कालिया दमन' नामक प्रस्तुति के साथ उन्होंने मंच पर अपना पहला कदम रखा।
उदय शंकर के साथ जीवन और परिवार
वैश्विक नृत्य यात्राओं के दौरान उदय शंकर और अमला का संबंध प्रगाढ़ होता गया। 1939 में जब नृत्य दल चेन्नई में ठहरा हुआ था, तब उदय शंकर ने विवाह का प्रस्ताव रखा और 1942 में दोनों विवाह-बंधन में बँध गए। इस दंपति के दो संतानें हुईं — दिसंबर 1942 में पुत्र आनंद शंकर (जो आगे चलकर प्रसिद्ध संगीतकार बने) और जनवरी 1954 में पुत्री ममता शंकर (जो प्रख्यात नृत्यांगना एवं अभिनेत्री बनीं)।
फिल्म, चित्रकला और लेखन में योगदान
1948 में अमला शंकर ने उदय शंकर की फिल्म 'कल्पना' में मुख्य भूमिका निभाई, जो एक युवा नर्तक के नृत्य अकादमी स्थापित करने के स्वप्न पर आधारित थी। नृत्य के अतिरिक्त वे एक बहुमुखी चित्रकार भी थीं — और उनकी चित्रकारी की सबसे अनूठी विशेषता यह थी कि वे कभी तूलिका का उपयोग नहीं करती थीं। वे केवल अपनी उँगलियों, नाखूनों और टूथपिक की सहायता से कैनवस पर रंग उकेरती थीं। उन्होंने लेखन में भी योगदान दिया और उनकी एक पुस्तक की प्रस्तावना स्वयं नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने लिखी थी।
विरासत और अंतिम वर्ष
अल्मोड़ा केंद्र के बंद होने के बाद अमला शंकर ने कोलकाता में उदय शंकर इंडिया कल्चर सेंटर (USICC) की स्थापना की, जहाँ 5 वर्ष की आयु से बच्चों को भारतीय कला की शिक्षा दी जाती रही। वे 'स्त्री शक्ति - द पैरेलल फोर्स' जैसे सामाजिक अभियानों से भी जुड़ी रहीं। 92 वर्ष की आयु में उन्होंने 'सीता स्वयंवर' नामक नृत्य नाटिका में राजा जनक की भूमिका निभाकर दर्शकों को अचंभित कर दिया। 24 जुलाई 2020 को कोलकाता में नींद में ही हृदय गति रुकने से उनका निधन हो गया — एक ऐसी कलाकार का अंत, जिसने जीवन के अंतिम क्षण तक कला को जिया।