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अमला शंकर: आधुनिक भारतीय नृत्य की पुरोधा, जिन्होंने 92 वर्ष की उम्र में भी मंच नहीं छोड़ा

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अमला शंकर: आधुनिक भारतीय नृत्य की पुरोधा, जिन्होंने 92 वर्ष की उम्र में भी मंच नहीं छोड़ा

सारांश

93 वर्ष की उम्र में कान्स की रेड कार्पेट पर खुद को 'सबसे युवा स्टार' कहने वाली अमला शंकर सिर्फ नृत्यांगना नहीं थीं — वे भारतीय कला की जीती-जागती संस्था थीं। नेताजी की प्रेरणा से यूरोप तक, उदय शंकर की जीवनसंगिनी से USICC की संस्थापक तक — उनका जीवन भारतीय सांस्कृतिक इतिहास का एक अनमोल अध्याय है।

मुख्य बातें

अमला शंकर का जन्म 27 जून 1919 को बाटाजोर गाँव, मगूरा जिले (वर्तमान बांग्लादेश) में हुआ था।
1931 में पेरिस में उदय शंकर से मुलाकात के बाद उनका कलात्मक सफर शुरू हुआ; बेल्जियम में 'कालिया दमन' से मंच पर पदार्पण।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने उन्हें अल्मोड़ा अकादमी भेजने और यूरोप में सांस्कृतिक राजदूत बनाने में भूमिका निभाई।
1942 में उदय शंकर से विवाह; संतानें — संगीतकार आनंद शंकर और नृत्यांगना-अभिनेत्री ममता शंकर ।
92 वर्ष की आयु में 'सीता स्वयंवर' में राजा जनक की भूमिका निभाई; 2012 में कान्स में 'कल्पना' की स्क्रीनिंग में शिरकत की।
24 जुलाई 2020 को कोलकाता में हृदय गति रुकने से निधन।

आधुनिक भारतीय नृत्य की अग्रदूत अमला शंकर का जीवन उस विरल कलाकार की गाथा है, जिन्होंने नौ दशकों से अधिक समय तक भारतीय नृत्य और संस्कृति की लौ को जलाए रखा। 24 जुलाई 2020 को कोलकाता में उनके निधन के पाँच वर्ष बाद भी उनकी विरासत भारतीय कला जगत में उतनी ही प्रासंगिक है।

कान्स से कोलकाता तक: एक अविस्मरणीय यात्रा

2012 में फ्रांस के प्रतिष्ठित कान्स फिल्म फेस्टिवल की रेड कार्पेट पर एक 93 वर्षीय भारतीय महिला की उपस्थिति ने दुनिया भर के मीडिया का ध्यान खींचा। यह अवसर था 1948 की ऐतिहासिक फिल्म 'कल्पना' के डिजिटल रूप से पुनर्संरक्षित संस्करण की विशेष स्क्रीनिंग का। अपनी चिर-परिचित मुस्कान के साथ उन्होंने पत्रकारों से कहा, "मैं इस साल कान्स में आई सबसे युवा फिल्म स्टार हूँ" — यह वाक्य उनके अदम्य जीवट का प्रतीक बन गया।

बचपन और कलात्मक जागृति

अमला शंकर का जन्म 27 जून 1919 को ब्रिटिश भारत की बंगाल प्रेसीडेंसी के मगूरा जिले (वर्तमान बांग्लादेश) के बाटाजोर गाँव में एक स्वर्ण व्यापारी परिवार में हुआ था। उनका बचपन का नाम अमला नंदी था। उनके पिता अक्षय कुमार नंदी शिक्षा और कला के प्रबल समर्थक थे।

1931 में मात्र 11 वर्ष की आयु में वे अपने पिता के साथ पेरिस की 'अंतर्राष्ट्रीय औपनिवेशिक प्रदर्शनी' में गईं, जहाँ उनकी भेंट दिग्गज भारतीय नर्तक उदय शंकर और उनके परिवार से हुई। उदय शंकर की माँ हेमांगिनी देवी ने अमला को स्नेहपूर्वक एक साड़ी भेंट की — और यहीं से एक ऐतिहासिक कलात्मक सफर की नींव पड़ी।

गौरतलब है कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस, जो अमला की नृत्य के प्रति लगन से परिचित थे, ने उनके पिता को उन्हें अल्मोड़ा स्थित उदय शंकर डांस अकादमी भेजने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बाद में अमला को यूरोप में भारत के सांस्कृतिक राजदूत के रूप में भी भेजा। 1931 में ही बेल्जियम में 'कालिया दमन' नामक प्रस्तुति के साथ उन्होंने मंच पर अपना पहला कदम रखा।

उदय शंकर के साथ जीवन और परिवार

वैश्विक नृत्य यात्राओं के दौरान उदय शंकर और अमला का संबंध प्रगाढ़ होता गया। 1939 में जब नृत्य दल चेन्नई में ठहरा हुआ था, तब उदय शंकर ने विवाह का प्रस्ताव रखा और 1942 में दोनों विवाह-बंधन में बँध गए। इस दंपति के दो संतानें हुईं — दिसंबर 1942 में पुत्र आनंद शंकर (जो आगे चलकर प्रसिद्ध संगीतकार बने) और जनवरी 1954 में पुत्री ममता शंकर (जो प्रख्यात नृत्यांगना एवं अभिनेत्री बनीं)।

फिल्म, चित्रकला और लेखन में योगदान

1948 में अमला शंकर ने उदय शंकर की फिल्म 'कल्पना' में मुख्य भूमिका निभाई, जो एक युवा नर्तक के नृत्य अकादमी स्थापित करने के स्वप्न पर आधारित थी। नृत्य के अतिरिक्त वे एक बहुमुखी चित्रकार भी थीं — और उनकी चित्रकारी की सबसे अनूठी विशेषता यह थी कि वे कभी तूलिका का उपयोग नहीं करती थीं। वे केवल अपनी उँगलियों, नाखूनों और टूथपिक की सहायता से कैनवस पर रंग उकेरती थीं। उन्होंने लेखन में भी योगदान दिया और उनकी एक पुस्तक की प्रस्तावना स्वयं नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने लिखी थी।

विरासत और अंतिम वर्ष

अल्मोड़ा केंद्र के बंद होने के बाद अमला शंकर ने कोलकाता में उदय शंकर इंडिया कल्चर सेंटर (USICC) की स्थापना की, जहाँ 5 वर्ष की आयु से बच्चों को भारतीय कला की शिक्षा दी जाती रही। वे 'स्त्री शक्ति - द पैरेलल फोर्स' जैसे सामाजिक अभियानों से भी जुड़ी रहीं। 92 वर्ष की आयु में उन्होंने 'सीता स्वयंवर' नामक नृत्य नाटिका में राजा जनक की भूमिका निभाकर दर्शकों को अचंभित कर दिया। 24 जुलाई 2020 को कोलकाता में नींद में ही हृदय गति रुकने से उनका निधन हो गया — एक ऐसी कलाकार का अंत, जिसने जीवन के अंतिम क्षण तक कला को जिया।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि USICC की स्थापना और दशकों तक बच्चों को प्रशिक्षण देना उनकी स्वतंत्र संस्थागत विरासत है। यह भी विचारणीय है कि भारतीय नृत्य की इस अग्रदूत को राष्ट्रीय सम्मान उनके जीवनकाल में उतना नहीं मिला, जितना मरणोपरांत स्मृति-लेखों में मिल रहा है।
RashtraPress
6 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमला शंकर का नृत्य से जुड़ाव कब और कैसे हुआ?
1931 में पेरिस की 'अंतर्राष्ट्रीय औपनिवेशिक प्रदर्शनी' में उदय शंकर से मुलाकात के बाद उनका कलात्मक सफर शुरू हुआ। उसी वर्ष बेल्जियम में 'कालिया दमन' प्रस्तुति से उन्होंने मंच पर पहला कदम रखा।
अमला शंकर ने फिल्मों में क्या योगदान दिया?
1948 में उन्होंने उदय शंकर की फिल्म 'कल्पना' में मुख्य भूमिका निभाई। 2012 में इस फिल्म के डिजिटल रूप से पुनर्संरक्षित संस्करण की स्क्रीनिंग कान्स फिल्म फेस्टिवल में हुई, जहाँ 93 वर्ष की आयु में अमला स्वयं उपस्थित रहीं।
उदय शंकर इंडिया कल्चर सेंटर (USICC) क्या है?
USICC की स्थापना अमला शंकर ने कोलकाता में की थी, जहाँ 5 वर्ष की आयु से बच्चों को भारतीय कला और नृत्य की शिक्षा दी जाती है। यह केंद्र आज भी भारतीय सांस्कृतिक शिक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र है।
अमला शंकर के परिवार में कौन-कौन प्रसिद्ध हैं?
अमला शंकर ने 1942 में प्रख्यात नर्तक उदय शंकर से विवाह किया। उनके पुत्र आनंद शंकर एक प्रसिद्ध संगीतकार बने, जबकि पुत्री ममता शंकर एक प्रख्यात नृत्यांगना और अभिनेत्री हैं।
राष्ट्र प्रेस
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