यमुना प्रदूषण पर हरियाणा सख्त: ड्रोन सर्वे और रियल-टाइम मॉनिटरिंग से नालों पर कसेगा शिकंजा

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यमुना प्रदूषण पर हरियाणा सख्त: ड्रोन सर्वे और रियल-टाइम मॉनिटरिंग से नालों पर कसेगा शिकंजा

सारांश

यमुना को ज़हर बनाने वाले नालों पर हरियाणा ने अब ड्रोन की आँख लगाई है। 90 STP चालू, 8 नए CETP प्रस्तावित और दिसंबर 2028 तक की समय-सीमा — यह योजना कागज़ पर मज़बूत है, लेकिन असली परीक्षा ज़मीन पर होगी।

मुख्य बातें

मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने 19 मई को यमुना प्रदूषण नियंत्रण रणनीति की उच्चस्तरीय समीक्षा की।
हरियाणा में 34 कस्बों में 90 STP चालू, कुल क्षमता 1,518 MLD ; 4 नए STP ( 170 MLD ) निर्माणाधीन।
औद्योगिक प्रदूषण के लिए 17 CETP ( 184.5 MLD ) सक्रिय; 8 नए CETP ( 146 MLD ) प्रस्तावित।
नाला नंबर 6 , मुंगेशपुर , बुपानिया और पालम विहार नाला सहित अंतर-राज्यीय नालों पर विशेष फोकस।
जोन-वार ड्रोन सर्वे से प्रदूषण हॉटस्पॉट चिह्नित किए जाएंगे; परियोजना की समय-सीमा दिसंबर 2025–दिसंबर 2028 ।

हरियाणा सरकार ने यमुना नदी के प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए एक व्यापक कार्य योजना लागू की है, जिसका मुख्य लक्ष्य अंतर-राज्यीय नालों के जरिए दिल्ली में पहुँचने वाले दूषित जल को रोकना है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने मंगलवार, 19 मई को इस रणनीति की प्रगति की उच्चस्तरीय समीक्षा की। यह योजना सीवेज उपचार, औद्योगिक कचरा प्रबंधन और नालों की रियल-टाइम निगरानी — तीन स्तंभों पर टिकी है।

ड्रोन सर्वे और रियल-टाइम निगरानी

हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष विनय प्रताप सिंह ने बताया कि राज्य यमुना में गिरने वाले सभी नालों और उप-नालों का नक्शा तैयार करने के लिए जोन-वार ड्रोन सर्वेक्षण करेगा। इस सर्वे में पानी के बहाव और जल-गुणवत्ता — दोनों की निगरानी की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य प्रदूषण के हॉटस्पॉट चिह्नित करना और स्रोत-स्तर पर नियंत्रण को मज़बूत करना है — ठीक उसी तर्ज पर जैसे दिल्ली में इसी तरह के सर्वेक्षण किए जा रहे हैं।

समीक्षा बैठक में नाला नंबर 6, मुंगेशपुर नाला, बुपानिया नाला और पालम विहार नाला सहित हरियाणा से दिल्ली में प्रवेश करने वाले अंतर-राज्यीय नालों के लिए विशेष प्रदूषण नियंत्रण उपायों पर चर्चा हुई। बैठक में गृह मंत्रालय द्वारा जारी सीवेज और औद्योगिक कचरा प्रबंधन संबंधी निर्देशों के क्रियान्वयन की भी समीक्षा की गई।

मौजूदा सीवेज उपचार ढाँचा

समीक्षा में सामने आया कि हरियाणा ने 34 कस्बों में 90 सीवेज उपचार संयंत्र (STP) चालू कर दिए हैं, जिनकी कुल उपचार क्षमता 1,518 मिलियन लीटर प्रतिदिन (MLD) है। इसके अतिरिक्त, 170 MLD क्षमता के 4 नए STP निर्माणाधीन हैं, जबकि 227 MLD क्षमता के 9 मौजूदा STP को उपचार दक्षता बढ़ाने के लिए अपग्रेड किया जा रहा है। भविष्य की विस्तार योजना के तहत 510 MLD की प्रस्तावित क्षमता वाले 9 नए STP की भी स्थापना प्रस्तावित है।

औद्योगिक कचरा प्रबंधन

औद्योगिक प्रदूषण से निपटने के लिए राज्य में 184.5 MLD की संयुक्त क्षमता वाले 17 कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) पहले से चालू हैं। 19 MLD क्षमता के 2 CETP अपग्रेड किए जा रहे हैं और औद्योगिक अपशिष्ट जल उपचार के बुनियादी ढाँचे को और मज़बूत करने के लिए 146 MLD की संयुक्त क्षमता वाले 8 नए CETP प्रस्तावित किए गए हैं।

कार्य योजना और समय-सीमा

हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने STP, CETP और नाला टैपिंग परियोजनाओं को समाहित करते हुए एक विस्तृत कार्य योजना तैयार की है। परियोजना के विभिन्न घटकों पर काम पहले से जारी है और इसकी समय-सीमा दिसंबर 2025 से दिसंबर 2028 तक निर्धारित की गई है। बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD) स्तर को कम करना और औद्योगिक कचरे के निकास पर कड़ी निगरानी भी इस योजना का अभिन्न हिस्सा है।

यमुना पुनर्जीवन की यह कोशिश ऐसे समय में आई है जब सर्वोच्च न्यायालय और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) दिल्ली-हरियाणा के बीच नदी प्रदूषण को लेकर लंबे समय से सख्त रुख अपनाए हुए हैं। इस योजना की सफलता अब क्रियान्वयन की गति और ज़मीनी निगरानी की प्रभावशीलता पर निर्भर करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

17 CETP और ड्रोन निगरानी — लेकिन यमुना की सफाई को लेकर इससे पहले भी कई महत्वाकांक्षी योजनाएँ घोषित हो चुकी हैं जो क्रियान्वयन में पिछड़ गईं। असली सवाल यह है कि क्या BOD स्तर और नाला-प्रवाह की रियल-टाइम डेटा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होगी, या यह निगरानी केवल आंतरिक रहेगी। दिल्ली और हरियाणा के बीच अंतर-राज्यीय नालों पर जवाबदेही का सवाल दशकों से अनुत्तरित है — ड्रोन सर्वे तभी सार्थक होगा जब उसके नतीजे प्रवर्तन कार्रवाई से जुड़ें।
RashtraPress
19 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हरियाणा की यमुना प्रदूषण नियंत्रण योजना क्या है?
यह एक व्यापक कार्य योजना है जिसमें सीवेज उपचार संयंत्रों का विस्तार, औद्योगिक CETP का उन्नयन और अंतर-राज्यीय नालों की ड्रोन व रियल-टाइम निगरानी शामिल है। इसका मुख्य उद्देश्य हरियाणा के नालों से दिल्ली में प्रवेश करने वाले दूषित जल को रोकना है।
हरियाणा में अभी कितने सीवेज उपचार संयंत्र (STP) चालू हैं?
हरियाणा में 34 कस्बों में 90 STP चालू हैं जिनकी कुल उपचार क्षमता 1,518 MLD है। इसके अलावा 170 MLD क्षमता के 4 नए STP निर्माणाधीन हैं और 510 MLD क्षमता के 9 और STP प्रस्तावित हैं।
ड्रोन सर्वे से यमुना प्रदूषण कैसे कम होगा?
जोन-वार ड्रोन सर्वे से यमुना में गिरने वाले सभी नालों और उप-नालों का नक्शा तैयार किया जाएगा और पानी के बहाव व जल-गुणवत्ता की निगरानी होगी। इससे प्रदूषण के हॉटस्पॉट चिह्नित कर स्रोत-स्तर पर कार्रवाई संभव होगी।
कौन-से अंतर-राज्यीय नाले इस योजना के दायरे में हैं?
नाला नंबर 6, मुंगेशपुर नाला, बुपानिया नाला और पालम विहार नाला सहित हरियाणा से दिल्ली में प्रवेश करने वाले प्रमुख अंतर-राज्यीय नाले इस योजना के केंद्र में हैं। इन्हीं नालों के ज़रिए सर्वाधिक प्रदूषित जल दिल्ली पहुँचता है।
यह योजना कब तक पूरी होगी?
परियोजना के विभिन्न घटकों की समय-सीमा दिसंबर 2025 से दिसंबर 2028 तक निर्धारित की गई है। हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने STP, CETP और नाला टैपिंग परियोजनाओं को शामिल करते हुए विस्तृत कार्य योजना तैयार कर ली है।
राष्ट्र प्रेस
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