योगी सरकार का डिजिटल जस्टिस प्लान: ICJS 2.0 से 1,982 थाने और 18 फॉरेंसिक लैब एक नेटवर्क पर
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने राज्य की पूरी आपराधिक न्याय प्रणाली को एकीकृत डिजिटल ढाँचे से जोड़ने का विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। इस योजना के तहत इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS 2.0) और क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम (CCTNS) के माध्यम से पुलिस थानों, फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं, अभियोजन विभाग, कारागार और न्यायालयों को एक ही डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर लाया जाएगा। 5 नवंबर 2026 को सामने आई इस जानकारी के अनुसार, राज्य के 1,982 पुलिस थानों और 18 फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं में नेटवर्क कनेक्टिविटी सुदृढ़ करने की प्रक्रिया पहले से शुरू हो चुकी है।
नए आपराधिक कानूनों में UP की प्रगति
नए आपराधिक कानूनों (NCL) के क्रियान्वयन के लिए तैयार राष्ट्रीय डैशबोर्ड पर उत्तर प्रदेश का स्कोर 25 जून 2026 को 78.13 अंक था, जो 12 सितंबर 2026 तक बढ़कर 85.99 अंक हो गया — यानी लगभग ढाई महीने में 7.86 अंकों का सुधार। बीच में 20 जुलाई को 82.05, 19 अगस्त को 84.92 और 1 सितंबर को 85.47 अंक दर्ज किए गए, जो लगातार ऊर्ध्वगामी प्रवृत्ति को दर्शाते हैं।
डैशबोर्ड के विस्तृत आँकड़ों के अनुसार, नोटिफिकेशन जारी करने, मॉडल रूल्स लागू करने, ICJS इंटीग्रेशन और MEDLEAPR पोर्टल के क्रियान्वयन — इन चारों श्रेणियों में राज्य ने 10-10 में से पूरे 10 अंक प्राप्त किए हैं। नेशनल ऑटोमेटेड फिंगर प्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (NAFIS) और न्याय श्रुति में भी पूर्ण अंक — 5 में से 5 — मिले हैं। ई-साक्ष्य में 10 में से 6.57 और ई-समन में 10 में से 6.74 अंक हासिल किए गए हैं।
ई-फॉरेंसिक 2.0: जुलाई से अब तक 6,334 केस
जुलाई 2026 से लागू ई-फॉरेंसिक 2.0 प्रणाली के तहत अब तक 6,334 केस पंजीकृत हो चुके हैं और 535 मामलों की रिपोर्टिंग की जा चुकी है। इस प्रणाली में केस रजिस्ट्रेशन, आवंटन, रिपोर्ट तैयार करना और केस डिस्पैच — सभी प्रक्रियाएँ ऑनलाइन संपन्न होती हैं।
गौरतलब है कि फॉरेंसिक अवसंरचना को और सुदृढ़ करने के लिए राज्य की 12 प्रयोगशालाओं के 8-8 अनुभागों हेतु कुल 192 हाई-एंड डेस्कटॉप की माँग प्रस्तावित की गई है। इसके साथ ही संवेदनशील डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने के लिए नेटवर्क अटैच्ड स्टोरेज (NAS) या क्लाउड स्टोरेज की व्यवस्था की आवश्यकता भी रेखांकित की गई है।
थानों और लैब के बीच डेटा का सुगम प्रवाह
CCTNS के माध्यम से थानों से फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं तक केस-संबंधी सूचनाओं के सुव्यवस्थित आदान-प्रदान के लिए क्यूआर कोड जनरेशन और डेटा एंट्री प्रणाली को उन्नत किया जा रहा है। नेटवर्क अवसंरचना के लिए SD-WAN आधारित नेटवर्क व्यवस्था अपनाई जाएगी। पुलिस विभाग के लिए डेस्कटॉप, UPS, टैबलेट, मल्टीफंक्शन प्रिंटर, वेबकैम और क्यूआर कोड रीडर सहित आवश्यक उपकरणों की खरीद की प्रक्रिया चल रही है।
यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार के नए आपराधिक कानून — भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम — राज्यों में लागू हो रहे हैं और डिजिटल साक्ष्य की स्वीकार्यता पहले से कहीं अधिक महत्त्वपूर्ण हो गई है।
कारागारों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का विस्तार
कारागार विभाग को भी इस डिजिटल ढाँचे से जोड़ा जा रहा है। जेलों में डेस्कटॉप, बायोमेट्रिक अटेंडेंस डिवाइस, स्कैनर और वेबकैम उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जारी है। विशेष रूप से 535 वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग यूनिट की खरीद के बाद उनकी आपूर्ति और स्थापना पूर्ण कर ली गई है, जिससे जेलों और न्यायालयों के बीच वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा और मज़बूत होगी। इसके अतिरिक्त, इलाहाबाद हाईकोर्ट को NCL डैशबोर्ड का एक्सेस उपलब्ध कराया गया है, ताकि न्यायालय स्तर पर भी अनुपालन की निगरानी हो सके।
ई-साक्ष्य मॉनिटरिंग और 60 व 90 दिनों में जाँच पूरी करने की अनुपालना के लिए अलग डैशबोर्ड विकसित किया गया है, जिसकी प्रत्येक माह क्राइम मीटिंग में समीक्षा की जाती है। आने वाले महीनों में इस एकीकृत व्यवस्था के पूर्ण संचालन से न्यायिक विलंब में उल्लेखनीय कमी की उम्मीद जताई जा रही है।