20 जुलाई 2026
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यूपी डीजीपी राजीव कृष्ण का खुलासा: 93% दोषसिद्धि दर, ₹788 करोड़ जब्त, साइबर सेंटर का ऐलान

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यूपी डीजीपी राजीव कृष्ण का खुलासा: 93% दोषसिद्धि दर, ₹788 करोड़ जब्त, साइबर सेंटर का ऐलान

सारांश

यूपी डीजीपी राजीव कृष्ण ने एक साल का रिपोर्ट कार्ड पेश किया — 93% दोषसिद्धि दर, ₹788 करोड़ की जब्ती, 65,000 से अधिक साइबर-प्रशिक्षित पुलिसकर्मी और 450 बचाई गई जानें। अब नजर अगले चरण पर: पुलिस मुख्यालय में एडवांस साइबर सेंटर और वित्तीय अपराध नेटवर्क पर निर्णायक प्रहार।

मुख्य बातें

ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत 32,071 मामलों में फैसला, 93% से अधिक दोषसिद्धि दर; 42,681 अभियुक्तों को सजा।
गैंगस्टर एक्ट के तहत 5,684 अपराधियों पर कार्रवाई, ₹788 करोड़ की संपत्तियाँ जब्त; माफिया अभियान में ₹336 करोड़ की अवैध संपत्तियाँ जब्त या ध्वस्त।
साइबर क्राइम पोर्टल से ₹400 करोड़ फ्रीज; 1.11 लाख मोबाइल नंबर और 1.22 लाख आईएमईआई ब्लॉक।
65,000 से अधिक पुलिसकर्मियों को साइबर प्रशिक्षण; साइबर ट्रेनिंग में उत्तर प्रदेश देशभर में शीर्ष।
' जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट ' योजना से 2026 की पहली तिमाही में दुर्घटनाओं में 7.43% और मौतों में 11.55% की कमी; लगभग 450 जानें बचीं।
पुलिस मुख्यालय में केंद्रीय एडवांस साइबर सेंटर स्थापित करने की घोषणा; साइबर कॉल सेंटर को 200 सीटों तक विस्तारित करने की योजना।

उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने 1 जून 2026 को लखनऊ स्थित पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में बीते एक वर्ष की उपलब्धियों का विस्तृत लेखा-जोखा प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति, मिशन शक्ति, साइबर अपराध नियंत्रण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित पुलिसिंग के सम्मिलित प्रभाव से बीते सात-आठ वर्षों में प्रदेश में अपराधों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।

ऑपरेशन कन्विक्शन: 93% से अधिक दोषसिद्धि दर

डीजीपी के अनुसार, ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत प्रदेश में 93 प्रतिशत से अधिक दोषसिद्धि दर दर्ज की गई है। बीते एक वर्ष में 32,071 मामलों में अदालतों ने अपना फैसला सुनाया, जिनमें से 29,911 मामलों में अभियुक्त दोषी ठहराए गए। कुल 42,681 अभियुक्तों को सजा दिलाई गई, जिनमें 18 मामलों में मृत्युदंड और 3,340 मामलों में आजीवन कारावास की सजा शामिल है। यह आँकड़े उत्तर प्रदेश की न्यायिक प्रक्रिया में पुलिस की बढ़ती भागीदारी और साक्ष्य-संग्रह क्षमता को रेखांकित करते हैं।

माफिया और संगठित अपराध पर निर्णायक प्रहार

गैंगस्टर एक्ट के तहत 5,684 अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई की गई और ₹788 करोड़ मूल्य की संपत्तियाँ जब्त की गईं। इसके अतिरिक्त, माफिया और संगठित अपराधियों के खिलाफ अभियान के अंतर्गत ₹336 करोड़ से अधिक की अवैध संपत्तियों को जब्त, ध्वस्त या कब्जामुक्त कराया गया। डीजीपी ने स्पष्ट किया कि आगे भी हवाला नेटवर्क, शेल कंपनियों और अपराध से अर्जित आर्थिक तंत्र पर वित्तीय एवं तकनीक-आधारित जाँच के माध्यम से निर्णायक कार्रवाई जारी रहेगी।

मिशन शक्ति: महिला सुरक्षा में सकारात्मक बदलाव

महिला सुरक्षा के मोर्चे पर मिशन शक्ति केंद्रों की स्थापना के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। प्रदेश के सभी थानों में इन केंद्रों के संचालन के लिए लगभग 13,500 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। राजीव कृष्ण के अनुसार, इन केंद्रों की स्थापना के बाद बलात्कार, महिलाओं और बच्चियों के अपहरण, दहेज हत्या तथा घरेलू हिंसा के मामलों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। गौरतलब है कि मिशन शक्ति को पहले चरण में महिला जागरूकता अभियान के रूप में शुरू किया गया था, जो अब थाना-स्तरीय संस्थागत ढाँचे में तब्दील हो चुका है।

साइबर अपराध नियंत्रण और तकनीक-आधारित पुलिसिंग

डीजीपी ने साइबर अपराध नियंत्रण को इस वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में गिनाया। लखनऊ के कल्ली पश्चिम में स्थापित साइबर क्राइम कॉल सेंटर की क्षमता 20 सीटों से बढ़ाकर 80 सीटें कर दी गई है और इसे 200 सीटों तक विस्तारित करने की योजना है। राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल के माध्यम से ₹400 करोड़ से अधिक की संदिग्ध धनराशि फ्रीज कराई गई, जबकि 1.11 लाख मोबाइल नंबर और 1.22 लाख आईएमईआई ब्लॉक किए गए। साइबर प्रशिक्षण के मामले में उत्तर प्रदेश देश में शीर्ष स्थान पर रहा — आई4सी के साइ-ट्रेन पोर्टल के माध्यम से 65,000 से अधिक पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित किया गया।

तकनीक-आधारित पुलिसिंग के अंतर्गत मुख्यमंत्री द्वारा दिसंबर 2025 में लॉन्च किए गए एआई-आधारित 'यक्ष' ऐप ने अपराधियों की पहचान, गैंग विश्लेषण, बीट मॉनिटरिंग और जटिल मामलों की जाँच में पुलिस को नई क्षमता प्रदान की है। अगले चरण में पुलिस मुख्यालय स्तर पर एक केंद्रीय एडवांस साइबर सेंटर स्थापित किया जाएगा, जहाँ डिजिटल फॉरेंसिक और साइबर जाँच के विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित होंगे।

सड़क सुरक्षा और भविष्य की कार्ययोजना

'जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट' योजना के परिणामस्वरूप 2026 की पहली तिमाही में सड़क दुर्घटनाओं में 7.43 प्रतिशत और मौतों में 11.55 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई, जिससे लगभग 450 लोगों की जान बचाई जा सकी। भविष्य की कार्ययोजना पर डीजीपी ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) के प्रभावी क्रियान्वयन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश पुलिस का लक्ष्य केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं, बल्कि प्रदेश में एक सुरक्षित, भयमुक्त और न्यायपूर्ण वातावरण सुनिश्चित करना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इनकी विश्वसनीयता तभी पूरी होगी जब इन्हें स्वतंत्र न्यायिक या सांख्यिकीय स्रोतों से सत्यापित किया जाए — अब तक ये केवल पुलिस के अपने दावे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब नए आपराधिक कानूनों — बीएनएस, बीएनएसएस और बीएसए — के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी राज्य पुलिस पर है और जवाबदेही का ढाँचा अभी पूरी तरह परखा नहीं गया। साइबर अपराध में शीर्ष प्रशिक्षण रैंकिंग उत्साहजनक है, परंतु असली कसौटी यह होगी कि क्या यह प्रशिक्षण जमीनी स्तर पर साइबर ठगी की शिकायतों के त्वरित निपटारे में तब्दील होता है। आँकड़ों की राजनीति से परे, नागरिकों के अनुभव — विशेषकर ग्रामीण और कमजोर तबकों के — ही इस 'बदली तस्वीर' की असली परीक्षा होंगे।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपी पुलिस की 93% दोषसिद्धि दर का क्या मतलब है?
डीजीपी राजीव कृष्ण के अनुसार, ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत बीते एक वर्ष में 32,071 मामलों में अदालती फैसले आए, जिनमें 29,911 में दोषसिद्धि हुई — यानी 93 प्रतिशत से अधिक सफलता दर। इसमें 18 मामलों में मृत्युदंड और 3,340 में आजीवन कारावास की सजा शामिल है।
मिशन शक्ति केंद्र क्या हैं और इनसे महिला सुरक्षा पर क्या असर पड़ा?
मिशन शक्ति केंद्र उत्तर प्रदेश के सभी थानों में स्थापित महिला सुरक्षा इकाइयाँ हैं, जिनके संचालन के लिए लगभग 13,500 पुलिसकर्मी तैनात हैं। डीजीपी के अनुसार, इन केंद्रों की स्थापना के बाद बलात्कार, अपहरण, दहेज हत्या और घरेलू हिंसा के मामलों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।
यूपी पुलिस ने साइबर अपराध रोकने के लिए क्या कदम उठाए हैं?
राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल के जरिए ₹400 करोड़ से अधिक की संदिग्ध धनराशि फ्रीज कराई गई और 1.11 लाख मोबाइल नंबर व 1.22 लाख आईएमईआई ब्लॉक किए गए। लखनऊ के कल्ली पश्चिम स्थित साइबर कॉल सेंटर की क्षमता 20 से बढ़ाकर 80 सीट की गई है और इसे 200 सीटों तक ले जाने की योजना है।
यक्ष ऐप क्या है और इसका पुलिसिंग में क्या उपयोग है?
यक्ष एक एआई-आधारित ऐप है जिसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिसंबर 2025 में लॉन्च किया था। यह अपराधियों की पहचान, गैंग विश्लेषण, बीट मॉनिटरिंग और जटिल मामलों की जाँच में पुलिस को तकनीकी सहायता प्रदान करता है।
जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट योजना से सड़क सुरक्षा में कितना सुधार हुआ?
डीजीपी के अनुसार, इस योजना के परिणामस्वरूप 2026 की पहली तिमाही में सड़क दुर्घटनाओं में 7.43 प्रतिशत और मौतों में 11.55 प्रतिशत की कमी आई। इससे लगभग 450 लोगों की जान बचाई जा सकी।
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