वंदे मातरम् वाटिका: योगी सरकार 15 अगस्त को UP के 75 जिलों में लगाएगी 150-150 पौधे
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने 15 अगस्त 2025 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रदेश के सभी 75 जनपदों में वंदे मातरम् वाटिका स्थापित करने का निर्णय लिया है। 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के अंतर्गत प्रत्येक जनपद में 150 पौधों का रोपण किया जाएगा — यह संख्या राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में निर्धारित की गई है। यह पहल पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रभक्ति के संदेश को एक साथ आगे ले जाने का प्रयास है।
मुख्य घटनाक्रम
वन विभाग ने इस अभियान की तैयारियाँ पहले ही शुरू कर दी हैं। प्रत्येक जनपद में एक चयनित स्थान पर वंदे मातरम् वाटिका विकसित की जाएगी, जिसमें स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल छायादार, फलदार और पर्यावरण-उपयोगी प्रजातियों के पौधे लगाए जाएंगे। पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी स्थानीय स्तर पर तय की जाएगी, ताकि यह अभियान एक स्थायी हरित धरोहर का रूप ले सके।
लखनऊ में अशोक चक्र थीम पर विशेष वाटिका
अवध वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी सितांशु पांडेय ने बताया कि लखनऊ के कुकरैल पिकनिक स्पॉट में स्वतंत्रता दिवस पर वंदे मातरम् वाटिका का विस्तार किया जाएगा। यहाँ अशोक चक्र का निर्माण कराया गया है, जिसकी 24 तीलियों के बाहरी क्षेत्र में अशोक के पौधे लगाए जाएंगे। पौधों की सुरक्षा के लिए चारों ओर फेंसिंग भी की जाएगी। इस कार्यक्रम में भारतीय वन सेवा के सेवानिवृत्त एवं वर्तमान अधिकारियों सहित समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधि पौधरोपण में भाग लेंगे।
जनसहभागिता पर ज़ोर
अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (सामाजिक वानिकी) दीपक कुमार ने बताया कि वंदे मातरम् वाटिका, 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। इस कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, विद्यालयों-महाविद्यालयों-विश्वविद्यालयों के विद्यार्थी, स्वयंसेवी संस्थाएं, एनसीसी, एनएसएस, युवक-महिला मंगल दल, वंदे मातरम् फाउंडेशन/ट्रस्ट और स्वतंत्रता सेनानियों के परिवार सहित विभिन्न सरकारी विभाग सहभागी बनेंगे। व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित कर इस पहल को जन-आंदोलन का स्वरूप देने की योजना है।
आम जनता पर असर
यह वाटिका न केवल हरित आवरण बढ़ाएगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रप्रेम, प्रकृति संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता का संदेश भी देगी। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में पहले भी कई विशिष्ट वन — जैसे 'संविधान वाटिका' और 'स्वतंत्रता सेनानी वन' — स्थापित किए जा चुके हैं, और यह पहल उसी श्रृंखला की अगली कड़ी है।
क्या होगा आगे
वन विभाग के अनुसार, 15 अगस्त के बाद पौधों की निगरानी और संरक्षण की जिम्मेदारी स्थानीय समितियों को सौंपी जाएगी। दीर्घकालिक लक्ष्य यह है कि ये वाटिकाएं प्रदेश में स्थायी हरित स्थलों के रूप में विकसित हों और नागरिकों के लिए पर्यावरण-जागरूकता के केंद्र बनें।