25 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

एसआईआर 2026 डेटा विवाद: वाईएसआरसीपी ने आंध्र प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को सौंपा ज्ञापन

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
एसआईआर 2026 डेटा विवाद: वाईएसआरसीपी ने आंध्र प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को सौंपा ज्ञापन

सारांश

वाईएसआरसीपी ने आंध्र प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर एसआईआर 2026 डेटा माँगा है — पुलिवेंदुला, पुंगनूर और उरावकोंडा में अधिकृत एजेंट्स को जानकारी न मिलने का आरोप है। कदिरी आरडीओ ने लॉगिन न होने का हवाला दिया। पार्टी का तर्क: चित्तूर में डेटा मिला, तो राज्यभर में क्यों नहीं?

मुख्य बातें

वाईएसआरसीपी ने 24 अगस्त 2026 को आंध्र प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी विवेक यादव को ज्ञापन सौंपा।
पार्टी ने एसआईआर 2026 से जुड़ा बूथवार डेटा — अनमैप्ड मतदाता, तार्किक विसंगतियाँ, नोटिस विवरण — अधिकृत बीएलए-1 और बीएलए-2 को उपलब्ध कराने की माँग की।
पुलिवेंदुला, पुंगनूर और उरावकोंडा में पार्टी प्रतिनिधियों को डेटा प्राप्त करने में गंभीर बाधाएँ आईं।
कदिरी आरडीओ कार्यालय ने लॉगिन या एक्सेस न होने का हवाला देते हुए डेटा देने में असमर्थता जताई।
पार्टी ने चित्तूर का बूथवार डेटा नमूने के तौर पर सौंपा, यह साबित करने के लिए कि जानकारी चुनाव तंत्र के पास उपलब्ध है।

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) ने 24 अगस्त 2026 को आंध्र प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी विवेक यादव को ज्ञापन सौंपकर मांग की कि राज्यभर में पार्टी के अधिकृत बूथ लेवल एजेंट्स (बीएलए) को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) 2026 से जुड़ा डेटा तत्काल उपलब्ध कराया जाए। पार्टी का आरोप है कि कई विधानसभा क्षेत्रों में अधिकृत प्रतिनिधियों को यह जानकारी न तो समय पर मिल रही है और न ही पूरी तरह।

मुख्य घटनाक्रम

वाईएसआरसीपी के राज्य महासचिव एवं विधान परिषद सदस्य लेल्ला अप्पी रेड्डी ने सोमवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंपा और तत्काल हस्तक्षेप की अपील की। उन्होंने कहा कि बीएलए-1 और बीएलए-2 — दोनों स्तरों के अधिकृत एजेंट्स — को एसआईआर-2026 से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी देने से रोका जा रहा है।

किस डेटा की मांग की गई

अप्पी रेड्डी ने विधानसभा क्षेत्रवार और बूथवार स्तर पर निम्नलिखित जानकारियाँ उपलब्ध कराने की माँग की है:

अनमैप्ड मतदाताओं का विवरण, तार्किक विसंगतियाँ और अनियमितताएँ, जारी किए गए नोटिसों का ब्यौरा, तथा वितरित एवं लंबित नोटिसों की स्थिति। पार्टी का तर्क है कि इस डेटा तक पहुँच के बिना मतदाता सूची का सही सत्यापन संभव नहीं है।

ज़मीनी दिक्कतें

वाईएसआरसीपी ने विशेष रूप से पुलिवेंदुला, पुंगनूर और उरावकोंडा विधानसभा क्षेत्रों का उल्लेख किया, जहाँ पार्टी प्रतिनिधियों को आवश्यक डेटा प्राप्त करने में गंभीर बाधाओं का सामना करना पड़ा। पार्टी का आरोप है कि कई स्थानों पर बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) ने भी बीएलए-2 को जानकारी देने से मना कर दिया।

अप्पी रेड्डी ने बताया कि वाईएसआरसीपी की एसआईआर संगठनात्मक टीम ने कदिरी स्थित राजस्व मंडल अधिकारी (आरडीओ) कार्यालय का दौरा कर बूथवार अनमैप्ड मतदाताओं और तार्किक विसंगतियों का डेटा माँगा था। आरडीओ कार्यालय ने यह कहते हुए डेटा देने में असमर्थता जताई कि उनके पास संबंधित लॉगिन या एक्सेस उपलब्ध नहीं है।

चित्तूर का उदाहरण और पार्टी का तर्क

वाईएसआरसीपी ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को चित्तूर विधानसभा क्षेत्र से संबंधित बूथवार डेटा का नमूना भी सौंपा, यह साबित करने के लिए कि यह जानकारी चुनाव तंत्र के पास मौजूद है। पार्टी का कहना है कि यदि एक क्षेत्र में यह डेटा उपलब्ध है, तो राज्यभर में इसे साझा करने के लिए एकसमान और स्पष्ट निर्देशों की ज़रूरत है।

आगे क्या

वाईएसआरसीपी ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी से चुनाव अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी करने की माँग की है, ताकि सभी अधिकृत राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि मतदाता सूची का सही सत्यापन कर सकें और वास्तविक त्रुटियाँ समय रहते चुनाव अधिकारियों के संज्ञान में आ सकें। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो मतदाता सूची के स्वतंत्र सत्यापन की प्रक्रिया कमज़ोर पड़ती है — जो लोकतांत्रिक जवाबदेही के लिए चिंताजनक है। चुनाव आयोग को यह स्पष्ट करना होगा कि एक्सेस की यह असमानता तकनीकी खामी है या नीतिगत अस्पष्टता।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसआईआर 2026 क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) 2026 मतदाता सूची को अद्यतन और शुद्ध करने की एक प्रक्रिया है, जिसमें अनमैप्ड मतदाताओं की पहचान, तार्किक विसंगतियों को दूर करना और नोटिस जारी करना शामिल है। यह प्रक्रिया चुनाव आयोग के निर्देश पर राज्यभर में चलाई जा रही है।
वाईएसआरसीपी ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी से क्या माँगा है?
वाईएसआरसीपी ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी विवेक यादव से माँग की है कि पार्टी के अधिकृत बीएलए-1 और बीएलए-2 को बूथवार अनमैप्ड मतदाताओं का विवरण, तार्किक विसंगतियाँ, और जारी-लंबित नोटिसों की जानकारी तत्काल उपलब्ध कराई जाए। साथ ही चुनाव अधिकारियों को इस बारे में स्पष्ट और एकसमान निर्देश दिए जाएँ।
किन विधानसभा क्षेत्रों में डेटा नहीं मिलने की शिकायत है?
वाईएसआरसीपी ने पुलिवेंदुला, पुंगनूर और उरावकोंडा विधानसभा क्षेत्रों का विशेष उल्लेख किया है, जहाँ पार्टी प्रतिनिधियों को एसआईआर 2026 डेटा प्राप्त करने में गंभीर दिक्कतें आई हैं। कदिरी आरडीओ कार्यालय ने भी लॉगिन या एक्सेस न होने का हवाला देते हुए डेटा देने में असमर्थता जताई।
पार्टी ने चित्तूर का डेटा क्यों सौंपा?
वाईएसआरसीपी ने चित्तूर विधानसभा क्षेत्र का बूथवार डेटा नमूने के रूप में मुख्य निर्वाचन अधिकारी को सौंपा, यह दर्शाने के लिए कि यह जानकारी चुनाव तंत्र के पास उपलब्ध है। पार्टी का तर्क है कि यदि एक क्षेत्र में डेटा साझा किया जा सकता है, तो राज्यभर में एकसमान निर्देशों से यह संभव होना चाहिए।
इस विवाद का मतदाताओं पर क्या असर हो सकता है?
यदि अधिकृत राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को मतदाता सूची का स्वतंत्र सत्यापन करने का अवसर नहीं मिलता, तो वास्तविक त्रुटियाँ और विसंगतियाँ अनदेखी रह सकती हैं। इससे मतदाता सूची की शुद्धता प्रभावित हो सकती है और पात्र मतदाताओं के नाम छूटने या फर्जी नाम बने रहने का जोखिम बढ़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 8 महीने पहले