जरूरत से ज्यादा सोना हो सकता है खतरनाक: 10+ घंटे की नींद के पीछे छिपी हो सकती हैं ये गंभीर बीमारियाँ
सारांश
मुख्य बातें
रोज़ाना 10 घंटे या उससे अधिक सोने के बाद भी यदि कोई व्यक्ति थकान और सुस्ती महसूस करे, तो चिकित्सकों के अनुसार यह किसी गंभीर अंदरूनी स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है। नई दिल्ली में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेताया है कि स्वस्थ वयस्कों के लिए 7 से 9 घंटे की नींद पर्याप्त मानी जाती है — इससे अधिक नींद सेहत के लिए लाभकारी नहीं, बल्कि चिंताजनक हो सकती है।
अत्यधिक नींद के शारीरिक प्रभाव
वैज्ञानिक शोधों से पता चलता है कि जरूरत से ज्यादा सोने पर शरीर की दैनिक गतिविधियाँ घट जाती हैं। लंबे समय तक बिस्तर पर पड़े रहने से वजन बढ़ने की आशंका बढ़ती है और शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ सकता है। इसके साथ ही अनेक लोग अधिक सोने के बाद भी भारीपन, सुस्ती और सिरदर्द की शिकायत करते हैं — जो इस बात का संकेत है कि नींद की मात्रा और गुणवत्ता दोनों अलग-अलग होती हैं।
किन बीमारियों का हो सकता है संकेत
चिकित्सकों के अनुसार, अत्यधिक नींद प्रायः किसी न किसी छिपी बीमारी की ओर इशारा करती है। स्लीप एपनिया (नींद में सांस रुकना), नार्कोलेप्सी (मस्तिष्क से जुड़ी नींद की बीमारी) और रेस्टलेस लेग सिंड्रोम (शरीर में बेचैनी) जैसी स्थितियाँ नींद को बार-बार बाधित करती हैं, जिससे व्यक्ति घंटों सोने के बाद भी थका रहता है।
इसके अलावा, थायरॉयड की गड़बड़ी, रक्त शर्करा का असंतुलन (ब्लड शुगर) और कुछ तंत्रिका तंत्र संबंधी विकार भी व्यक्ति को अत्यधिक नींद की ओर धकेल सकते हैं। हार्मोनल बदलाव और दीर्घकालिक बीमारियाँ भी इसकी वजह बन सकती हैं।
जीवनशैली से जुड़े कारण
केवल बीमारियाँ ही नहीं, बल्कि अनियमित दिनचर्या, लगातार मानसिक तनाव, असंतुलित खानपान और अत्यधिक कैफीन या शराब का सेवन भी नींद के स्वाभाविक चक्र को बिगाड़ सकते हैं। यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक हो जाता है जब शहरी जीवनशैली में अनियमित नींद की समस्या तेज़ी से बढ़ रही है। गौरतलब है कि बच्चों, किशोरों, गर्भवती महिलाओं और बीमारी से उबर रहे लोगों में नींद की ज़रूरत स्वाभाविक रूप से अधिक हो सकती है — यह असामान्य नहीं है।
किन लक्षणों पर तुरंत ध्यान दें
डॉक्टरों की सलाह है कि यदि अत्यधिक नींद के साथ-साथ तेज़ खर्राटे, सांस लेने में कठिनाई, अचानक वजन बढ़ना या याददाश्त कमज़ोर होना जैसे लक्षण भी दिखाई दें, तो बिना देर किए चिकित्सीय जाँच करानी चाहिए। इन लक्षणों को नज़रअंदाज़ करना आगे चलकर गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं को जन्म दे सकता है।
क्या करें, क्या न करें
विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि नींद का एक निश्चित समय तय करें, सोने से पहले स्क्रीन से दूरी बनाएँ और नियमित शारीरिक गतिविधि को दिनचर्या में शामिल करें। यदि नींद अचानक बढ़ जाए या लंबे समय तक थकान बनी रहे, तो इसे सामान्य मानकर टालने की बजाय किसी योग्य चिकित्सक से परामर्श लेना ही समझदारी है।