गोराई बीच पर तीन साल का अंधेरा खत्म: अदाणी इलेक्ट्रिसिटी और बीएमसी ने 2.5 किमी तटीय क्षेत्र किया रोशन

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गोराई बीच पर तीन साल का अंधेरा खत्म: अदाणी इलेक्ट्रिसिटी और बीएमसी ने 2.5 किमी तटीय क्षेत्र किया रोशन

सारांश

तीन साल की कोशिशों के बाद मुंबई के गोराई बीच पर रोशनी आई — लेकिन यह महज बल्ब जलाना नहीं था। अदाणी इलेक्ट्रिसिटी और बीएमसी ने समुद्री खारेपन और चट्टानी ज़मीन की चुनौती को खास इंजीनियरिंग से जीता। 90 पोल, 2.5 किमी रोशनी और एक पूरे समुदाय की राहत — यही है इस परियोजना की असली कहानी।

मुख्य बातें

अदाणी इलेक्ट्रिसिटी मुंबई लिमिटेड (एईएमएल) और बीएमसी ने 5 मई 2026 को गोराई बीच के 2.5 किमी क्षेत्र को रोशन किया।
बीच पर लगभग तीन साल से स्ट्रीट लाइट्स नहीं थीं, जिससे सुरक्षा और पर्यटन प्रभावित था।
पूरे क्षेत्र में 90 स्ट्रीट लाइट पोल लगाए गए, जो 5.25 मीटर ऊँचे हैं।
समुद्री खारेपन और चट्टानी भू-भाग से बचाव के लिए एचडीपीई पाइप स्लीव्स और विशेष डक्टिंग तकनीक अपनाई गई।
सरपंच रोसी डी'सूजा ने कहा कि रोशनी की कमी से स्थानीय लोगों की आवाजाही और आजीविका पर असर पड़ता था।

अदाणी इलेक्ट्रिसिटी मुंबई लिमिटेड (एईएमएल) और बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने मिलकर मुंबई के गोराई बीच के 2.5 किलोमीटर लंबे तटीय क्षेत्र को रोशन कर दिया है, जिससे इस लोकप्रिय समुद्र तट पर लगभग तीन साल से चला आ रहा अंधेरा आखिरकार खत्म हो गया। 5 मई 2026 को पूरी हुई इस परियोजना ने बोरीवली वेस्ट स्थित इस बीच पर सुरक्षा, सुलभता और पर्यटन को नई दिशा दी है।

क्यों था तीन साल से अंधेरा

गोराई बीच पर लंबे समय से स्ट्रीट लाइट्स की व्यवस्था नहीं थी। सूर्यास्त के बाद यहाँ सुरक्षा संबंधी चिंताएँ बढ़ जाती थीं और शाम को लोगों की आवाजाही सीमित हो जाती थी, जबकि यहाँ प्रतिदिन बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं।

इससे पहले भी लाइटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर लगाने के प्रयास किए गए थे, लेकिन चट्टानी और रेतीली सतह तथा अधिक खारेपन के कारण पोल और भूमिगत केबल तेजी से खराब हो जाते थे, जिससे हर बार परियोजना विफल हो जाती थी। यह ऐसे समय में आया है जब मुंबई के कई तटीय इलाकों में बुनियादी नागरिक सुविधाओं की कमी एक बड़ा मुद्दा बनी हुई है।

इंजीनियरिंग चुनौती और समाधान

इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए अदाणी इलेक्ट्रिसिटी के मीरा-भायंदर डिवीजन ने बीएमसी के साथ मिलकर एक विशेष और टिकाऊ लाइटिंग समाधान तैयार किया। परियोजना के तहत पूरे क्षेत्र में 90 स्ट्रीट लाइट पोल स्थापित किए गए हैं।

इसके लिए हाई-डेंसिटी पॉलीएथिलीन (एचडीपीई) पाइप स्लीव्स, मजबूत कंक्रीट फाउंडेशन और भूमिगत केबल्स के लिए विशेष सुरक्षा डक्टिंग जैसी इंजीनियरिंग तकनीकों का उपयोग किया गया, ताकि जंग से बचाव हो सके। 5.25 मीटर ऊँचे पोल पर विशेष डिजाइन वाले ब्रैकेट लगाए गए हैं, जिससे असमान इलाके में भी समान रोशनी सुनिश्चित होती है।

सुरक्षा और विश्वसनीयता के लिए उन्नत इंसुलेटेड केबलिंग और कई अर्थिंग पॉइंट्स लगाए गए हैं। मेंटेनेंस के लिए लैडर-आधारित सिस्टम भी शुरू किया गया है, जिससे सर्विस रोड की कमी के बावजूद भारी मशीनों की जरूरत नहीं पड़ेगी।

स्थानीय समुदाय और पर्यटन पर असर

नई लाइटिंग व्यवस्था के बाद गोराई बीच अब अधिक सुरक्षित और सुलभ सार्वजनिक स्थल बन गया है। दृश्यता बेहतर होने से निगरानी आसान हुई है और शाम के समय यहाँ आने वाले लोगों की संख्या में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

गोराई गाँव पंचायत के सरपंच रोसी डी'सूजा ने इस विकास का स्वागत करते हुए कहा,

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि तीन साल तक यह बुनियादी सुविधा क्यों नहीं मिल सकी — जबकि यह मुंबई का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। यह मामला उस बड़े अंतर को उजागर करता है जो सार्वजनिक नागरिक जिम्मेदारी और निजी कंपनियों की भागीदारी के बीच अक्सर देखा जाता है। बीएमसी जैसे निकाय के लिए यह विचारणीय है कि तटीय इलाकों में बुनियादी ढाँचे की विफलता को दूर करने में इतना समय क्यों लगता है। साथ ही, अदाणी इलेक्ट्रिसिटी की यह पहल कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व और व्यावसायिक हित के बीच की रेखा को भी परखती है।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गोराई बीच पर तीन साल से अंधेरा क्यों था?
गोराई बीच पर चट्टानी और रेतीली सतह तथा अधिक खारेपन के कारण पोल और भूमिगत केबल तेजी से खराब हो जाते थे, जिससे पहले के लाइटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रयास विफल रहे। इस कारण लगभग तीन साल तक बीच पर स्ट्रीट लाइट्स नहीं थीं।
अदाणी इलेक्ट्रिसिटी और बीएमसी ने गोराई बीच पर कितने पोल लगाए?
इस परियोजना के तहत पूरे 2.5 किलोमीटर क्षेत्र में 90 स्ट्रीट लाइट पोल लगाए गए हैं, जो 5.25 मीटर ऊँचे हैं। इनमें विशेष डिजाइन वाले ब्रैकेट लगाए गए हैं ताकि असमान इलाके में भी समान रोशनी मिले।
गोराई बीच लाइटिंग परियोजना में किन तकनीकों का उपयोग किया गया?
परियोजना में हाई-डेंसिटी पॉलीएथिलीन (एचडीपीई) पाइप स्लीव्स, मजबूत कंक्रीट फाउंडेशन, विशेष सुरक्षा डक्टिंग, उन्नत इंसुलेटेड केबलिंग और कई अर्थिंग पॉइंट्स का उपयोग किया गया। ये तकनीकें समुद्री खारेपन से होने वाले जंग को रोकने के लिए विशेष रूप से चुनी गईं।
गोराई बीच पर रोशनी से स्थानीय लोगों को क्या फायदा होगा?
गोराई गाँव पंचायत के सरपंच रोसी डी'सूजा के अनुसार, रोशनी की कमी से पहले स्थानीय लोगों की आवाजाही और आजीविका पर असर पड़ता था। अब पूरे तटीय क्षेत्र में रोशनी होने से सुरक्षा बढ़ी है, निगरानी आसान हुई है और शाम के समय पर्यटकों की संख्या में भी वृद्धि हुई है।
इस परियोजना का रखरखाव कैसे किया जाएगा?
मेंटेनेंस के लिए लैडर-आधारित सिस्टम शुरू किया गया है, जिससे सर्विस रोड की कमी के बावजूद भारी मशीनों की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह व्यवस्था दूरदराज के तटीय इलाकों में दीर्घकालिक रखरखाव को सुगम बनाती है।
राष्ट्र प्रेस
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