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अदाणी डिफेंस का ₹2,500 करोड़ का शिलान्यास: शिवपुरी बनेगा दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा निजी मिसाइल मैन्युफैक्चरिंग हब

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अदाणी डिफेंस का ₹2,500 करोड़ का शिलान्यास: शिवपुरी बनेगा दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा निजी मिसाइल मैन्युफैक्चरिंग हब

सारांश

शिवपुरी के कोलारस में अदाणी डिफेंस का ₹2,500 करोड़ का शिलान्यास महज़ एक फैक्ट्री का उद्घाटन नहीं — यह दक्षिण एशिया के निजी रक्षा उत्पादन के नक्शे को फिर से खींचने की कोशिश है। मिसाइल से लेकर प्रिसिजन म्यूनिशन तक, ग्वालियर-चंबल अंचल अब 'मेक इन इंडिया' की रक्षा महत्वाकांक्षा का नया केंद्र बनने की राह पर है।

मुख्य बातें

ज्योतिरादित्य सिंधिया और मुख्यमंत्री डॉ.
मोहन यादव ने शिवपुरी में अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस के डिफेंस कॉम्प्लेक्स का शिलान्यास किया।
परियोजना में कुल निवेश ₹2,500 करोड़ ; दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा निजी क्षेत्र का मिसाइल मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम।
कॉम्प्लेक्स में मिसाइल प्रणालियाँ , प्रिसिजन-गाइडेड म्यूनिशन और अत्याधुनिक रक्षा उपकरणों का निर्माण होगा।
लगभग 5,000 प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोज़गार सृजित होने का अनुमान; सैकड़ों MSME सप्लाई चेन से जुड़ेंगे।
परियोजना कोटा कॉरिडोर और बॉम्बे-ग्वालियर राष्ट्रीय राजमार्ग के निकट स्थित, रणनीतिक आपूर्ति के लिए अनुकूल।

केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 6 जुलाई 2025 को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में शिवपुरी जिले में अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस के ₹2,500 करोड़ के डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉम्प्लेक्स का शिलान्यास किया। यह परियोजना दक्षिण एशिया के निजी क्षेत्र का सबसे बड़ा मिसाइल एवं एडवांस्ड डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम बताई जा रही है, जो ग्वालियर-चंबल अंचल को देश के अग्रणी रक्षा उत्पादन केंद्र के रूप में स्थापित करेगी।

परियोजना का विवरण और रणनीतिक महत्व

शिवपुरी के कोलारस क्षेत्र में स्थापित होने वाले इस डिफेंस कॉम्प्लेक्स में आधुनिक मिसाइल प्रणालियाँ, प्रिसिजन-गाइडेड म्यूनिशन तथा अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियों का निर्माण किया जाएगा। परियोजना की भौगोलिक स्थिति भी रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है — यह कोटा कॉरिडोर एवं बॉम्बे-ग्वालियर राष्ट्रीय राजमार्ग के निकट है, जिससे देशभर के सैन्य प्रतिष्ठानों तक रक्षा उपकरणों की त्वरित आपूर्ति सुनिश्चित होगी।

सिंधिया ने कहा कि यह परियोजना भारत की स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमता और निर्यात संभावनाओं को नई मजबूती देगी तथा केंद्र सरकार के 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान को गति देगी।

रोज़गार और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर

केंद्रीय मंत्री के अनुसार, इस परियोजना से लगभग 5,000 प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोज़गार के अवसर सृजित होंगे। इसके अतिरिक्त, ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के सैकड़ों सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (MSME) रक्षा उत्पादन की सप्लाई चेन से जुड़ेंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को व्यापक लाभ मिलने की उम्मीद है।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार रक्षा आयात पर निर्भरता घटाने और घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित कर रही है। गौरतलब है कि भारत अभी भी दुनिया के सबसे बड़े रक्षा आयातकों में शामिल है।

सिंधिया परिवार की ऐतिहासिक विरासत से जोड़

सिंधिया ने इस अवसर पर ऐतिहासिक संदर्भ भी प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि महाराज महादजी सिंधिया के शासनकाल में मथुरा, दिल्ली, ग्वालियर, कालपी और गोहद में आयुध निर्माण कारखाने एवं शस्त्रागार स्थापित किए गए थे। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि महाराजा जीवाजीराव सिंधिया द्वारा ग्वालियर में स्थापित जीवाजी इंडस्ट्रियल रिसर्च लेबोरेटरी (JIRL) को बाद में रक्षा मंत्रालय को समर्पित किया गया, जो आगे चलकर आज के डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (DRDE) के रूप में विकसित हुई।

सिंधिया ने कहा, 'शिवपुरी में इस आधुनिक डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग परियोजना का शिलान्यास उसी गौरवशाली परंपरा का नया अध्याय है।'

राष्ट्रीय रक्षा नीति के संदर्भ में

सिंधिया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में ऐतिहासिक गति से आगे बढ़ रहा है। यह परियोजना उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। आने वाले वर्षों में यह कॉम्प्लेक्स न केवल घरेलू ज़रूरतें पूरी करेगा, बल्कि भारत की रक्षा निर्यात क्षमता को भी मज़बूत करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

500 करोड़ का यह निवेश भारत के रक्षा निजीकरण की बड़ी कहानी का हिस्सा है, लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन में होगी — घोषित 5,000 नौकरियाँ कब और किस रूप में साकार होंगी, इसका कोई स्पष्ट समयसीमा अभी सामने नहीं आई है। भारत अभी भी दुनिया के शीर्ष रक्षा आयातकों में है, और निजी क्षेत्र की बड़ी भागीदारी का यह दांव तभी सफल माना जाएगा जब उत्पादन, गुणवत्ता और निर्यात के मानक सार्वजनिक रूप से सत्यापित हों। सिंधिया परिवार की ऐतिहासिक विरासत का उल्लेख राजनीतिक रूप से प्रभावशाली है, परंतु नीतिगत जवाबदेही के लिए भावनात्मक आख्यान से परे ठोस मापन ढाँचे की ज़रूरत होगी।
RashtraPress
6 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिवपुरी में अदाणी डिफेंस का कॉम्प्लेक्स क्या बनाएगा?
शिवपुरी के कोलारस क्षेत्र में स्थापित होने वाले इस कॉम्प्लेक्स में आधुनिक मिसाइल प्रणालियाँ, प्रिसिजन-गाइडेड म्यूनिशन और अत्याधुनिक रक्षा उपकरणों का निर्माण किया जाएगा। यह दक्षिण एशिया का निजी क्षेत्र का सबसे बड़ा मिसाइल एवं एडवांस्ड डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम बताया जा रहा है।
इस परियोजना से कितने रोज़गार मिलेंगे?
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के अनुसार, इस परियोजना से लगभग 5,000 प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोज़गार के अवसर सृजित होंगे। इसके अलावा ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के सैकड़ों MSME रक्षा सप्लाई चेन से जुड़ेंगे।
ग्वालियर-चंबल अंचल को डिफेंस हब के लिए क्यों चुना गया?
यह क्षेत्र कोटा कॉरिडोर और बॉम्बे-ग्वालियर राष्ट्रीय राजमार्ग के निकट है, जिससे देशभर के सैन्य प्रतिष्ठानों तक रक्षा उपकरणों की त्वरित और प्रभावी आपूर्ति संभव होगी। इसके अतिरिक्त, इस क्षेत्र की ऐतिहासिक रक्षा-औद्योगिक विरासत भी एक कारक रही है।
अदाणी डिफेंस की इस परियोजना का 'मेक इन इंडिया' से क्या संबंध है?
यह परियोजना केंद्र सरकार के 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत भारत की स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक कदम है। इससे रक्षा आयात पर निर्भरता घटाने और निर्यात संभावनाएँ बढ़ाने का लक्ष्य है।
DRDE और सिंधिया परिवार का ग्वालियर के रक्षा इतिहास से क्या संबंध है?
महाराजा जीवाजीराव सिंधिया द्वारा ग्वालियर में स्थापित जीवाजी इंडस्ट्रियल रिसर्च लेबोरेटरी (JIRL) को बाद में रक्षा मंत्रालय को समर्पित किया गया, जो आज के डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (DRDE) के रूप में विकसित हुई। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने नई परियोजना को इसी ऐतिहासिक परंपरा का विस्तार बताया।
राष्ट्र प्रेस
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